चेन्नई। भारत की आजादी के समय तैयार किए गए ऐतिहासिक सेंगोल को बनाने में अहम भूमिका निभाने वाले प्रसिद्ध ज्वैलर थिरु वुम्मिडी एथिराज का 99 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उन्होंने सेंगोल के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया था। यही सेंगोल 1947 में तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को सौंपा गया था और वर्ष 2023 में नए संसद भवन में लोकसभा अध्यक्ष के आसन के पास स्थापित किया गया।
आजादी के समय तैयार हुआ था सेंगोल
साल 1947 में देश की आजादी के अवसर पर तमिलनाडु के तिरुवावदुथुरै अधीनम मठ की पहल पर चेन्नई के वुम्मिडी बंगारू चेट्टी ज्वेलर्स को सेंगोल बनाने की जिम्मेदारी दी गई थी। उस समय एथिराज की उम्र लगभग 22 वर्ष थी। उन्होंने वुम्मिडी सुधाकर और अन्य कारीगरों के साथ मिलकर इसके निर्माण में अहम भूमिका निभाई।
बताया जाता है कि लगभग 10 कारीगरों ने 10 से 15 दिनों में इस राजदंड को तैयार किया था। करीब पांच फीट लंबे सेंगोल को चांदी पर सोने की परत चढ़ाकर बनाया गया। इसके शीर्ष पर नंदी की आकृति बनाई गई, जिसे न्याय, स्थिरता और जिम्मेदारी का प्रतीक माना जाता है। इसके अलावा इसमें देवी लक्ष्मी और अनाज की बालियों जैसे पारंपरिक प्रतीक भी उकेरे गए।
71 साल तक परिवार को नहीं थी इसकी जानकारी
आजादी के बाद सेंगोल को प्रयागराज स्थित इलाहाबाद म्यूजियम की नेहरू गैलरी में रखा गया था। वहां इसे नेहरू को भेंट की गई सुनहरी छड़ी के रूप में दर्ज किया गया था। लंबे समय तक इसके निर्माण से जुड़े परिवार को भी इसकी ऐतिहासिक पहचान की जानकारी नहीं थी।
वर्ष 2018 में तमिल भाषा की एक पत्रिका में प्रकाशित लेख के माध्यम से वुम्मिडी परिवार की नई पीढ़ी को सेंगोल के बारे में पता चला। इसके बाद परिवार ने इसकी तलाश शुरू की। वर्ष 2019 के आसपास परिवार को प्रयागराज के संग्रहालय में रखे राजदंड के बारे में जानकारी मिली।
परिवार के प्रतिनिधियों ने संग्रहालय पहुंचकर राजदंड का निरीक्षण किया। उस पर बने नंदी के चिह्न और तमिल अक्षरों के आधार पर इसकी पहचान की गई। इस तरह लगभग 71 साल बाद परिवार को अपने पूर्वजों की ऐतिहासिक कारीगरी के बारे में जानकारी मिली।
नए संसद भवन में मिली ऐतिहासिक पहचान
28 मई 2023 को नए संसद भवन के उद्घाटन समारोह के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सेंगोल को लोकसभा अध्यक्ष के आसन के पास स्थापित किया। केंद्र सरकार ने इसे भारत की स्वतंत्रता, न्यायपूर्ण शासन और सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़े प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया।
इस अवसर पर सेंगोल के निर्माण से जुड़े वुम्मिडी परिवार के सदस्यों को भी सम्मानित किया गया। एथिराज समारोह में शामिल हुए थे और प्रधानमंत्री ने उनके योगदान की सराहना की थी।
ऐतिहासिक विरासत छोड़ गए एथिराज
एथिराज का निधन भारतीय पारंपरिक आभूषण निर्माण और ऐतिहासिक धरोहर से जुड़े एक महत्वपूर्ण अध्याय के समाप्त होने जैसा है। उनके योगदान से तैयार सेंगोल आज संसद भवन में स्थापित है और देश के इतिहास, शिल्पकला तथा सांस्कृतिक परंपरा की याद दिलाता है।
उनके निधन से ज्वैलरी व्यवसाय और सेंगोल के निर्माण से जुड़े परिवार में शोक का माहौल है। उनके जीवन और कारीगरी को ऐतिहासिक सेंगोल के माध्यम से लंबे समय तक याद किया जाएगा।
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