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“गृह मंत्रालय की रिपोर्ट: 2019 से अब तक 29 शीर्ष नक्सली कमांडरों पर बड़ी कार्रवाई, सुरक्षा अभियान और तेज़”

आज लोकसभा में गृहमंत्रालय ने नक्सली उग्रवाद के उन्मूलन और पुनर्वासन पर विस्तृत जवाब दिया है. हमंत्रालय ने अपने जवाब में अबतक कितने नक्सली, आत्मसमर्पण किए कितने मारे गए, कितने पुनर्वासित किए गए जैसे मुद्दे पर पूरी जानकारी दी है. केंद्र सरकार ने लोकसभा में बताया कि वामपंथी उग्रवादी न तो भारत के संविधान में विश्वास रखते हैं और न ही लोकतांत्रिक मूल्यों में. सरकार ने कहा कि इन उग्रवादियों ने पिछले सालों में हज़ारों निर्दोष नागरिकों की हत्या की, बच्चों को अनाथ किया और महिलाओं का सुहाग उजाड़ा. सरकार के अनुसार सुरक्षा बलों की लगातार कार्रवाई से वामपंथी संगठनों की ताकत कमजोर हुई है और बड़ी संख्या में कैडर आत्मसमर्पण कर रहे हैं. सरेंडर करने वाले माओवादियों के पुनर्वास की सरकारी योजना है.
आज लोकसभा में गृहमंत्रालय ने नक्सली उग्रवाद के उन्मूलन और पुनर्वासन पर विस्तृत जवाब दिया है. हमंत्रालय ने अपने जवाब में अबतक कितने नक्सली, आत्मसमर्पण किए कितने मारे गए, कितने पुनर्वासित किए गए जैसे मुद्दे पर पूरी जानकारी दी है. केंद्र सरकार ने लोकसभा में बताया कि वामपंथी उग्रवादी न तो भारत के संविधान में विश्वास रखते हैं और न ही लोकतांत्रिक मूल्यों में. सरकार ने कहा कि इन उग्रवादियों ने पिछले सालों में हज़ारों निर्दोष नागरिकों की हत्या की, बच्चों को अनाथ किया और महिलाओं का सुहाग उजाड़ा. सरकार के अनुसार सुरक्षा बलों की लगातार कार्रवाई से वामपंथी संगठनों की ताकत कमजोर हुई है और बड़ी संख्या में कैडर आत्मसमर्पण कर रहे हैं. सरेंडर करने वाले माओवादियों के पुनर्वास की सरकारी योजना है.

कितने शीर्ष नक्सली लीडर न्यूट्रलाइज?

गृह मंत्रालय ने बताया कि जून 2019 से अब तक 29 शीर्ष नक्सली लीडर न्यूट्रलाइज किए जा चुके हैं, जिनमें से 14 इस साल मारे गए. 2019 से अब तक 1,106 उग्रवादी मारे गए, 7,311 गिरफ्तार हुए और 5,571 ने हथियार डाल दिए. सरकार के अनुसार, उग्रवादियों की सुरक्षा बलों से मुकाबला करने की क्षमता लगभग समाप्त हो चुकी है और यही कारण है कि बड़ी संख्या में वे आत्मसमर्पण कर रहे हैं. सरेंडर करने वालों को सरकार वित्तीय सहायता मुहैया करा रही है. उच्च कैडर को 5 लाख रुपये, अन्य कैडर को 2.5 लाख रुपये और हथियार के साथ आत्मसमर्पण करने पर अतिरिक्त राशि दी जा रही है. पुनर्वास अवधि में तीन साल तक 10 हजार रुपये मासिक वजीफा भी दिया जाता है.
इसके साथ ही केंद्र ने राज्यों को पुनर्वास नीतियां तैयार करने के लिए प्रोत्साहित किया है. इन नीतियों के तहत बच्चों को शिक्षा सुविधा, घायल व दिव्यांगों को राहत राशि और उपचार, महिलाओं को आजीविका सहायता और पुलिस सहयोगियों को भूमि व नौकरी में वरीयता प्रदान की जा रही है. गृह मंत्रालय के अनुसार. केवल इसी साल 2,167 माओवादी पुनर्वास योजना का लाभ लेकर मुख्यधारा में लौट चुके हैं.“गृह मंत्रालय की रिपोर्ट: 2019 से अब तक 29 शीर्ष नक्सली कमांडरों पर बड़ी कार्रवाई, सुरक्षा अभियान और तेज़” सरकार ने बताया कि वामपंथी उग्रवाद की समस्या 1967 से चली आ रही है. एक समय पशुपतिनाथ से लेकर तिरुपति तक का इलाका रेड कॉरिडोर माना जाता था, जो अब काफी सिमट चुका है. सरकार का दावा है कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व और गृह मंत्री के मार्गदर्शन में मार्च 2026 तक उग्रवाद का पूरी तरह सफाया हो जाएगा.
  सरकार ने कहा कि पूर्ववर्ती सरकारें इसे केवल राज्य का विषय मानती रहीं, इसलिए कोई राष्ट्रीय नीति नहीं बन पाई. मोदी सरकार ने 2015 में Whole of Government अप्रोच अपनाते हुए सुरक्षा और विकास दोनों मोर्चों पर व्यापक रणनीति लागू की.

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