काठमांडू। तिब्बत में आई बाढ़ का असर अब नेपाल के उत्तरी इलाकों में दिखाई दे रहा है। मंगलवार को बाढ़ का पानी रसुवा जिले तक पहुंचने के बाद भोटेकोशी नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ गया। बाढ़ की चपेट में आने से टिमुरे बॉर्डर आउटपोस्ट में तैनात 9 सशस्त्र पुलिसकर्मी लापता बताए जा रहे हैं। अधिकारियों का उनसे संपर्क नहीं हो पा रहा है।
बाढ़ के खतरे को देखते हुए प्रशासन ने भोटेकोशी और त्रिशूली नदी के किनारे रहने वाले लोगों को सतर्क रहने और निचले इलाकों से सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की है। लोगों को नदी के आसपास नहीं जाने की सलाह भी दी गई है।
राहत और बचाव के लिए सुरक्षा बल तैनात
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव अभियान तेज कर दिया गया है। नेपाली सेना, सशस्त्र पुलिस बल और नेपाल पुलिस के जवानों को प्रभावित इलाकों में तैनात किया गया है। दूसरे जिलों से भी अतिरिक्त सुरक्षाकर्मियों को मौके पर भेजा गया है।
प्रशासन के मुताबिक मेडिकल टीमें, एंबुलेंस, स्काउट्स और रेड क्रॉस की टीमें भी राहत कार्य में जुटी हैं। प्रभावित इलाकों में अतिरिक्त चिकित्सा कर्मियों की व्यवस्था की जा रही है।
बॉर्डर पोस्ट पर 9 जवान लापता
टिमुरे स्थित बॉर्डर आउटपोस्ट में तैनात 9 सशस्त्र पुलिसकर्मियों के लापता होने की सूचना है। अधिकारियों के अनुसार बाढ़ के बाद से जवानों से संपर्क नहीं हो पा रहा है। हालांकि, चौकी पर मौजूद करीब 25 से 30 अन्य लोग सुरक्षित बताए जा रहे हैं।
प्रशासन ने स्थिति को देखते हुए नदी किनारे के निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को तत्काल सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के निर्देश दिए हैं।
हेलीकॉप्टर स्टैंडबाय पर
बाढ़ की गंभीर स्थिति को देखते हुए निजी हेलीकॉप्टर कंपनियों को भी विमान स्टैंडबाय रखने के निर्देश दिए गए हैं। कुछ हेलीकॉप्टरों को प्रभावित क्षेत्रों में पहले ही तैनात किया जा चुका है, ताकि जरूरत पड़ने पर राहत और बचाव अभियान में तेजी लाई जा सके।
स्थिति की समीक्षा और आगे की रणनीति तय करने के लिए उच्चस्तरीय बैठक भी बुलाई गई है।
पिछले साल भी मची थी तबाही
भोटेकोशी नदी तिब्बत से निकलकर नेपाल में प्रवेश करती है और आगे सुनकोशी नदी में मिल जाती है। सुनकोशी आगे चलकर सप्तकोशी नदी का हिस्सा बनती है, जो भारत के बिहार में प्रवेश करती है। ऐसे में नेपाल में भोटेकोशी का जलस्तर बढ़ने से निचले इलाकों में भी खतरा बढ़ सकता है।
पिछले साल भी भोटेकोशी नदी में आई बाढ़ से नेपाल में भारी नुकसान हुआ था। उस दौरान 9 लोगों की मौत हुई थी और 24 लोग लापता हुए थे। नेपाल और चीन को जोड़ने वाला फ्रेंडशिप ब्रिज भी बाढ़ में बह गया था, जिससे दोनों देशों के बीच सड़क संपर्क और व्यापार प्रभावित हुआ था।
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