पेरिस। फ्रांस में छात्र आंदोलनों के बीच इन दिनों एक अजीबोगरीब नारा सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। ‘बिस्मिल्लाह, से ले तेनैब्रे’ नाम का यह वाक्य युवाओं के बीच चर्चा का विषय बन गया है। प्रदर्शनकारी Gen-Z इसका इस्तेमाल पुलिस और उन लोगों पर तंज कसने के लिए कर रहे हैं, जिन पर आंदोलन से जुड़ी अंदरूनी जानकारी जुटाने की कोशिश करने का संदेह है।
क्या है ‘बिस्मिल्लाह से ले तेनैब्रे’ का मतलब?
यह नारा अरबी और फ्रेंच शब्दों को मिलाकर बनाया गया है। ‘बिस्मिल्लाह’ का अर्थ अल्लाह के नाम पर होता है, जबकि फ्रेंच शब्द ‘से ले तेनैब्रे’ का मोटा-मोटा अर्थ अंधकार से जुड़ा है। हालांकि, यह कोई सामान्य या व्याकरण की दृष्टि से सही फ्रांसीसी वाक्य नहीं है।
इसकी अटपटी भाषा और असामान्य शब्दों के मेल ने इसे युवाओं के बीच मजाक और व्यंग्य का जरिया बना दिया है। प्रदर्शनकारियों के लिए यह नारा अब केवल एक वाक्य नहीं, बल्कि विरोध जताने का अनोखा तरीका बन गया है।
सोशल मीडिया से शुरू हुई नारे की चर्चा
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, इस वाक्य की शुरुआत स्नैपचैट पर भेजे गए कुछ संदेशों से हुई। बताया जाता है कि एक व्यक्ति ने छात्र प्रदर्शन आयोजित करने वाले युवाओं के निजी चैट समूहों में शामिल होने के लिए संदेश भेजे थे। इन संदेशों में ‘बिस्मिल्लाह, से ले तेनैब्रे’ लिखने के बाद आंदोलन के दौरान तोड़फोड़ करने जैसी बातें भी कही गई थीं।
संदेशों की भाषा और अंदाज युवाओं को असामान्य लगे। इसके बाद कुछ लोगों ने इनके स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया पर साझा कर दिए और देखते ही देखते यह वाक्य वायरल हो गया।
पुलिस पर शक के बाद प्रदर्शनकारियों ने बनाया मजाक
कुछ युवाओं को संदेह हुआ कि ये संदेश पुलिस या सुरक्षा एजेंसियों से जुड़े लोगों की ओर से भेजे गए हो सकते हैं। उन्हें आशंका थी कि आंदोलन के भीतर की जानकारी जुटाने के लिए कोई फर्जी पहचान के जरिए छात्र समूहों में प्रवेश करने की कोशिश कर रहा है। हालांकि, इन संदेशों के पीछे किसका हाथ था, इसकी स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।
इसके बाद प्रदर्शनकारियों ने इसी वाक्य को पुलिस और कथित तौर पर आंदोलन की निगरानी करने वालों पर व्यंग्य करने के लिए इस्तेमाल करना शुरू कर दिया। विरोध प्रदर्शनों में इस नारे वाली तख्तियां दिखाई देने लगीं और सोशल मीडिया पर इसके वीडियो भी प्रसारित होने लगे।
फ्रांस से दूसरे यूरोपीय देशों तक पहुंचा नारा
यह नारा फ्रांस के बाहर भी चर्चा में आया है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, बेल्जियम और जर्मनी में हुए कुछ विरोध प्रदर्शनों में भी युवाओं ने इसका इस्तेमाल किया। छात्र संगठनों से जुड़े लोगों का मानना है कि इसकी अटपटी भाषा के जरिए युवाओं ने उन लोगों का मजाक उड़ाया, जो कथित तौर पर आंदोलन के अंदरूनी हालात जानने की कोशिश कर रहे थे।
स्कूलों की समस्याओं को लेकर शुरू हुआ था आंदोलन
फ्रांस में छात्र आंदोलन की प्रमुख वजह स्कूलों की खराब स्थिति और शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी समस्याएं बताई गई हैं। छात्र जर्जर स्कूल भवनों की मरम्मत, शिक्षकों की कमी दूर करने, कक्षाओं में विद्यार्थियों की संख्या कम करने और पढ़ाई के दबाव को घटाने जैसी मांगें उठा रहे थे।
प्रदर्शनों के दौरान कुछ स्थानों पर हिंसा और तोड़फोड़ की घटनाएं भी सामने आईं। रिपोर्टों में कई स्कूलों को नुकसान पहुंचने और बड़ी संख्या में लोगों की गिरफ्तारी का उल्लेख किया गया है। आंदोलन में मजदूर संगठनों और अन्य समूहों के शामिल होने के बाद महंगाई जैसे मुद्दे भी विरोध का हिस्सा बने।
इस पूरे घटनाक्रम में ‘बिस्मिल्लाह, से ले तेनैब्रे’ जैसे असामान्य नारे ने खास पहचान बना ली है। सोशल मीडिया पर वायरल हुआ यह वाक्य अब फ्रांस के छात्र आंदोलन में व्यंग्य और विरोध का प्रतीक बनकर उभरा है।
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