फतेहपुर। जिले में दुर्गा पूजा के बाद मां दुर्गा की प्रतिमाओं के विसर्जन का सिलसिला श्रद्धा और उत्साह के साथ संपन्न हुआ। गंगा और यमुना नदियों के विभिन्न घाटों पर सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक विसर्जन का कार्यक्रम चला। इस दौरान 1100 से अधिक दुर्गा प्रतिमाओं का विसर्जन किया गया। घाटों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे और भक्तिमय माहौल में मां दुर्गा को विदाई दी।
विसर्जन के दौरान श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखने को मिला। भक्त मां दुर्गा के जयकारे लगाते हुए प्रतिमाओं के साथ घाटों तक पहुंचे। पूजा समितियों और श्रद्धालुओं ने विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना कर मां दुर्गा से सुख, समृद्धि और खुशहाली की कामना की।
गंगा और यमुना के घाटों पर सुबह से ही चहल-पहल बनी रही। निर्धारित समय के दौरान अलग-अलग पूजा समितियों की प्रतिमाओं का विसर्जन किया गया। इस अवसर पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने से घाटों पर धार्मिक उत्सव जैसा माहौल नजर आया।
जयकारों के बीच मां दुर्गा को दी गई विदाई
विसर्जन के दौरान विभिन्न पूजा समितियों के सदस्य और स्थानीय श्रद्धालु अपनी-अपनी प्रतिमाओं के साथ घाटों तक पहुंचे। ढोल-नगाड़ों और मां दुर्गा के जयकारों के बीच भक्तों ने नम आंखों से माता को विदाई दी। श्रद्धालुओं ने अगले वर्ष फिर से मां दुर्गा के आगमन की कामना करते हुए परिवार और समाज की सुख-शांति तथा समृद्धि के लिए प्रार्थना की।
नवरात्र के दौरान स्थापित की गई प्रतिमाओं के विसर्जन के साथ ही दुर्गा पूजा उत्सव का समापन हुआ। पूरे आयोजन में धार्मिक आस्था और उत्साह का माहौल देखने को मिला। विसर्जन के लिए घाटों पर पहुंचे श्रद्धालुओं के कारण दिनभर गतिविधियां बनी रहीं।
गंगा-यमुना घाटों पर रहा धार्मिक माहौल
फतेहपुर में गंगा और यमुना नदियों के घाटों का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है। दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के अवसर पर इन घाटों पर श्रद्धालुओं की आवाजाही रही। भक्तों ने मां दुर्गा की आराधना करते हुए सुख, शांति और खुशहाली की कामना की। विसर्जन कार्यक्रम के दौरान पूजा समितियों के सदस्यों ने भी भागीदारी की और परंपरागत तरीके से प्रतिमाओं को विदाई दी।
1100 से अधिक प्रतिमाओं का विसर्जन जिले में दुर्गा पूजा के व्यापक आयोजन को दर्शाता है। इस दौरान श्रद्धालुओं की भागीदारी से धार्मिक उत्सव का माहौल बना रहा।
विसर्जन के साथ दुर्गा पूजा उत्सव संपन्न
दुर्गा प्रतिमाओं के विसर्जन के साथ ही जिले में नवरात्र और दुर्गा पूजा से जुड़ी प्रमुख धार्मिक गतिविधियां संपन्न हो गईं। मां दुर्गा को विदाई देते समय श्रद्धालुओं ने अगले वर्ष फिर से माता के आगमन की कामना की। पूरे आयोजन ने जिले में धार्मिक परंपराओं और सामूहिक आस्था की झलक पेश की।
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