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“लोकसभा के बाद राज्यसभा में खड़गे और नड्डा के बीच तीखी नोकझोंक से सदन गरमाया”

गुरुवार को राज्यसभा में उस समय गरमागरम माहौल देखने को मिला जब विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे और केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा संसदीय प्रक्रिया को लेकर एक-दूसरे से तीखी बहस में उलझ गए। यह घटना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लोकसभा भाषण के बाधित होने के एक दिन बाद हुई। दोनों नेताओं के बीच तीखी नोकझोंक तब शुरू हुई जब खरगे ने संसद में राष्ट्रीय हित के मुद्दों पर बोलने पर लगाए जा रहे प्रतिबंधों पर आपत्ति जताई।

लोकसभा में हुई बाधा का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि निचले सदन में कांग्रेस नेता और विपक्ष के नेता राहुल गांधी को राष्ट्रीय हित के मुद्दों पर बोलने की अनुमति नहीं दी गई, जिस पर नड्डा ने तीखी प्रतिक्रिया दी। खरगे ने पूछा कि संसद का अर्थ लोकसभा और राज्यसभा दोनों है। लोकसभा में विपक्ष के नेता देश के हितों पर बोलना चाहते थे, लेकिन उन्हें बोलने नहीं दिया गया। इस तरह सदन कैसे चलाया जा सकता है?

राज्यसभा में सदन के नेता नड्डा ने कड़ा जवाब देते हुए इस आरोप को खारिज कर दिया और सदन को संसदीय परंपराओं की याद दिलाई। लोकसभा में राहुल गांधी को बोलने न देने का मुद्दा उठाने पर नड्डा ने राज्यसभा में कहा कि लोकसभा की कार्यवाही पर राज्यसभा में चर्चा नहीं की जा सकती, मेरे सम्मानित सहकर्मी को यह बात पता होनी चाहिए। नड्डा ने आगे कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व वाली सरकार किसी भी विषय पर चर्चा करने के लिए हमेशा तत्पर है।

नड्डा ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी लोकसभा में किसी भी प्रश्न का उत्तर देने के लिए हमेशा तैयार हैं, लेकिन विपक्ष सदन की कार्यवाही को आगे नहीं बढ़ने दे रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने विपक्ष के अनुरोध पर भारत-अमेरिका व्यापार समझौतों पर बयान दिया है। खरगे ने आगे आरोप लगाया कि भाजपा लोगों को बोलने नहीं देती, और कहा कि पार्टी ने प्रधानमंत्री मोदी को जंजीरों में जकड़ रखा है, उन्हें बोलने नहीं दे रही। उन्होंने कहा कि सत्ताधारी दल के लोग बंधुआ मजदूर हैं। विपक्ष सत्ताधारी दल की तरह दूसरों को गाली-गलौज या अपशब्द नहीं कहता। मैं बता रहा हूं कि कैसे जनता को बोलने न देकर जनता को कुचल रही है।

बहस तेज होते देख वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने हस्तक्षेप करते हुए मांग की कि खरगे द्वारा इस्तेमाल किया गया शब्द “लिंच” रिकॉर्ड से हटा दिया जाए। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने भी इस मामले में दखल देते हुए बजट सत्र के दौरान बार-बार हो रही बाधाओं के बीच सदन के नियमों और परंपराओं का पालन करने का आग्रह किया। रिजिजू ने कहा कि आज सभी सांसद नियमों और परंपराओं के पालन की उम्मीद कर रहे हैं। सभी राज्यसभा में प्रधानमंत्री का भाषण सुनने का इंतजार कर रहे हैं। अगर कांग्रेस प्रधानमंत्री का भाषण नहीं सुनना चाहती, तो यह उसकी मर्जी है, लेकिन अन्य सदस्य सुनना चाहते हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि लोकसभा में विपक्ष के नेता ने सदन के नियमों का पालन नहीं किया।

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