पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने हाल ही में एक विवादास्पद बयान देते हुए अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से अपील की है कि वे इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को गिरफ्तार करें और उन्हें न्यायालय में पेश करें. ख्वाजा आसिफ ने कहा कि अगर अमेरिका मानवता और अंतरराष्ट्रीय कानून में विश्वास रखता है, तो उसे नेतन्याहू के खिलाफ वही कार्रवाई करनी चाहिए जैसी हाल ही में वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के साथ की गई.
पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ने एक स्थानीय न्यूज चैनल को दिए इंटरव्यू में नेतन्याहू को “मानवता का सबसे बड़ा दुश्मन” बताया. उन्होंने दावा किया कि गाजा में फिलिस्तीनी लोगों के खिलाफ किए गए अत्याचार इतिहास में अब तक किसी भी अन्य अत्याचार के बराबर नहीं हैं. ख्वाजा आसिफ ने कहा कि पिछले चार-पाँच हज़ार सालों में किसी भी समुदाय ने फिलिस्तीनियों के साथ वह अत्याचार नहीं किया जो इजरायल ने किया. इसके अलावा उन्होंने तुर्की पर भी संकेत दिया कि वह अगर चाहे तो नेतन्याहू को गिरफ्तार कर सकता है, और पाकिस्तानी इस दिशा में प्रार्थना कर रहे हैं. उनके अनुसार, यह कदम दुनिया को यह दिखाने का अवसर होगा कि मानवता और न्याय की रक्षा किस तरह की जा सकती है.
पाकिस्तान और इजरायल के संबंध: पाकिस्तान ने कभी भी इजरायल को आधिकारिक रूप से मान्यता नहीं दी है. देश की विदेश नीति हमेशा से फिलिस्तीनी मुद्दे के पक्ष में रही है. इसके साथ ही पाकिस्तान अपने संबंधों को ईरान के साथ भाईचारे और साझा क्षेत्रीय हितों के आधार पर पेश करता रहा है. ख्वाजा आसिफ के बयान ने इसी राजनीतिक और क्षेत्रीय दृष्टिकोण को और स्पष्ट रूप से दर्शाया है.
वेनेजुएला के हालात का संदर्भ: पाकिस्तानी रक्षा मंत्री का बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका ने हाल ही में वेनेजुएला में कार्रवाई करते हुए राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को गिरफ्तार किया. अमेरिकी फेडरल कोर्ट के प्रवक्ता के अनुसार मादुरो पर नार्को-टेररिज्म और ड्रग तस्करी जैसे गंभीर अंतरराष्ट्रीय अपराधों के आरोप तय किए गए हैं. डोनाल्ड ट्रंप ने इस कार्रवाई के बाद कहा कि अमेरिका पहले वेनेजुएला के हालात को स्थिर करेगा और देश के तेल उद्योग को पुनः स्थापित करेगा. इसके बाद ही वहां लोकतांत्रिक चुनाव कराए जा सकेंगे. उनके अनुसार, मादुरो के लंबे शासन के दौरान वेनेजुएला की राजनीतिक और आर्थिक स्थिति पूरी तरह बिखर चुकी है, और इस समय देश में सुरक्षित और निष्पक्ष चुनाव कराना असंभव है.
विश्लेषक क्या कहते हैं
विशेषज्ञों का मानना है कि ख्वाजा आसिफ का बयान क्षेत्रीय राजनीति और अमेरिकी विदेश नीति पर दबाव डालने का एक राजनीतिक संकेत है. जबकि अमेरिका फिलिस्तीन और इजरायल के बीच विवाद में सीधे हस्तक्षेप से बचता रहा है, ऐसे बयान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा और ध्यान खींचने का एक तरीका माने जाते हैं. कुल मिलाकर, ख्वाजा आसिफ के हालिया बयान ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में फिलिस्तीनी मुद्दे की संवेदनशीलता को फिर से उभारा है और अमेरिका, इजरायल और पाकिस्तान के बीच संभावित कूटनीतिक बहस के नए आयाम खोल दिए हैं.
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