बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने दिसंबर 2026 में अपने देश लौटने की इच्छा जताई है। उन्होंने कहा कि उन्हें गिरफ्तारी, जान के खतरे या प्रताड़ना का डर नहीं है। उनके मुताबिक, परिस्थितियां चाहे कितनी भी चुनौतीपूर्ण क्यों न हों, अपने देश वापस लौटना उनकी जिम्मेदारी है। अगस्त 2024 में छात्र आंदोलन के बाद बांग्लादेश छोड़कर भारत आईं हसीना फिलहाल भारत में रह रही हैं।
गिरफ्तारी के खतरे के बावजूद वापसी पर जोर
शेख हसीना ने बांग्लादेश की मौजूदा सरकार को लेकर चिंता जताते हुए कहा कि उनके खिलाफ कार्रवाई हो सकती है, लेकिन इससे उनका अपने देश लौटने का इरादा नहीं बदलेगा। उन्होंने संकेत दिया कि वह राजनीतिक परिस्थितियों और संभावित कानूनी कार्रवाई के बावजूद वापसी का रास्ता तलाश रही हैं।
हसीना की वापसी का मुद्दा बांग्लादेश की राजनीति में लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है। वहां की मौजूदा सरकार उनके खिलाफ दर्ज मामलों को लेकर कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ाना चाहती है।
भारत में शरण देने के लिए जताया आभार
शेख हसीना ने मुश्किल समय में भारत सरकार और भारतीय लोगों से मिले समर्थन के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि भारत ने उन्हें संकट के समय सहारा दिया। इस दौरान उन्होंने 1975 की उस घटना का भी उल्लेख किया, जब बांग्लादेश में सैन्य तख्तापलट के दौरान उनके पिता शेख मुजीबुर रहमान और परिवार के कई सदस्यों की हत्या कर दी गई थी।
उस समय शेख हसीना और उनकी बहन ने भारत में शरण ली थी। अगस्त 2024 में बांग्लादेश में राजनीतिक संकट गहराने के बाद हसीना एक बार फिर भारत आ गई थीं।
मौजूदा सरकार पर राजनीतिक विरोधियों को दबाने का आरोप
पूर्व प्रधानमंत्री ने आरोप लगाया कि उनके और उनकी पार्टी अवामी लीग के नेताओं के खिलाफ आपराधिक मामलों का इस्तेमाल राजनीतिक विरोधियों को दबाने के लिए किया जा रहा है। उन्होंने निष्पक्ष सुनवाई की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि बांग्लादेश के नागरिकों को स्वतंत्र और समावेशी लोकतांत्रिक प्रक्रिया के माध्यम से अपनी सरकार चुनने का अवसर मिलना चाहिए।
हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित पक्षों के आधिकारिक बयानों और कानूनी दस्तावेजों के आधार पर ही अंतिम निष्कर्ष निकाला जा सकता है।
भारत-बांग्लादेश संबंधों पर पड़ सकता है असर
शेख हसीना की भारत में मौजूदगी और उनके प्रत्यर्पण की मांग दोनों देशों के संबंधों के लिए महत्वपूर्ण मुद्दे बने हुए हैं। बांग्लादेश सरकार उनकी वापसी के लिए भारत से अनुरोध करती रही है, जबकि भारत के सामने इस मामले में कानूनी और कूटनीतिक पहलुओं पर विचार करने की चुनौती है।
भारत और बांग्लादेश के बीच 2013 से प्रत्यर्पण संधि लागू है। इसके तहत किसी व्यक्ति को दूसरे देश को सौंपने की प्रक्रिया निर्धारित नियमों और अपवादों के अनुसार आगे बढ़ाई जाती है।
2024 के आंदोलन से जुड़े मामलों में घिरीं हसीना
बांग्लादेश में जुलाई-अगस्त 2024 के छात्र आंदोलन के दौरान बड़े पैमाने पर हिंसा हुई थी। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय की जांच के अनुसार, उस दौरान करीब 1,400 लोगों की मौत हुई थी। हसीना और उनकी तत्कालीन सरकार के कुछ अधिकारियों पर आंदोलन के दौरान हुई हिंसा को लेकर गंभीर आरोप लगाए गए।
बांग्लादेश के इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल ने नवंबर 2025 में शेख हसीना और उनके तत्कालीन गृह मंत्री असदुज्जमां खान कमाल को मौत की सजा सुनाई थी। इस मामले के कानूनी और राजनीतिक प्रभाव दोनों देशों के संबंधों को प्रभावित कर सकते हैं।
फिलहाल, दिसंबर में शेख हसीना की संभावित वापसी और इस पर बांग्लादेश सरकार की प्रतिक्रिया पर नजर बनी हुई है। उनकी वापसी की वास्तविक स्थिति संबंधित पक्षों के आधिकारिक बयानों और आगे होने वाली कानूनी तथा कूटनीतिक कार्रवाई पर निर्भर करेगी।
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