यह कहानी है दो ऐसे भ्रष्ट कर्मचारियों की, जिन्होंने जल्दी अमीर बनने की लालच में इंसानियत तक बेच दी. इन्हें अपनी सैलरी कम लगती थी, इसलिए लावारिस लाशों का सौदा करना शुरू कर दिया. इनमें से एक उत्तर प्रदेश पुलिस का सिपाही था और दूसरा जिला अस्पताल के पोस्टमार्टम हाउस में तैनात कर्मचारी. दोनों ने मिलकर लावारिस शवों की अवैध खरीद-फरोख्त कर मोटी कमाई की. यह मामला उत्तर प्रदेश के बरेली से सामने आया है.
भ्रष्टाचार से जुड़ा एक ऑडियो-वीडियो वायरल होने के बाद एसएसपी अनुराग आर्य ने बरेली के कोतवाली थाने के कांस्टेबल नरेंद्र प्रताप को निलंबित कर दिया है. साथ ही जिला अस्पताल के पोस्टमार्टम हाउस में ठेका एजेंसी का कर्मचारी सुनील, जो इस गोरखधंधे में सक्रिय था, उसे सीएमओ ने हटा दिया है. अब इस पूरे मामले की जांच संयुक्त टीम करेगी. सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में दिखाई दे रहा है कि पोस्टमार्टम हाउस से लावारिश लाशों को मेडिकल कॉलेजों और अन्य जगहों पर बेचने की डील कैसे होती थी. सौदेबाजी में सुनील खुलकर बात करता दिखा, वहीं सिपाही नरेंद्र प्रताप न सिर्फ सहयोग करता, बल्कि इंस्पेक्टर तक को साधने की बात करता नज़र आया.
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