“ईरान में सख्त चेतावनी: ‘3 दिन में सरेंडर करो’, सरकार के अल्टीमेटम से बढ़ा तनाव”

ईरान सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई  को सत्ता से बेदखल करने के लिए दिसंबर के अंत से ईरान में चल रहा प्रदर्शन अब शांत पड़ने लगा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मदद नहीं मिलने के कारण अली खामेनेई के खिलाफ चल रहा विरोध प्रदर्शन अब शांत पड़ गया है। इसके बाद अब खामेनेई सरकार के हैसले बुलंद हो गए हैं। ईरान के पुलिस प्रमुख ने ‘दंगाइयों’ को तीन दिन में आत्मसमर्पण करने का अल्टीमेटम दिया है। वहीं सरकार ने आर्थिक समस्याओं के समाधान का वादा किया है। इधर मानवाधिकार समूहों ने प्रदर्शनकारियों की मौतों की संख्या बढ़ने की चेतावनी दी है। ईरान में पिछले 11 दिनों से इंटरनेट बंद है इस वजह से दुनिया के सामने ईरान की सही तस्वीर नहीं आ पा रही है।  सुरक्षाबलों ने उससे 3,428 प्रदर्शनकारियों की मौत की पुष्टि की है। साथ ही चेतावनी दी है कि वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है।

बता दें कि बीते साल दिसंबर के अंत में शुरू हुए प्रदर्शनों ने ईरान को हिलाकर रख दिया था।अब ये प्रदर्शन लगभग शांत हो गया है। खामेनेई शासन ने ‘दंगाइयों’ पर कार्रवाई शुरू कर दी है। ईरान के शीर्ष पुलिस अधिकारी ने सोमवार को उन प्रदर्शनकारियों को अल्टीमेटम जारी किया, जिन्हें अधिकारी ‘दंगाई’ बता रहे हैं। शीर्ष पुलिस अधिकारी ने कहा कि ऐसे प्रदर्शनकारियों को तीन दिनों के भीतर सरेंडर करना होगा, नहीं तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

हालांकि, ईरान की सरकार ने उन आर्थिक कठिनाइयों से निपटने का भी वादा किया है, जिनकी वजह से ये प्रदर्शन भड़के। बढ़ती महंगाई और ईरानी मुद्रा में भारी गिरावट की वजह से शुरू हुए प्रदर्शन जल्द ही खामेनेई शासन को हटाने की मांग पर अड़ गए. ईरान ने प्रदर्शनों पर काबू पाने के लिए इंटरनेट बैन कर दिया और अंतरराष्ट्रीय फोन कॉल्स पर भी पाबंदी लगा दी थी। इस वजह से प्रदर्शनों और हिंसा की पूरी जानकारी अभी सामने नहीं आ सकी है.। हालांकि, ईरानी अधिकारी कह रहे हैं कि देशभर में धीरे-धीरे इंटरनेट सेवाएं बहाल की जाएंगी।

ईरान के पुलिस प्रमुख का प्रदर्शनकारियों को अल्टीमेटम

इधर, ईरान के पुलिस प्रमुख अहमद-रेजा रादान ने सोमवार को कहा कि कुछ युवा भ्रमित होकर दंगों में शामिल हुए। उन्होंने उन युवाओं से अपील की कि वे आत्मसमर्पण कर दें, ताकि उन्हें कम सजा मिल सके। उन्होंने ईरान की सरकारी टीवी से कहा, ‘जो लोग अनजाने में दंगों में शामिल हो गए, उन्हें दुश्मन सैनिक नहीं बल्कि भ्रमित व्यक्ति माना जाएगा और उनके साथ नरमी बरती जाएगी।

अधिकारियों का कहना है कि प्रदर्शन शुरू में शांतिपूर्ण थे, लेकिन बाद में अराजकता में बदल गए। उनका दावा है कि ईरान को अस्थिर करने के लिए उसके कट्टर विरोधियों अमेरिका और इजरायल ने इसमें भूमिका निभाई।सरकारी टीवी पर जारी एक संयुक्त बयान के अनुसार, देश की कार्यपालिका, विधायिका और न्यायपालिका के प्रमुखों ने सोमवार को ‘जीविका और आर्थिक समस्याओं के समाधान के लिए दिन-रात काम करने’ का संकल्प लिया।

ईरान में मौत की सजा बढ़ने को लेकर चिंता

इस बीच, यह चिंता भी बढ़ गई है कि अधिकारी प्रदर्शनकारियों के खिलाफ मौत की सजा का इस्तेमाल कर सकते हैं। संयुक्त राष्ट्र ने सोमवार को चेतावनी दी कि ईरान फांसी को धमकी के हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रहा है। मानवाधिकार समूहों के अनुसार, चीन के बाद दुनिया में सबसे अधिक फांसी देने वाला देश ईरान है। संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर टर्क ने एक बयान में कहा कि पिछले साल ईरान में कथित तौर पर 1,500 लोगों को फांसी दी गई।

About NW-Editor

Check Also

पाकिस्तान में 2 हफ्ते स्कूल बंद, 25% सैलरी कटेगी; मिडिल ईस्ट जंग ने बढ़ाई शहबाज़ शरीफ़ सरकार की मुश्किलें

ईरान के खिलाफ शुरू की गई अमेरिका और इजरायल की जंग पाकिस्तान के लिए आफत …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *