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12वीं पास ‘डॉक्टर’ का फर्जी इलाज! बिजनौर में टीबी मरीजों की जान से खेल, मेडिकल कॉलेज के चैंबर में बैठकर लिखता था दवाइयाँ—ऐसे खुली पोल

उत्तर प्रदेश के बिजनौर के डिस्ट्रिक्ट मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल में एक फर्जी डॉक्टर मरीजों का इलाज करते हुए पकड़ा गया. डॉक्टर की कुर्सी पर बैठ कर टीबी और छाती रोग का ट्रीटमेंट करने वाले इस शख्स को हॉस्पिटल के ही एक डॉक्टर तुषार ने अपनी ऐवजी में मरीजों को देखने के लिए रखा हुआ था. डॉक्टर तुषार के की जगह बैठकर ये शख्स मरीजों के लिए दवाइयां लिख रहा था और बाकायदा डॉक्टर तुषार की मोहर लगा कर पर्चा मरीजों को दे रहा था.जो मरीज 2-3 महीने से इलाज करा रहे थे. उन्हें भी वह ये सारी दवाइयां रिपीट में लिख रहा था, जब बार-बार दवाई रिपीट मंगाई गईं तो फार्मासिस्ट राजेश रवि को शक हुआ, वह हॉस्पिटल के सीनियर डॉक्टर राजीव रस्तोगी को लेकर डॉक्टर तुषार के चैंबर में गया. वहां देखा डॉक्टर तुषार थे ही नहीं. बल्कि, कोई अनजान शख्स मुंह पर मास्क लगाए मरीजों को देख कर दवाई लिख रहा थाजब उससे पूछताछ की गई तो उसने बताया कि वह डॉक्टर तो नहीं है, लेकिन उसे डॉक्टर तुषार ने इलाज के लिए अपनी जगह रखा है. वह काफी समय से हॉस्पिटल में आकर मरीजों को देखने और दवाई लिखने का काम कर रहा है. यह सुनते ही वहां मौजूद लोगों के पैरों के नीचे से जमीन खिसक गई. मरीजों की जान से खिलवाड़ कर रहे शख्स से जब उसका नाम पूछा गया तो पहले तो उसने अपना नाम बताने में आनाकानी की, फिर जब डॉक्टर राजीव रस्तोगी ने पुलिस बुलाने की धमकी दी तो उसने अपना नाम दिनेश बताया.

दिनेश ने बताया कि उसे डॉक्टर तुषार ने अपनी जगह मरीजों को देखने के लिए बैठाया है. जब दिनेश से उसकी मेडिकल क्वालिफिकेशन पूछी गई तो उसने बताया वह तो बस 12वीं पास है और वहां से भीड़ का फायदा उठा कर भाग निकला. जब डाक्टर राजीव ने डॉक्टर तुषार से अपनी जगह दिनेश नाम के व्यक्ति को अपने चैंबर में बैठाकर मरीजों का इलाज करने के बारे में जानकारी की तो डॉक्टर तुषार ने पहले तो उसे अपना असिस्टेंट बताया और फिर मामला बिगड़ता देख दिनेश को पहचानने से ही मना कर दिया.

कड़ी कार्रवाई करने की कही बात

इस मामले में बिजनौर की डीएम जसजीत कौर का कहना है कि ये बेहद गंभीर मामला है. एडीएम और सीएमओ बिजनौर की एक कमेटी बनाकर जांच कराई जा रही है. इसकी रिपोर्ट आने के बाद मेडिकल कॉलेज प्रिंसिपल, डॉक्टर तुषार और हॉस्पिटल के सीएमएस खिलाफ कड़ी कार्रवाई के लिए भी शासन को लिखा जाएगा. बिजनौर का यह मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल पहले से ही खामियों, अव्यवस्थाओं और डॉक्टरों की लापरवाही के लिए बदनाम है. उत्तर प्रदेश महिला आयोग की अध्यक्षा बबीता चौहान ने अपनी निरीक्षण टिप्पणी में लिखा था कि इस अस्पताल में इतनी खामियां हैं. मरीजों के इलाज से पहले अस्पताल को खुद ही इलाज की जरूरत है.

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