उत्तर प्रदेश। उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री और निषाद पार्टी के अध्यक्ष डॉ. संजय निषाद ने पूर्व सांसद फूलन देवी की हत्या को लेकर बड़ा सवाल उठाया है। उन्होंने कहा कि फूलन देवी केवल एक राजनीतिक चेहरा नहीं, बल्कि विद्रोह, संघर्ष और न्याय की प्रतीक थीं। उनकी हत्या की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और यह सामने आना चाहिए कि उनकी हत्या के पीछे किसका हाथ था।
संजय निषाद ने कहा कि फूलन देवी ने समाजवादी पार्टी के साथ राजनीतिक सफर शुरू किया था और पार्टी के टिकट पर सांसद भी बनीं। बाद में जब उनके राजनीतिक संबंधों में दूरी आई और उन्होंने अलग राजनीतिक संगठन खड़ा करने की कोशिश की, तो कुछ समय बाद उनकी हत्या कर दी गई। मंत्री ने इसी घटनाक्रम की जांच की जरूरत बताई।
उन्होंने सवाल उठाया कि फूलन देवी की हत्या के बाद उनकी मौत की निष्पक्ष जांच की मांग क्यों नहीं उठाई गई। उनके मुताबिक, पूरे मामले की जांच से जुड़े तथ्यों को सार्वजनिक किया जाना चाहिए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि हत्या के पीछे क्या कारण थे और इसके पीछे किन लोगों की भूमिका थी।
फूलन देवी को बताया संघर्ष और न्याय की प्रतीक
मंत्री संजय निषाद ने फूलन देवी को महिलाओं और वंचित वर्गों के संघर्ष की प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि फूलन देवी का जीवन कई तरह के संघर्षों से गुजरा और उन्होंने अपने तरीके से अन्याय के खिलाफ आवाज उठाई।
उन्होंने कहा कि उस दौर में परिस्थितियां अलग थीं, जबकि आज लोकतंत्र में जनता के पास मतदान का अधिकार है। उनके अनुसार अब समाज को अपने अधिकारों और राजनीतिक भागीदारी के लिए लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज मजबूत करनी चाहिए।
सपा से राजनीतिक दूरी को लेकर भी उठाए सवाल
संजय निषाद ने दावा किया कि फूलन देवी को समाजवादी पार्टी के साथ राजनीतिक पहचान मिली और वह सांसद बनीं। हालांकि, बाद में उनके और पार्टी के बीच मतभेद सामने आए। मंत्री ने कहा कि फूलन देवी ने अलग राजनीतिक रास्ता अपनाने की कोशिश क्यों की, इसके पीछे की परिस्थितियों पर भी चर्चा होनी चाहिए।
उन्होंने फूलन देवी की संपत्ति से जुड़े विवाद का भी जिक्र करते हुए पूरे मामले की जांच की आवश्यकता बताई।
निषाद समाज से राजनीतिक रूप से सतर्क रहने की अपील
मंत्री ने आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर निषाद और मछुआरा समाज से राजनीतिक रूप से जागरूक रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि चुनाव के समय कई नेता समुदाय के बीच सक्रिय दिखाई देते हैं, लेकिन जनता को उनके पिछले काम और नीतियों के आधार पर खुद निर्णय लेना चाहिए।
संजय निषाद ने मल्लाह, निषाद, केवट, कश्यप, बिंद, धीवर, कहार, बाथम, रायकवार और माझी सहित विभिन्न मछुआरा समुदायों का उल्लेख करते हुए कहा कि समाज को अपने अधिकारों और राजनीतिक प्रतिनिधित्व को लेकर जागरूक रहना चाहिए।
फूलन देवी का राजनीतिक सफर
फूलन देवी का जीवन उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक महत्वपूर्ण अध्याय रहा है। वह लंबे समय तक राजनीतिक और सामाजिक चर्चाओं में रहीं और बाद में लोकसभा की सदस्य भी बनीं। उनकी हत्या 25 जुलाई 2001 को दिल्ली में हुई थी। उनकी हत्या के मामले में शेर सिंह राणा को गिरफ्तार किया गया था और बाद में अदालत में मुकदमा चला।
फूलन देवी की हत्या से जुड़े कानूनी और राजनीतिक पहलुओं पर समय-समय पर अलग-अलग चर्चाएं होती रही हैं। संजय निषाद के ताजा बयान ने एक बार फिर इस पुराने मामले की जांच और राजनीतिक संदर्भों को चर्चा में ला दिया है।
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