रांची: निश्शुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा के अधिकार अधिनियम (आरटीई), 2009 लागू होने के पूर्व नियुक्त शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टेट) उत्तीर्ण होने की अनिवार्यता को लेकर प्राथमिक शिक्षकों में संशय बरकरार है। हालिया घटनाक्रम में केंद्र सरकार ने संसद में एक सवाल के जवाब में टेट की अनिवार्यता को लेकर सर्वोच्च न्यायालय द्वारा एक सितंबर 2025 को पारित आदेश की ही जानकारी दी इसे लेकर सर्वोच्च न्यायालय का क्या आदेश है, इसे ही बताया गया। इस आदेश से प्रभावित उन शिक्षकों को राहत देने के लिए कोई जवाब नहीं आया, जो इस अधिनियम के पूर्व से कार्यरत हैं तथा दावा कर रहे हैं कि टेट की अनिवार्यता के प्रविधान उनपर लागू नहीं होने चाहिए, क्योंकि आरटीई के तहत ही टेट की अनिवार्यता लागू की गई है।

केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री जयंती चौधरी द्वारा संसद में दिए गए जवाब में कहा गया कि सर्वोच्च न्यायालय ने अपने आदेश में आरटीई के दायरे में आनेवाले सभी स्कूलों के शिक्षक के लिए टेट उत्तीर्ण होना अनिवार्य है। आदेश में यह भी कहा गया है कि जो शिक्षक टेट उत्तीर्ण नहीं है, उन्हें इसे उत्तीर्ण होने के लिए दो वर्ष का समय मिलेगा।
आदेश के दो वर्ष के बाद वैसे सभी शिक्षकों को सेवा से हटाया जा सकेगा, जो टेट उत्तीर्ण नहीं हैं तथा जिनकी सेवा पांच वर्ष से अधिक बची है। जिन शिक्षकों के सेवा पांच वर्ष से कम बची होगी उन्हें सेवा से तो नहीं हटाया जाएगा, लेकिन उन्हें टेट उत्तीर्ण होने पर ही प्रोन्नति प्रदान की जाएगी।
इधर, संसद में केंद्र सरकार की ओर से आए जवाब के बाद एक बार फिर प्राथमिक शिक्षक आंदोलन की रणनीति तैयार कर रहे हैं। अखिल भारतीय स्तर पर शीघ्र ही एक बड़े आंदोलन की तैयारी चल रही है, जिसमें सभी राज्यों के प्राथमिक शिक्षक संघ सम्मिलित होंगे।
उल्लेखनीय है कि सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने झारखंड सहित सभी राज्यों से इस आदेश से प्रभावित होनेवाले शिक्षकों का ब्योरा मांगा है। साथ ही राज्यों से अपने स्तर पर भी विधि मंतव्य लेकर रिपोर्ट देने को कहा है। झारखंड की ओर से केंद्र को इसपर क्या जवाब दिया गया, इसका खुलासा अभी नहीं हो सका है।
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