नई दिल्ली। विजयादशमी के अवसर पर मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026 को देशभर में दशहरा उत्सव धूमधाम से मनाया गया। दिल्ली से लेकर बिहार, पंजाब, मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ तक विभिन्न स्थानों पर रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों का दहन किया गया। कई शहरों में हजारों की संख्या में लोग इस आयोजन को देखने पहुंचे। इस दौरान धार्मिक उत्साह के साथ बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश दिया गया।
दिल्ली में राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री ने किया रावण दहन
दिल्ली में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने द्वारका सेक्टर-10 में आयोजित दशहरा समारोह में हिस्सा लिया। उन्होंने प्रतीकात्मक रूप से तीर चलाकर रावण के पुतले का दहन किया। वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आईपी एक्सटेंशन स्थित रामलीला मैदान पहुंचे। उन्होंने रामलीला में भाग लेने वाले कलाकारों की आरती उतारी और प्रतीकात्मक तीर चलाकर रावण दहन किया।
इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने भगवान श्रीराम के आदर्शों, जनकल्याण और विकसित भारत के संकल्प पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि रामराज्य का अर्थ केवल शासन करना नहीं, बल्कि जनता का कल्याण सुनिश्चित करना है। उनके संदेश में गरीबों और वंचितों की सेवा, आत्मनिर्भरता तथा कठिन परिस्थितियों में भी साहस बनाए रखने की प्रेरणा प्रमुख रही।
पटना में 90 फीट के रावण का दहन, लाखों लोग जुटे
बिहार की राजधानी पटना के गांधी मैदान में 90 फीट ऊंचे रावण का पुतला आकर्षण का केंद्र रहा। आयोजन को देखने के लिए करीब 2.5 लाख लोगों के पहुंचने की जानकारी दी गई। यहां रावण के साथ कुंभकर्ण और मेघनाद के विशाल पुतले भी तैयार किए गए थे। दहन के बाद पर्यावरण अनुकूल आतिशबाजी की व्यवस्था भी की गई।
पंजाब के लुधियाना में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रिमोट का बटन दबाकर रावण के पुतले का दहन किया। अमृतसर में भी 100 फीट ऊंचे रावण के पुतले का दहन किया गया। इन आयोजनों में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए।
पंचकूला में 221 फीट ऊंचे रावण का आकर्षण
हरियाणा के पंचकूला में 221 फीट ऊंचा रावण का पुतला तैयार किया गया। इसे देश के सबसे ऊंचे रावण के पुतलों में शामिल बताया गया। वहीं, मध्य प्रदेश के अलग-अलग शहरों में भी दशहरा उत्सव के लिए विशेष तैयारियां की गईं। नर्मदापुरम में 40 फीट ऊंचे रावण का दहन हुआ, जबकि इंदौर, भोपाल, उज्जैन, जबलपुर और ग्वालियर में भी विभिन्न ऊंचाइयों के पुतले बनाए गए।
राजस्थान के कोटा में 105 फीट ऊंचा और करीब पांच हजार किलोग्राम वजन वाला रावण का पुतला तैयार किया गया। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में 101 फीट ऊंचे रावण के दहन की तैयारियां की गईं। झारखंड की राजधानी रांची के मोरहाबादी मैदान में 80 फीट ऊंचे रावण के साथ दो मंजिला लंका भी बनाई गई।
दिल्ली में रावण के साथ जलेगा कॉकरोच का पुतला
दिल्ली के पीतमपुरा में इस बार दशहरा आयोजन में एक अनोखा प्रयोग भी किया गया। यहां रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों के साथ 30 फीट ऊंचा कॉकरोच का पुतला जलाने की योजना बनाई गई। आयोजकों के मुताबिक, इस तरह के प्रतीकात्मक पुतलों के जरिए समाज की समस्याओं की ओर ध्यान आकर्षित करने का प्रयास किया जाता है।
कुछ जगहों पर रावण दहन नहीं, अलग परंपराओं से मनाया जाता है दशहरा
देश के कई हिस्सों में विजयादशमी मनाने की परंपराएं उत्तर भारत से अलग हैं। मध्य प्रदेश के विदिशा जिले के रावण नामक गांव में रावण का पुतला जलाने के बजाय उसकी पूजा की जाती है। ग्रामीण उसे ग्राम देवता के रूप में मानते हैं और दशहरे पर धार्मिक कार्यक्रम आयोजित करते हैं।
कर्नाटक के मैसूर में दशहरा देवी चामुंडेश्वरी की महिषासुर पर विजय के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है। यहां सुसज्जित हाथियों, पारंपरिक झांकियों और जंबू सवारी का विशेष महत्व है। हिमाचल प्रदेश के कुल्लू में दशहरा उत्सव सात दिनों तक चलता है। यहां रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतले जलाने के बजाय देवी-देवताओं की शोभायात्राएं निकाली जाती हैं और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ उत्सव मनाया जाता है।
सत्य और धर्म की जीत का संदेश देता है दशहरा
विजयादशमी का पर्व भारतीय संस्कृति में बुराई पर अच्छाई और अधर्म पर धर्म की जीत का प्रतीक माना जाता है। देशभर में आयोजित रामलीलाओं, रावण दहन और धार्मिक कार्यक्रमों के माध्यम से भगवान श्रीराम के आदर्शों को याद किया गया। उत्सव ने लोगों को सत्य, साहस, सेवा और सदाचार के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी।
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