कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा कि जब किसी विदेशी नेता की टारगेटेड किलिंग के बाद हमारे देश की तरफ से सॉवरेनिटी या इंटरनेशनल लॉ का कोई साफ बचाव नहीं होता और इम्पार्शियलिटी छोड़ दी जाती है, तो इससे हमारी फॉरेन पॉलिसी की दिशा और क्रेडिबिलिटी पर गंभीर शक पैदा होता है। इस मामले में, चुप रहना न्यूट्रल नहीं है। वह ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के मामले में भारत के स्टैंड पर बोल रहे थे। राहुल गांधी ने कांग्रेस पार्लियामेंट्री पार्टी की चेयरपर्सन सोनिया गांधी द्वारा ग्लोबल समस्याओं पर लिखे गए एक लेख पर ट्वीट किया, जिसमें उन्होंने इस बात पर जोर दिया है कि भारत को सॉवरेनिटी और शांति के लिए खड़ा होना चाहिए, और अपनी मोरल ताकत को फिर से खोजना चाहिए।
चुप्पी तटस्थता नहीं, जिम्मेदारी से पीछे हटना है : सोनिया गांधी
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार की कड़ी आलोचना करते हुए कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने मंगलवार को कहा कि ईरान के सर्वोच्च नेता खामेनेई की लक्षित हत्या पर सरकार की चुप्पी तटस्थता नहीं बल्कि जिम्मेदारी से पीछे हटना है और यह भारत की विदेश नीति की दिशा तथा विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठाती है। कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष ने यह भी मांग की कि संसद के बजट सत्र के दूसरे चरण में अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के टूटने पर सरकार की ‘चिंताजनक चुप्पी’ पर खुलकर और बिना किसी टालमटोल के चर्चा होनी चाहिए। एक अखबार में प्रकाशित अपने लेख में सोनिया गांधी ने कहा कि हमें नैतिक शक्ति को पुनः खोजने और उसे स्पष्टता व प्रतिबद्धता के साथ व्यक्त करने की तत्काल आवश्यकता है।
उन्होंने कहा, ‘एक मार्च को ईरान ने पुष्टि की कि उसके सर्वोच्च नेता अयातुल्ला सैयद अली हुसैनी खामेनेई की हत्या अमेरिका और इजराइल द्वारा एक दिन पहले किए गए लक्षित हमलों में कर दी गई थी। चल रही वार्ताओं के बीच एक मौजूदा राष्ट्राध्यक्ष की हत्या समकालीन अंतरराष्ट्रीय संबंधों में एक गंभीर दरार पैदा करती है।’उन्होंने कहा कि फिर भी इस स्तब्ध कर देने वाली घटना से परे नयी दिल्ली की चुप्पी भी हैरान करने वाली है। सोनिया गांधी ने कहा कि भारत सरकार ने न तो हत्या और न ही ईरान की संप्रभुता के उल्लंघन की निंदा की है।
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