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“वेनेजुएला के तेल पर अमेरिका की पकड़, ट्रंप की दो टूक: भारत को सप्लाई चाहिए तो हमारी शर्तें माननी होंगी”

अमेरिका, भारत को वेनेजुएला से तेल खरीदने की इजाजत दे सकता है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ट्रम्प प्रशासन के एक सीनियर अधिकारी ने इसकी जानकारी दी है। इसका मतलब यह है कि अमेरिका के प्रतिबंधों की वजह से जो व्यापार रुका हुआ था, वह अब कुछ हद तक फिर से शुरू हो सकता है, लेकिन यह सब अमेरिका की निगरानी और शर्तों के साथ होगा। हालांकि इससे जुड़ी शर्तें क्या हैं, इसकी जानकारी अभी नहीं मिल पाई है। वहीं, रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, रिलायंस भी चाहती है कि अमेरिका उसे वेनेजुएला का तेल लेने की इजाजत दे दे।

दूसरी ओर ट्रम्प ने शुक्रवार को व्हाइट में दुनिया की बड़ी तेल कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों से मुलाकात की। यहां उन्होंने वेनेजुएला के तेल क्षेत्र में करीब 9 लाख करोड़ रुपए के निवेश की बात कही। ट्रम्प ने एक्सॉन मोबिल, कोनोकोफिलिप्स, शेवरॉन जैसी बड़ी अमेरिकी कंपनियों के अधिकारियों के साथ बैठक की। उन्होंने कहा कि अमेरिका तय करेगा कि कौन सी कंपनियां वेनेजुएला में जाएंगी और निवेश करेंगी। शेवरॉन के वाइस चेयरमैन मार्क नेल्सन ने कहा कि उनकी कंपनी वेनेजुएला में निवेश के लिए प्रतिबद्ध है और वह अभी भी वहां काम कर रही है। कई छोटी कंपनियां और निवेशक भी बैठक में शामिल हुए, जिन्होंने ट्रम्प की नीतियों की सराहना की और निवेश की इच्छा जताई।

ट्रम्प बोले- तेल मुनाफे को वेनेजुएला, अमेरिका और कंपनियों के बीच बांटा जाएगा

ट्रम्प ने कहा, ‘कंपनियों को निवेश करना होगा और उनका पैसा जल्दी वापस भी मिलना चाहिए, फिर लाभ को वेनेजुएला, अमेरिका और कंपनियों के बीच बांटा जाएगा। मुझे लगता है यह आसान है। मुझे लगता है इसका फॉर्मूला मेरे पास है।’ इस योजना पर अभी बातचीत जारी है। वहीं, एक्सॉन मोबिल के CEO डैरेन वुड्स ने बैठक में कहा कि फिलहाल वेनेजुएला “निवेश के लायक नहीं” है क्योंकि कंपनी के वहां के एसेट दो बार जब्त किए गए थे। उन्होंने कहा कि ट्रम्प प्रशासन और वेनेजुएला सरकार के साथ मिलकर बड़े बदलाव लाने से कंपनी वापस आ सकती है।

अमेरिका को 3 से 5 करोड़ बैरल प्रतिबंधित तेल देगा वेनेजुएला

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने हाल ही में कहा था कि वेनेजुएला की अंतरिम राष्ट्रपति अमेरिका को 3 से 5 करोड़ बैरल प्रतिबंधित तेल सौंपेगी। ट्रम्प ने बताया कि यह तेल बाजार भाव पर बेचा जाएगा। इससे मिलने वाली रकम पर ट्रम्प का कंट्रोल रहेगा। 5 करोड़ बैरल कच्चे तेल की कीमत वर्तमान में करीब 25 हजार करोड़ रुपए है। अमेरिकी राष्ट्रपति के मुताबिक इसका इस्तेमाल वेनेजुएला और अमेरिका के लोगों के हित में किया जाएगा। ट्रम्प ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा कि उन्होंने ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट को इस योजना को तुरंत लागू करने के निर्देश दिए हैं। तेल को स्टोरेज जहाजों के जरिए सीधे अमेरिका के बंदरगाहों तक लाया जाएगा।

वेनेजुएला में दुनिया का सबसे बड़ा भंडार, फिर भी 1% सप्लाई

वेनेजुएला पेट्रोलियम एक्सपोर्टिंग कंट्रीज (OPEC) का सदस्य है। उसके पास दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार है, लेकिन वह वैश्विक सप्लाई का सिर्फ करीब 1% ही देता है। 1970 के दशक में वहां उत्पादन 35 लाख बैरल प्रतिदिन तक पहुंच गया था, जो मौजूदा स्तर से तीन गुना से ज्यादा है। अमेरिका ने 2019 में वेनेजुएला पर बहुत कड़े आर्थिक प्रतिबंध (सेंक्शंस) लगा दिए थे। इन प्रतिबंधों का टारगेट वेनेजुएला की तेल कंपनी PDVSA पर था, जिससे वेनेजुएला का तेल निर्यात लगभग रुक गया। अमेरिका ने सेकेंडरी सेंक्शंस भी लगाए, यानी जो भी देश या कंपनी वेनेजुएला से तेल खरीदती है, उसे अमेरिकी बाजार में व्यापार करने या बैंकिंग सुविधाओं से वंचित किया जा सकता था।

सेकेंडरी सेंक्शंस के कारण भारत ने वेनेजुएला से तेल खरीदी घटाई

सेकेंडरी सेंक्शंस के कारण भारत जैसे देशों को वेनेजुएला से भारी मात्रा में क्रूड ऑयल खरीदना बहुत मुश्किल हो गया। पहले (2010 के दशक में) भारत वेनेजुएला का बड़ा ग्राहक था। उस समय भारत रोजाना लाखों बैरल वेनेजुएला का हेवी क्रूड खरीदता था, जो रिलायंस और अन्य भारतीय रिफाइनरियों के लिए बहुत उपयुक्त था। 2018 में वेनेजुएला भारत के कुल क्रूड आयात का करीब 6.7% हिस्सा था, जो टॉप 6 सप्लायर्स में शामिल था। लेकिन 2019 के बाद सैंक्शंस के कारण आयात तेजी से गिरा। 2021 में यह हिस्सा सिर्फ 1.1% रह गया, और 2022-2023 में लगभग शून्य हो गया।

भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल उपभोक्ता

भारतीय कंपनियां जैसे रिलायंस इंडस्ट्रीज ने खरीदारी रोक दी, क्योंकि कंप्लायंस रिस्क, पेमेंट की समस्या, शिपिंग की दिक्कतें और अमेरिकी टैक्स का खतरा बहुत ज्यादा हो गया था। कुछ समय के लिए (2023-2024 में) अमेरिका ने आंशिक रूप से सेंक्शंस ढीले किए, जिससे भारत ने फिर से थोड़ा तेल खरीदा। 2024 में औसतन 63,000 से 100,000 बैरल प्रतिदिन तक पहुंचा, और 2025 में आयात बढ़कर 1.41 बिलियन डॉलर तक पहुंचा। लेकिन 2025 के मध्य में फिर से सख्ती आई जिससे आयात फिर रुक गया। 2025 के अंत और 2026 की शुरुआत में वेनेजुएला से भारत का क्रूड आयात सिर्फ 0.3% रह गया यानी कुल आयात का बहुत छोटा हिस्सा। अब भारत अपनी बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए तेल के दूसरे विकल्प तलाश रहा है। भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल उपभोक्ता है और अपनी 88-89% तेल जरूरत आयात से पूरी करता है। 2025 में भारत का तेल उपभोग करीब 5.74 मिलियन बैरल प्रतिदिन है, जो 2026 में बढ़कर 5.99 मिलियन बैरल होने का अनुमान है।

रिपोर्ट- रिलायंस के लिए वेनेजुएला से तेल खरीदना रूसी तेल का विकल्प हो सकता है

ट्रम्प ने भारत को रूसी तेल खरीदने से रोकने के लिए दबाव बढ़ाया है, जिसके कारण भारत की प्रमुख कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज ने इस महीने कोई रूसी तेल का जहाज नहीं लेने का फैसला किया है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ऐसे में वेनेजुएला से तेल खरीदना रिलायंस के लिए रूसी तेल का विकल्प हो सकता है। रिलायंस ने पहले भी अमेरिका से लाइसेंस लेकर वेनेजुएला से तेल खरीदा था। कंपनी के पास दुनिया का सबसे बड़ा रिफाइनरी कॉम्प्लेक्स है।

यह गुजरात में स्थित है और इसकी कुल क्षमता लगभग 14 लाख बैरल प्रतिदिन है। 2025 के पहले चार महीनों में वेनेजुएला की कंपनी PDVSA ने रिलायंस को चार जहाजों से तेल भेजा था, जो रोजाना करीब 63,000 बैरल के बराबर था। लेकिन मार्च-अप्रैल 2025 में अमेरिका ने ज्यादातर लाइसेंस सस्पेंड कर दिए और वेनेजुएला से तेल खरीदने वाले देशों पर टैरिफ की धमकी दी, जिसके बाद मई 2025 में रिलायंस का आखिरी वेनेजुएलन तेल का जहाज भारत पहुंचा था। रिलायंस ने गुरुवार को कहा था कि अगर अमेरिकी नियमों के तहत गैर-अमेरिकी खरीदारों को वेनेजुएला से तेल बेचने की इजाजत मिलती है, तो वह दोबारा खरीद पर विचार करेगी।

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