प्रयागराज: अपना रौद्र रूप दिखाने के बाद गंगा और यमुना का जलस्तर तेजी से नीचे जा रहा है। छतनाग घाट पर गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से नीचे पहुंच गया है। यमुना के जलस्तर में भी तेजी से कमी दर्ज की जा रही है। इससे तराई और कछारी इलाके के लोगों के घरों और मुहल्लों से पानी तेजी से कम हो रहा है। यमुना के जलस्तर में गिरावट सोमवार शाम से ही शुरू हो गई थी जो मंगलवार को भी जारी रही। सिंचाई विभाग की मंगलवार की शाम की रिपोर्ट के अनुसार, यमुना में गिरावट में तेजी आई है। फाफामऊ में गंगा के जलस्तर में भी प्रति घंटा एक सेमी की गिरावट दर्ज की गई। गंगा का जलस्तर 10 सेंटीमीटर और यमुना का जलस्तर पांच सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से कम हो रहा है। राहत की बात यह भी रही कि गंगा और यमुना का जल तेजी से निकल रहा है। इसका नतीजा रहा कि छतनाग में जलस्तर में प्रतिघंटा तीन सेमी की गिरावट दर्ज की गई। पानी कमें कमी बुधवार को भी देखी गई। 24 घंटे की स्थिति पर नजर डालें तो यमुना में करीब एक मीटर और गंगा में आधा मीटर पानी कम हुआ है। दोनों नदियों के जलस्तर में गिरावट को लेकर सिंचाई विभाग के अफसरों के संकेत सकारात्मक हैं। अधिशासी अभियंता दिग्विजय सिंह का कहना है कि फिलहाल दोनों नदियों के जलस्तर में गिरावट जारी रहने की उम्मीद है। प्रयागराज। बाढ़ की अवधि बढ़ने के साथ इसमें फंसे लोगों की दुश्वारियां भी बढ़ती जा रही हैं। बाढ़ पीड़ितों के बीमार पड़ने की शिकायतें बढ़ने के साथ ही भोजन-पानी का भी गंभीर संकट पैदा हो गया है। प्रशासन की ओर से मंगलवार को अलग-अलग क्षेत्रों में भोजन के पैकेट और राहत सामग्री वितरित कराई गई लेकिन यह नाकाफी साबित हुई। सलोरी के रमेश पुरोहित, छोटा बघाड़ा में फंसे दुर्गेश कुशवाहा, म्योराबाद की रंगीता आदि बाढ़ का दंश झेलने को मजबूर हैं। बाढ़ में फंसे लोगों को निकालने और लाने-ले जाने के लिए 323 नावें व तीन मोटर बोट लगाई गई हैं। सदर तहसील के अंतर्गत 133 नावें चलाई जा रही हैं लेकिन इनका लाभ सभी प्रभावितों को नहीं मिल पा रहा है। कई क्षेत्रों में नावें पहुंच ही नहीं पा रही हैं। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में प्रशासन की ओर से खाने के पैकेट, लाई-चना समेत अन्य राहत सामग्री पहुंचाई गई लेकिन यह नाकाफी साबित हुई। लोग कंट्रोल रूम के अलावा अन्य लोगों को लगातार फोन करते रहे लेकिन मदद नहीं मिली।

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