पश्चिम बंगाल में आने वाले कुछ सप्ताह में विधानसभा चुनाव की तिथियों का ऐलान हो सकता है. उससे पहले चुनाव आयोग का ममता बनर्जी के अफसरों पर डंडा चला है. ECI का यह एक्शन SIR (मतदाता सूची विशेष गहन पुनरीक्षण) से जुड़ा हुआ है. चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल में 7 अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है. आयोग ने इन अधिकारियों पर गंभीर कदाचार, कर्तव्य में लापरवाही और वैधानिक शक्तियों के दुरुपयोग के आरोप लगाए हैं. आयोग ने जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 13CC के तहत अपने अधिकारों का उपयोग करते हुए यह सख्त कदम उठाया है. साथ ही पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव को निर्देश दिया गया है कि संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध उनके अपने कैडर द्वारा तत्काल विभागीय अनुशासनात्मक कार्यवाही शुरू की जाए. आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि इस संबंध में की गई कार्रवाई की जानकारी बिना किसी देरी के उसे उपलब्ध कराई जाए.
ECI के अनुसार, चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता और पारदर्शिता बनाए रखना उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है. मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण एक संवेदनशील और महत्वपूर्ण प्रक्रिया होती है, जिसके माध्यम से यह सुनिश्चित किया जाता है कि पात्र मतदाताओं के नाम सूची में शामिल हों और अपात्र नाम हटाए जाएं. ऐसे में यदि किसी अधिकारी द्वारा अपने दायित्वों का सही तरीके से निर्वहन नहीं किया जाता या शक्तियों का दुरुपयोग होता है, तो इससे चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता प्रभावित हो सकती है. निलंबित किए गए अधिकारियों में मुर्शिदाबाद जिले की 56 समसेरगंज विधानसभा क्षेत्र के सहायक निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी (AERO) डॉ. सेफौर रहमान शामिल हैं, जो कृषि विभाग में सहायक निदेशक के पद पर कार्यरत हैं. इसके अलावा 55 फरक्का विधानसभा क्षेत्र के AERO और फरक्का के राजस्व अधिकारी नितीश दास को भी निलंबित किया गया है.
चुनाव आयोग की सख्ती
चुनाव आयोग ने 16 मयनागुड़ी विधानसभा क्षेत्र की AERO और मयनागुड़ी विकास खंड में महिला विकास अधिकारी के रूप में तैनात डालिया रे चौधरी के खिलाफ भी कार्रवाई की गई है. इसके अलावा 57 सूती विधानसभा क्षेत्र के AERO और सूती ब्लॉक के एडीए शेख मुर्शिद आलम को भी तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है. इसी क्रम में 139 कैनिंग पूर्व विधानसभा क्षेत्र के दो AERO (सत्यजीत दास (संयुक्त बीडीओ) और जॉयदीप कुंडू (एफईओ)) को भी सस्पेंशन का सामना करना पड़ा है. इसके अतिरिक्त 229 देबरा विधानसभा क्षेत्र के ज्वाइंट बीडीओ और AERO देबाशीष बिस्वास पर भी आयोग ने सख्त कार्रवाई की है. आयोग की इस कार्रवाई को प्रशासनिक हलकों में कड़ा संदेश माना जा रहा है.
विशेषज्ञों का कहना है कि चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए आयोग का यह कदम महत्वपूर्ण है. पश्चिम बंगाल में आगामी चुनावी गतिविधियों को देखते हुए यह निर्णय और भी अहम माना जा रहा है. हालांकि, अभी तक राज्य सरकार की ओर से इस मामले में कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन मुख्य सचिव को दिए गए निर्देशों के बाद विभागीय स्तर पर हलचल तेज हो गई है. चुनाव आयोग ने दो टूक कहा है कि चुनावी कार्य में किसी भी प्रकार की अनियमितता या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी. चुनाव आयोग की इस सख्त कार्रवाई से यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि आयोग चुनावी प्रक्रिया की पवित्रता से कोई समझौता नहीं करेगा और आवश्यक होने पर अपने वैधानिक अधिकारों का प्रयोग करते हुए कठोर कदम उठाता रहेगा.
पांच राज्यों में होने वाले आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियों के मद्देनजर चुनाव आयोग आज से तीन दिवसीय असम दौरे पर रहेगा. 16 से 18 फरवरी तक चलने वाले इस दौरे के दौरान आयोग राज्य में चुनावी व्यवस्थाओं और तैयारियों की विस्तृत समीक्षा करेगा. यह पांच राज्यों में प्रस्तावित चुनावों के संदर्भ में आयोग की पहली आधिकारिक यात्रा मानी जा रही है. दौरे के दौरान चुनाव आयोग विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों, वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ बैठक करेगा. बैठकों में मतदाता सूची, सुरक्षा व्यवस्था, बूथ प्रबंधन और आचार संहिता के पालन जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी. आयोग का उद्देश्य स्वतंत्र, निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनाव सुनिश्चित करना है.
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