“बंगाल में SIR पर भड़के BJP सांसद अनंत रॉय मचा सियासी तूफान”

पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के स्पेशल इनटेंसिव रिवीजन ( SIR) का राज्य की सत्तारूढ़ पार्टी तृणमूल कांग्रेस और मुखयमंत्री लगातार विरोध कर रही हैं. SIR के विरोध में ममता बनर्जी सोमवार को दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से मुलाकात करने वाली हैं, लेकिन उससे पहले SIR को लेकर भाजपा के राज्यसभा सांसद अनंत रॉय ने नाराजगी जताई है और अलग कूचबिहार की मांग कर दी है. अनंत रॉय ने दावा किया कि वे एग्रीमेंट के आधार पर भारतीय हैं. समझौते के जरिए कूचबिहार को भारत में शामिल किया गया था. उन्होंने केंद्र को साफ चेतावनी देते हुए कहा कि अगर ऐतिहासिक कूचबिहार समझौता लागू नहीं हुआ, तो उन्हें अलग कर दिया जाएगा. उन्होंने दावा किया कि कूचबिहार किसी डोनेशन या कब्जे का नतीजा नहीं था, बल्कि यह इलाका समझौते के जरिए भारत में शामिल हुआ था. इसलिए, उस समझौते की शर्तों का पालन करना केंद्र सरकार की संवैधानिक और नैतिक जिम्मेदारी है.

अनंत महाराज ने अलग कूचबिहार की मांग की

उन्होंने कहा, “कूचबिहार समझौता के जरिए भारत में शामिल हुआ था. उस समझौते का पालन होना चाहिए. नहीं तो हमें अलग कर दो.” साथ ही, उन्होंने केंद्र को चेतावनी देते हुए कहा, “प्रधानमंत्री हर पांच साल में बदल जाते हैं, लेकिन देश वही रहता है. सरकार बदलने पर भी राज्य की जिम्मेदारी नहीं बदलती.” बीजेपी सांसद ने चुनाव आयोग के हाल के नागरिकता वेरिफिकेशन प्रोसेस पर भी कड़ी आपत्ति जताई. उन्होंने आरोप लगाया कि आदिवासी समुदायों के मामले में पहचान या नागरिकता के डॉक्यूमेंट दिखाने की जरूरत नहीं है, वहीं कूचबिहार के आम लोगों से बार-बार पेपर मांगे जा रहे हैं. उन्होंने दावा किया कि यह दोहरा मापदंड संवैधानिक समानता के खिलाफ है.

अनंत रॉय ने SIR पर जताई आपत्ति

अनंत रॉय ने कहा, “आदिवासियों को पेपर दिखाने की जरूरत नहीं है, लेकिन चुनाव आयोग हमसे पेपर क्यों मांग रहा है? आयोग जो प्रोसेस कर रहा है, वह पूरी तरह से गलत है.” उन्होंने यह भी कहा, “इस तरह के वेरिफिकेशन प्रोसेस से कूचबिहार के लोगों में घबराहट और अनिश्चितता पैदा हो रही है.” चुनाव आयोग की भूमिका पर कड़ी टिप्पणी करते हुए अनंत रॉय ने कहा, “ऐसे काम के लिए चुनाव आयोग को जेल होनी चाहिए.” उनके इस कमेंट को लेकर राजनीतिक हलकों में गरमागरम बहस शुरू हो गई है. हालांकि अनंत रॉय के बयान को लेकर बीजेपी और विपक्षी खेमे में अलग-अलग प्रतिक्रियाएं आई हैं लेकिन राजनीतिक जानकारों का मानना ​​है कि कूचबिहार समझौता और नागरिकता वेरिफिकेशन के मुद्दे एक बार फिर राज्य और राष्ट्रीय राजनीति को गरमा देंगे.

बीजेपी के लिए क्यों खास हैं अनंत महाराज?

अनंत रॉय उर्फ ​​अनंत महाराज कई सालों से ग्रेटर कूचबिहार को केंद्र शासित प्रदेश बनाने की मांग कर रहे हैं. वह राजबंशी समुदाय से हैं, जो 2011 की जनगणना के अनुसार पश्चिम बंगाल में सबसे बड़ा अनुसूचित जाति (SC) ग्रुप है, जिसमें राज्य की 21.4 मिलियन आबादी में से 18% से ज्यादा लोग इस समुदाय से हैं. राजबंशी वोट को ध्यान में रखते हुए बीजेपी ने 2023 में अनंत महाराज को बंगाल से अपना राज्यसभा का सांसद बनाया है. वहीं, टीएमसी भी राजबंशियों को जोश के साथ लुभा रही है. 2017 में, राज्य सरकार ने बंशीबदन बर्मन को चेयरमैन बनाकर राजबंशी डेवलपमेंट बोर्ड बनाया था.

अलग कामतापुर राज्य की मांग

राजबंशी समुदाय उत्तर बंगाल के छह (अब सात) जिलों और निचले असम के कुछ जिलों को मिलाकर एक अलग कामतापुर राज्य की मांग लंबे समय से कर रहा है. इसी मांग की वजह से कुछ राजबंशी युवाओं ने 1993 में कुमारग्रामद्वार ब्लॉक में कामतापुर लिबरेशन ऑर्गनाइजेशन (KLO) बनाया था. 1996 में, आंदोलन को डेमोक्रेटिक रूप देने के लिए कामतापुर पीपुल्स पार्टी (KPP) बनाई गई थी. माटीगारा-नक्सलबाड़ी – दार्जिलिंग, जलपाईगुड़ी, अलीपुरद्वार और कूचबिहार आदि इलाकों में राजबंशी समुदाय का बाहुल्य है. इन वोटरों को लुभाने के लिए ही सभी पार्टियां चुनाव से पहले राजबंशी कार्ड खेलती हैं. इस साल बंगाल में विधानसभा चुनाव होने हैं. इस वजह से राजबंशी समुदाय को लेकर राज्य की सियासत गरमाई हुई है.

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