जालंधर: 1969 में बना पंजाब का डीजल मोटर यूनिट (डीएमयू) को करीब 300 करोड़ रुपये की लागत के साथ हाईटेक रूप दिया जाएगा। जिसे लेकर करीब सवा साल पहले से चलती आ रही प्लानिंग और प्रस्तावों पर रेलवे बोर्ड की तरफ से चंद दिन पहले ही मोहर लगा कर हरी झंडी दे डाली है। जिसके बाद इस शेड में अब केवल डीएमयू के डीजल व इलेक्ट्रिकल मोटर यूनिट (ईएमयू) इंजनों की ही नहीं बल्कि शताब्दी एक्सप्रेस और वंदे भारत एक्सप्रेस जैसी ट्रेनों के इंजनों की रिपेयर के साथ-साथ उनकी मेंटनेंस भी होगी ये सुविधाएं शुरू होने के साथ ही ये नार्दर्न रेलवे का पहला डीपो भी बन जाएगा। मौजूदा समय में वंदे भारत और शताब्दी के इंजनों को लखनऊं में मेंटनेंस की जाती है। इस प्रोजेक्ट के विस्तार होने के साथ ही भविष्यवादी योजनाओं के तहत साथ-साथ अपडेट भी किया जाता रहेगा।

क्योंकि ये डीपू कोचिंग ट्रेन आप्रेशंस की समग्र जरूरतों को एक ही स्थान पर पूरा करने के उद्देश्यों को ध्यान में रखते हुए तैयार किए जा रहे हैं। जिसके लिए रेलवे की तरफ से पोस्टें भी निकाली जाएगी और रोजगार की संभावनाएं भी बढ़ेंगी। फिलहाल पहले अप्रेल महीने के अंतिम सप्ताह व मई के शुरूआत में जालंधर स्टेशन की नई बिल्डिंग के निर्माण संबंधी कार्य किए जाएंगे। उसके बाद शेड से जुड़े विकास कार्य शुरू किए जाएंगे।
450 मीटर लंबा ट्रैक तैयार किया जाएगा, क्वार्टरों को तोड़ा जाएगा
इस शेड को इंटीग्रेटेड कोचिंग डिपो के लिए लगभग 450 मीटर लंबा ट्रैक चाहिए। जिससे इसका डिजाइन पूरी तरह से बदला जाएगा। वहीं डीएमयू शेड के आगे वाले हिस्से व 40 क्वार्टर चौक से संत नगर फाटक तक जाने वाले एरिया में पड़ते रेलवे कर्मचारियों के क्वार्टरों को तोड़ कर एरिया कवर किया जाएगा जिसके लिए नई रेल लाइन तक बिछाई जाएगा। इसके तैयार होने से ट्रेनों के संचालन भी बेहद आसान और सुघम होगा। क्योंकि शताब्दी व वंदे भारत जैसे रेल गाड़ियों को अभी भी बीच-बीच में एक-एक दिन मेंटनेंस के लिए भेज कर दोबारा चलाया जाता है। इसके लिए जालंधर पंजाब ही नहीं जेएंडके और हिमाचल को रेल मार्ग से जोड़ने की है कड़ीउत्तर रेलवे जोन में जालंधर स्टेशन इसलिए भी महत्वपूर्ण स्थान है कि क्यूं पंजाब का पहला डीएमयू शेड मौजूद है।
यहीं से निकलने वाली रेल लाइन केवल पंजाब ही नहीं बल्कि जेएंडके के साथ-साथ हिमाचल के रेल संचालन को भी जोड़ती है। जहां पहले ही डीएमयू, ईएमयू ट्रेनों की मरम्मत, रखरखाव को लेकर संचालन किया जा रहा है। कोचिंग ट्रेनों की रेक मेंटेनेंस स्थानीय स्तर पर होगी, तो फाल्ट्स आने की सूरत में तुरंत उसकी रिपेयरिंग भी संभव हो जाएगा। जहां पर आने वाले समय में मेल, एक्सप्रैस ट्रेनों के कोचों का भी निरीक्षण, सफाई, मुरम्मत आदि तकनीकी कार्य किए जाएंगे। इस इंटीग्रेटेड कोचिंग डिपो में आधुनिक उपकरणों, आवश्यक संसाधनों की व्यवस्था यही होगी।
डीएमयू शेड के साथ ही बनाया हुआ है पंजाब का दूसरा ऑटोमेटिक कोच वॉशिंग प्लांट
डीएनयू शेड के साथ ही पंजाब का दूसरा ऑटोमेटिक कोच वांशिक प्लांट भी तैयार किया जा चुका है, जो इससे पहले अमृतसर में तैयार किया जा चुका है। जो ठीक उसी प्रकार से कार्य करता है, जिस प्रकार से ऑटोमेटिक कार वॉशिंग सैंटर में कार के साथ होता है फर्क बस इतना है कि इसमें ट्रेन के डिब्बों को धीरे-धीरे ऑटोमेटिक कोच वॉशिंग प्लांट के ट्रैक पर ले जाया जाएगा और प्रश्न खुद ब खुद घूमने लग पड़ेंगे। प्लांट में मैकेनाइज्ड क्लीनिंग सिस्टम होने के कारण डीएमयू की धुलाई केमिकल डाल कर की जाएगी। जो आसानी से बाहरी के साथ-साथ नीचले हिस्से में भी सफाई करेगी जिनके साथ पानी की तेज बौछारें और बड़े-बड़े घूमते हुए ब्रश इनकी रगड़ते हुए सफाई करेंगे। जिनसे पूरी ट्रेन को धोने में महज 20 से 25 मिनट का समय लगेगा, जबकि अगर मेनुअल तरीके से करें तो चार से पांच कर्मचारियों को तीन से चार घंटे तक का समय लगता है।

डीएमयू में छह या आठ कोच लगाए जाते हैं और प्रत्येक कोच को धोने के लिए 1500 लीटर पानी बर्बाद हो जाता है। वॉशिंग प्लाट से एक कोच को धोने के लिए महज 300 लीटर पानी ही इस्तेमाल होगा। ऐसे में एक साल तक 25 लाख लीटर पानी की भी बचत होगी। वहीं आने वाले समय में यहां पानी की रिसाइकिल करके रियूज करने पर भी कार्य किए जाएंगे। बता दें कि सिटी स्टेशन से 25 से 30 डीएमयू का आवागमन होता है। जिनमें जालंधर से नकोदर, होशियारपुर, पठानकोट, फिरोजपुर, नवांशहर, अमृतसर, छेहरटा में आने-जाने वाली डीएमयू शामिल हैं।
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