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“हर्षा रिछारिया के वायरल वीडियो पर स्वामी आनंद ने लगाई लताड़”

साल 2025 के प्रयागराज महाकुंभ में सुर्खियों में आई हर्षा रिछारिया एक बार फिर जबरदस्त विवादों के केंद्र में हैं. इस बार वजह बना उनका सोशल मीडिया पर जारी किया गया 2 मिनट 38 सेकेंड का वीडियो, जिसमें उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि ‘मैं कोई सीता माता नहीं हूं और धर्म छोड़ती हूं.’ इस बयान के सामने आते ही सोशल मीडिया से लेकर संत समाज तक तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं. हर्षा रिछारिया ने अपने पोस्ट में यह भी लिखा कि मौनी अमावस्या के बाद वह धर्म के रास्ते से हटकर अपने पुराने प्रोफेशन में लौट जाएंगी. इस ऐलान के बाद एक तरफ जहां कुछ लोग इसे उनका निजी फैसला बता रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कई संत और धार्मिक संगठन इसे सनातन धर्म का अपमान करार दे रहे हैं.

धर्म छोड़ने के बयान पर मचा बवाल

हर्षा के इस फैसले ने धार्मिक हलकों में बड़ी बहस छेड़ दी है. सोशल मीडिया पर उन्हें लेकर दो धड़े साफ नजर आ रहे हैं. एक वर्ग उनके निर्णय को व्यक्तिगत आज़ादी से जोड़ रहा है, जबकि दूसरा वर्ग इसे आस्था के साथ खिलवाड़ बता रहा है. इस पूरे विवाद में काली सेना के प्रमुख आनंद स्वरूप महाराज का बयान सबसे ज्यादा चर्चा में है. उन्होंने हर्षा रिछारिया पर बेहद सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि ‘सनातन धर्म कोई बॉयफ्रेंड नहीं है, जो आज पकड़ लिया और कल छोड़ दिया.’ आनंद स्वरूप महाराज ने हर्षा को ‘रीलबाज’ करार देते हुए कहा कि उन्होंने पहले ही दिन आगाह कर दिया था कि यह साधु नहीं हैं. उनके मुताबिक, ऐसे लोग ग्लैमर की दुनिया से आते हैं और सनातन धर्म का इस्तेमाल सिर्फ पहचान और प्रसिद्धि के लिए करते हैं.

हर्षा रिछारिया ने कहा है कि वह ‘सीता माता नहीं हैं’ और सनातन की राह छोड़ रही हैं, आप इसे कैसे देखते हैं? ‘उन्होंने सही कहा कि वो सीता माता नहीं हैं. मैंने पहले दिन ही कह दिया था कि ये रीलबाज है, ये साधु नहीं है. इन लोगों को सनातन धर्म से कोई मतलब नहीं है. ग्लैमर की दुनिया से आई हैं और सीधे कुंभ में प्रकट हो गईं.’ अग्नि परीक्षा कौन मांग रहा है? तुम खुद अपनी बातें खुद से कह रही हो. हमने तो ऐसा कुछ कहा ही नहीं. लेकिन ऐसे लोग हमेशा सनातन धर्म को बदनाम करते हैं और फिर छोड़कर चले जाते हैं.’

2027 हरिद्वार कुंभ में ‘रीलबाजों’ को रोका जाएगा?

‘सनातन धर्म कहता है-अहिंसा परमो धर्म. लेकिन अगर इन नालायकों की वजह से धर्म बदनाम होगा, तो इन्हें बाहर करना पड़ेगा. अगर मछली मरकर पानी में सड़ रही है, तो मछली निकालनी होती है, पानी नहीं बदलना.’ सवाल- क्या अखाड़ों से बातचीत होगी कि ऐसे लोग कुंभ में न आएं? अखाड़े धर्म रक्षा के लिए बने थे. आज फर्जी लोगों को महामंडलेश्वर बनाया जा रहा है, जिससे इस पद की गरिमा खत्म हो रही है. ऐसे लोग जिन्हें भिखारी भी नहीं कह सकते, उन्हें बड़े पद दिए जा रहे हैं.’

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