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जयपुर में जिंदा हुई 250 साल पुरानी परंपरा: 50 हजार लोगों के देसी घी वाले भोज, 4 लाख बाटी, 1000 किलो दाल

जयपुर: 50 हजार लोगों का भोज शुरू हो गया है। अग्रवाल कॉलेज ग्राउंड में आयोजित इस ‘जयपुर की ज्योणार’ में शहर के अलग-अलग हिस्सों से लोग देसी घी में बनी दाल बाटी चूरमा, मिर्ची के टिपोरे और अन्य पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद लिया। आयोजन को लेकर तीन विशाल वाटरप्रूफ डोम में भोजन की व्यवस्था की गई, जहां एक बार में 4000 लोगों ने टेबल-कुर्सी पर बैठकर भोजन किया। जयपुर हेरिटेज की महापौर कुसुम यादव ने सुबह आयोजन की शुरुआत करते हुए लोगों को दाल बाटी परोसी। कार्यक्रम में जयपुर के सांसद-विधायक और विभिन्न समाज संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी हिस्सा लेंगे। आयोजन समिति की ओर से बताया गया कि यदि लोगों की संख्या बढ़ती है तो अतिरिक्त व्यवस्था तैयार रखी गई थी। इस आयोजन का मकसद सिर्फ भोजन नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक विरासत को संजोना रहा है। सभी वर्गों के लोग एक साथ बैठें। इसके साथ आयोजन स्थल पर जयपुर की कलाओं, हस्तशिल्प और इतिहास को दर्शाती झांकियां भी लगाई गईं हैं। कैटरिंग व्यवस्था देखने वाले एस सेठी केटर्स के ओनर तनुष ने बताया- अब तक 4 लाख बाटी बना चुके हैं। हर घंटे 25 हजार से ज्यादा बाटी बन रही है। जो दो तरह की है इसके लिए 10 ट्रक में 20 क्विंटल छाने (कंडे) लाए गए हैं। आधे खत्म हो चुके हैं। 1000 किलो दाल बन चुकी है। वहीं, 4 हजार किलो आटे का हम दो तरीके के चूरमा बना चुके हैं। 500 किलो बेसन, 2 हजार किलो दही की कढ़ी बन चुकी है। बाटी कढ़ी दाल में अभी तक घी के 200 पीपे लग चुके हैं। 50 से 60 पीपे घी और लगेंगे।

इस कार्यक्रम को हर साल करने का प्रयास करेंगे: लकी ड्रॉ में टीवी से लेकर चांदी के सिक्कों तक इनाम ज्योणार में एंट्री कूपन के ज़रिए दी गई थी, जो पहले ही शहर के मंदिरों और प्रमुख स्थानों पर वितरित किए गए। कूपन पर आधारित लकी ड्रॉ में 24 इंच एलईडी टीवी, फ्रिज, कूलर, मिक्सर और 10 चांदी के सिक्के इनाम के रूप में दिए जा रहे हैं। आयोजन समिति सदस्य कैलाश मित्तल ने बताया – जयपुर के व्यापारियों ने यह बीड़ा उठाया था। दिन रात लगकर आज इतने बड़े आयोजन को इतनी शुद्धता के साथ करने का काम किया है। हम 50 हजार कूपन बांट चुके हैं। इसके बाद भी काफी लोग इसमें शामिल होने के लिए तत्पर हैं। इस बार हमने 20 रुपए का एक टोकन मनी ली है। मेयर कुसुम यादव ने बताया – इस कार्यक्रम में जयपुर की जनता बढ़ चढ़कर हिस्सा ले रही है। सबने मिलकर इस आयोजन को सफल बनाने के लिए दिन रात मेहनत की। इस बार जिस तरीके से लोगों की भीड़ और प्यार देखने को मिल रहा है। इस कार्यक्रम को हर साल करने का प्रयास करेंगे। जिससे हमारे शहर की सैकड़ों साल पुरानी परंपरा फिर से जीवित हो सके। दरअसल, तीन दिन से लगातार 300 हलवाइयों और 200 सपोर्ट स्टाफ ने देसी घी में भोजन तैयार किया है। आयोजन में 12,500 किलो आटा-बेसन, 1500 किलो दाल, 1200 किलो मावा, 160 पीपे देसी गाय का घी और अन्य मसाले इस्तेमाल किए गए हैं। कार्यक्रम में सुरक्षा के लिए 100 पुलिसकर्मी, 100 प्राइवेट गार्ड और 500 वॉलंटियर मौजूद रहे। पार्किंग के लिए रामनिवास बाग, संजय बाजार और घाटगेट स्कूल के पास व्यवस्था की गई थी, जिसमें 2000 से ज्यादा टू-व्हीलर और 500 से ज्यादा गाड़ियों ने पार्किंग की।

व्यापारी और समाज मिलकर इसे फिर से जीवंत कर रहे:  आयोजन समिति के सदस्य मातादीन सोनी ने बताया कि यह परंपरा राजा-महाराजाओं के ज़माने की है, जब प्रजा के लिए बड़े स्तर पर भोज आयोजित होते थे। अब 250 साल पुरानी परंपरा को फिर से जिंदा करने की कोशिश कर रहे हैं।

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