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यूपी में बिजली व्यवस्था का बड़ा यू-टर्न: प्रीपेड मीटर की अनिवार्यता खत्म, अब लागू होगा नया सिस्टम

लखनऊ में बिजली बिल और मीटर को लेकर लंबे समय से चल रही बहस में अब उपभोक्ताओं के पक्ष में फैसला आया है. केंद्र सरकार ने प्रीपेड स्मार्ट मीटर की अनिवार्यता पूरी तरह खत्म कर दी है. अब सिर्फ स्मार्ट मीटर लगाए जाएंगे, लेकिन वे प्रीपेड हों या पोस्टपेड, यह फैसला पूरी तरह उपभोक्ता पर निर्भर करेगा. केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) ने यह आदेश जारी किया है. आदेश के मुताबिक, जहां संचार नेटवर्क उपलब्ध है, वहां सभी नए और पुराने बिजली कनेक्शनों पर स्मार्ट मीटर लगाए जाएंगे, लेकिन प्रीपेड मोड अब अनिवार्य नहीं रहेगा.

प्रदेश में 78 लाख स्मार्ट मीटर लग चुके

उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन के आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश में अभी 78 लाख से अधिक स्मार्ट मीटर लग चुके हैं, जिनमें 70 लाख प्रीपेड स्मार्ट मीटर हैं. नए कनेक्शनों पर अब तक अनिवार्य रूप से प्रीपेड मीटर ही लगाए जा रहे थे. राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने इस अनिवार्यता का लगातार विरोध किया था. संसद में उठे सवालों के जवाब में केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने स्पष्ट कहा था कि प्रीपेड मीटर लगाना अनिवार्य नहीं है. यह पूरी तरह उपभोक्ताओं की इच्छा पर निर्भर करता है.

विद्युत अधिनियम 2003 के तहत हुआ संशोधन

केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण ने विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 47(5) के तहत पहले दिए गए आदेश में संशोधन करते हुए प्रीपेड की अनिवार्यता हटा दी है. अब उपभोक्ता अपनी सुविधा के अनुसार प्रीपेड या पोस्टपेड मोड चुन सकेंगे. राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने इस फैसले पर खुशी जताते हुए कहा कि देशभर के विद्युत उपभोक्ताओं ने लंबी लड़ाई के बाद यह जीत हासिल की है. अब कोई भी उपभोक्ता बिना अपनी मर्जी के प्रीपेड मीटर लगवाने को मजबूर नहीं होगा. यह फैसला उन लाखों उपभोक्ताओं के लिए राहत भरा है, जो प्रीपेड मीटर में बिल रिचार्ज, तकनीकी गड़बड़ी और बार-बार रिचार्ज की झंझट से परेशान थे. अब वे अपनी सुविधा के अनुसार मीटर का मोड चुन सकेंगे.

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