फीफा शांति पुरस्कार को लेकर क्यों मचा विवाद?
फुटबॉल की सर्वोच्च संस्था फीफा का शांति पुरस्कार अब विवादों में घिर गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को यह सम्मान दिए जाने के बाद पुरस्कार की निष्पक्षता और उद्देश्य पर सवाल उठने लगे हैं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, फीफा के कुछ सदस्य इस पुरस्कार को समाप्त करने की मांग कर रहे हैं। ऐसे में अब इसकी उपयोगिता और भविष्य की समीक्षा की जा रही है।
क्या है फीफा शांति पुरस्कार?
फीफा ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शांति और एकजुटता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शांति पुरस्कार की शुरुआत की थी। दिसंबर में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को यह सम्मान दिया गया। वॉशिंगटन डीसी के कैनेडी सेंटर में आयोजित समारोह में फीफा अध्यक्ष जियानी इन्फैंटिनो ने उन्हें पुरस्कार प्रदान किया। ट्रंप ने इसे अपने जीवन के सबसे बड़े सम्मानों में से एक बताया था।
ट्रंप को पुरस्कार देने पर क्यों उठे सवाल?
ट्रंप को सम्मानित किए जाने के बाद आलोचकों ने फीफा के फैसले पर सवाल उठाए। फीफा अध्यक्ष इन्फैंटिनो और ट्रंप की करीबी को भी विवाद की एक प्रमुख वजह बताया गया। आलोचकों का तर्क है कि अंतरराष्ट्रीय संघर्षों और सैन्य कार्रवाइयों से जुड़े विवादों के बीच ट्रंप को शांति पुरस्कार देना सम्मान के उद्देश्य पर सवाल खड़े करता है।
अमेरिका की विभिन्न सैन्य कार्रवाइयों और ईरान से जुड़े संघर्षों का हवाला देते हुए आलोचकों ने ट्रंप के शांति संबंधी दावों पर भी आपत्ति जताई। उनका कहना है कि किसी राजनीतिक नेता को सम्मानित करने से पहले उसके फैसलों और अंतरराष्ट्रीय प्रभाव का निष्पक्ष मूल्यांकन होना चाहिए।
पुरस्कार खत्म करने की तैयारी क्यों?
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, स्विट्जरलैंड के ज्यूरिख में हुई फीफा परिषद की बैठक के दौरान इस पुरस्कार को लेकर चर्चा हुई। कुछ सदस्यों ने इसे समाप्त करने की मांग उठाई, जबकि अन्य ने सवाल किया कि क्या यह सम्मान राजनीतिक नेताओं को दिया जाना चाहिए।
विवाद के बाद फीफा की 22 सदस्यीय सामाजिक उत्तरदायित्व समिति को पुरस्कार के महत्व और प्रासंगिकता की समीक्षा करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। रिपोर्टों के अनुसार, समिति अपनी सिफारिशें 16 दिसंबर को कतर की राजधानी दोहा में होने वाली फीफा परिषद की बैठक में पेश कर सकती है। अंतिम फैसला समीक्षा के बाद लिया जाएगा।
नॉर्वे फुटबॉल एसोसिएशन ने भी उठाए सवाल
नॉर्वे फुटबॉल एसोसिएशन ने फीफा के सामने पुरस्कार समेत कई मुद्दों को उठाते हुए जवाबदेही और पारदर्शिता की जरूरत बताई। संगठन पहले भी इस पुरस्कार की वैधता पर सवाल उठा चुका है। उसका तर्क है कि फुटबॉल को राजनीतिक विवादों से दूर रखा जाना चाहिए।
ऑस्ट्रेलियाई फुटबॉलर जैक्सन इरविन और संयुक्त राष्ट्र के पूर्व अधिकारी क्रेग मोखिबर ने भी ट्रंप को सम्मान दिए जाने की आलोचना की थी। आलोचकों के मुताबिक, इस तरह के फैसलों से खेल की निष्पक्षता और विश्वसनीयता प्रभावित हो सकती है।
जियानी इन्फैंटिनो की भूमिका चर्चा में क्यों?
जियानी इन्फैंटिनो 2016 से फीफा अध्यक्ष हैं। अमेरिका, मैक्सिको और कनाडा में होने वाले फुटबॉल विश्व कप की तैयारियों के दौरान ट्रंप और इन्फैंटिनो के संबंधों को लेकर कई बार चर्चा हुई। ट्रंप को शांति पुरस्कार दिए जाने के बाद आलोचकों ने फैसले की प्रक्रिया और निष्पक्षता पर सवाल उठाए।
आलोचकों का मानना है कि फीफा जैसे वैश्विक खेल संगठन को अपने फैसलों में राजनीतिक निष्पक्षता बनाए रखनी चाहिए। हालांकि, पुरस्कार को लेकर अंतिम निर्णय समीक्षा और फीफा परिषद की आगे की कार्रवाई पर निर्भर करेगा।
क्या फीफा शांति पुरस्कार पूरी तरह बंद हो जाएगा?
फिलहाल पुरस्कार को समाप्त किए जाने का अंतिम फैसला सामने नहीं आया है। समीक्षा के बाद फीफा इसे जारी रखने, इसके नियमों में बदलाव करने या इसे बंद करने जैसे विकल्पों पर विचार कर सकता है। आने वाली परिषद बैठक इस मामले में महत्वपूर्ण हो सकती है।
निष्कर्ष: डोनाल्ड ट्रंप को फीफा शांति पुरस्कार दिए जाने के बाद शुरू हुआ विवाद अब संस्था की पुरस्कार नीति तक पहुंच गया है। आने वाले समय में यह स्पष्ट होगा कि फीफा इस सम्मान को जारी रखता है या इसकी व्यवस्था में बड़ा बदलाव करता है।
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