ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म मीशो के शेयर आज लगातार दूसरे दिन लोअर सर्किट पर पहुंच गए. एक ट्रेडिंग दिन पहले इसके शेयरों में बिकवाली का कारण 2,000 करोड़ से ज्यादा के शेयरों का लॉक-इन पीरियड खत्म होना था. वहीं आज एक और वजह सामने आई है, जनरल मैनेजर (बिजनेस) मेघा अग्रवाल का इस्तीफा. मीशो ने एक्सचेंज फाइलिंग में बताया कि उसकी जनरल मैनेजर (बिजनेस) और सीनियर मैनेजमेंट पर्सन मेघा अग्रवाल ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है.
फिलहाल स्टॉक BSE पर 164.55 के स्तर पर 5 प्रतिशत लोअर सर्किट में ट्रेड कर रहा है. यह एक महीने से भी कम समय में अपने रिकॉर्ड हाई से 35 प्रतिशत से ज्यादा टूट चुका है, जिससे निवेशकों को 40,000 करोड़ से ज्यादा का नुकसान हुआ है. 5,421 करोड़ के IPO के तहत निवेशकों को मीशो के शेयर 111 की कीमत पर जारी किए गए थे. शेयर बाजार में इसकी लिस्टिंग करीब 46 प्रतिशत प्रीमियम पर हुई थी. लिस्टिंग के कुछ ही दिनों बाद 18 दिसंबर को यह 254.65 के रिकॉर्ड हाई पर पहुंच गया था. इससे पहले 12 दिसंबर 2025 को यह लिस्टिंग के बाद के रिकॉर्ड लो 153.95 तक गिर गया था.
मीशो के कितने शेयरों का लॉक-इन पीरियड खत्म हुआ?
नुवामा अल्टरनेटिव एंड क्वांटिटेटिव रिसर्च के अनुसार, मीशो के करीब 10.99 करोड़ शेयरों का एक महीने का लॉक-इन पीरियड खत्म हो गया है. यह कंपनी की कुल बकाया इक्विटी का लगभग 2 प्रतिशत है. इसी वजह से एक दिन पहले शेयरों में 5 प्रतिशत की गिरावट आई और वे लोअर सर्किट में चले गए. ध्यान देने वाली बात यह है कि लॉक-इन पीरियड खत्म होने का मतलब यह नहीं होता कि सभी शेयरहोल्डर अपने शेयर बेच ही देंगे. इसका मतलब सिर्फ इतना है कि अब वे चाहें तो मुनाफावसूली कर सकते हैं. 6 जनवरी को 182.30 की क्लोजिंग कीमत के आधार पर, जिन शेयरों का लॉक-इन पीरियड खत्म हुआ है, उनकी कुल वैल्यू करीब 2,003 करोड़ बैठती है.
मीशो के शेयर गिरने के दो बड़े कारण
बोनांजा के रिसर्च एनालिस्ट अभिनव तिवारी के मुताबिक, मीशो ने पिछले कुछ सालों में अपनी लॉजिस्टिक्स एफिशिएंसी में बड़ा सुधार किया है. FY2023 में प्रति ऑर्डर लागत 55 थी, जो FY2025 में घटकर 46 रह गई. अभिनव इस सुधार का श्रेय मीशो के खुद के लॉजिस्टिक्स प्लेटफॉर्म वाल्मो के विकास और बेहतर डिलीवरी डेंसिटी को देते हैं. इसके अलावा FY2026 की पहली छमाही में कैश-ऑन-डिलीवरी ऑर्डर 90 प्रतिशत से घटकर 61 प्रतिशत हो गए, जिससे फेल डिलीवरी और उससे जुड़े खर्चों में कमी आई. वाल्मो छोटे शहरों में तेजी से विस्तार कर रहा है.
भारी सब्सिडी दिए बिना लॉजिस्टिक्स सिस्टम को मजबूत करके कंपनी ने ऑपरेशनल रिस्क कम किया और कैश फ्लो बेहतर किया. इससे बिजनेस ज्यादा कैपिटल-एफिशिएंट बना और प्रॉफिटेबिलिटी के करीब पहुंचा. इन सुधारों के बावजूद अभिनव का कहना है कि हाल के दिनों में मीशो के शेयरों पर दबाव बना हुआ है. इसकी बड़ी वजह लॉक-इन पीरियड का खत्म होना है, जिससे बाजार में शेयरों की सप्लाई बढ़ सकती है. इसके साथ ही अन्य कंज्यूमर इंटरनेट और रिटेल कंपनियों की तुलना में मीशो का हाई वैल्यूएशन भी प्रॉफिट बुकिंग की वजह बना है.
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