पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के हालिया दौरे को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक विवाद खड़ा हो गया है। आरोप है कि इस दौरान तय प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया गया और कार्यक्रम के स्थान में भी अचानक बदलाव कर दिया गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्रीय गृह मंत्रालय ने राज्य सरकार से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। जानकारी के अनुसार, केंद्रीय गृह सचिव ने पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव को पत्र भेजकर शाम 5 बजे तक पूरी घटना पर स्पष्टीकरण देने को कहा है। रिपोर्ट में राष्ट्रपति के स्वागत से जुड़ी व्यवस्थाओं, मार्ग की जानकारी और सुरक्षा प्रोटोकॉल से जुड़े पहलुओं की जानकारी मांगी गई है।
यह मामला राष्ट्रपति मुर्मू के उत्तर बंगाल दौरे के दौरान सामने आया। वह दार्जिलिंग जिले में आयोजित 9वें अंतरराष्ट्रीय संथाल सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होने पहुंची थीं। पहले यह कार्यक्रम फांसीदेवा ब्लॉक के बिधाननगर क्षेत्र में आयोजित होने वाला था, जहां बड़ी संख्या में संथाल आदिवासी समुदाय के लोगों के पहुंचने की संभावना थी। लेकिन राज्य प्रशासन ने सुरक्षा और भीड़भाड़ का हवाला देते हुए कार्यक्रम का स्थान बदलकर बागडोगरा एयरपोर्ट के पास गोसाईंपुर कर दिया। बताया जाता है कि नए स्थान के छोटे होने के कारण कई लोग कार्यक्रम में शामिल नहीं हो सके। इस बदलाव पर राष्ट्रपति ने भी नाराजगी जताई थी। जानकारी के मुताबिक राष्ट्रपति के दौरे के दौरान कई प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया गया। आम तौर पर राष्ट्रपति के आगमन पर मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक जैसे वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहते हैं, लेकिन इस कार्यक्रम में ऐसा नहीं हुआ।
जानकारी के अनुसार, राष्ट्रपति के स्वागत के लिए केवल सिलीगुड़ी के मेयर मौजूद थे। इसके अलावा कार्यक्रम स्थल की व्यवस्थाओं को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। कुछ रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया कि राष्ट्रपति के लिए तैयार किए गए वॉशरूम में पानी की व्यवस्था नहीं थी और जिस रास्ते से प्रशासनिक दल गुजरा, वहां साफ-सफाई की कमी देखी गई। इस घटना पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि पश्चिम बंगाल सरकार ने राष्ट्रपति के प्रति असम्मानजनक व्यवहार किया है, जो संवैधानिक मूल्यों के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद के साथ इस तरह का व्यवहार लोकतंत्र के लिए चिंता का विषय है। शाह ने यह भी आरोप लगाया कि यह घटना राज्य सरकार की प्रशासनिक अव्यवस्था को दर्शाती है।
दूसरी ओर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इन आरोपों को खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि वह राष्ट्रपति का पूरा सम्मान करती हैं, लेकिन हर कार्यक्रम में शामिल होना संभव नहीं होता। ममता बनर्जी ने यह भी कहा कि जिस सम्मेलन की बात की जा रही है, उसके आयोजन या फंडिंग के बारे में राज्य सरकार को कोई जानकारी नहीं दी गई थी। उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति के दौरे की जानकारी तो मिलती है, लेकिन इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के आयोजन में राज्य सरकार की कोई भूमिका नहीं थी।
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