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Russian Naval Base Expansion - 1

“भारत दौरे के बाद पुतिन के लिए खुशखबरी: अमेरिका में मची हलचल”

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन दो दिवसीय भारत यात्रा पूरी करके वापस जा चुके हैं. वापस पहुंचने के बाद पुतिन को जल्द ही एक खुशखबरी मिलने वाली है. हिंद महासागर में उन्हें एक बेस मिल सकता है, जो सीधे तौर पर अमेरिका की चिंता बढ़ाने वाले हैं. हिंद महासागर में मौजूद लाल सागर के तट पर सूडान नाम का देश है. सूडान की सैन्य सरकार ने रूस के सामने एक ऐसा प्रस्ताव रखा है जो अफ्रीका का मिडिल ईस्ट की जियोपॉलिटिक्स को बदल सकता है. वॉल स्ट्रीट जर्न की रिपोर्ट में कहा गया कि सूडान ने रूस को लाल सागर के तट पर सैनिक और युद्धपोत तैनात करने का अधिकार देने से जुड़ा ऑफर दिया है.

रूस से क्या चाहता है सूडान?

सूडान ने रूस को बेस देने का ऑफर तो दे दिया है, लेकिन इसके बदले में वह कुछ चाहता भी होगा. जी हां! इसके बदले सूडान रूस से एडवांस्ड हथियारों, एंटी-एयरक्राफ्ट सिस्टम और सैन्य उपकरणों की मांग कर रहा है. सूडान की विदेश मंत्रालय ने फरवरी में संकेत दिया था कि देश रूस को नौसैनिक फैसिलिटी बनाने की अनुमति देने को तैयार है, लेकिन उस समय शर्तें स्पष्ट नहीं थीं. अब सामने आया है कि प्रस्ताव में रूस को पोर्ट सूडान या किसी अन्य रेड सी लोकेशन पर 300 तक सैनिक भेजने और चार युद्धपोत, जिनमें परमाणु ऊर्जा से चलने वाले जहाज भी शामिल हों तैनात करने की छूट देने पर चर्चा हुई है.
रिपोर्ट के मुताबिक, सूडान की सैन्य स्थिति लगातार कमजोर होती जा रही है. सेना और रैपिड सपोर्ट फोर्सेज (RSF) के बीच 2023 में शुरू हुआ संघर्ष अब तक लाखों लोगों को विस्थापित कर चुका है और दसियों हजार की जान ले चुका है. ऐसे में सूडानी शासन रूस से मिलने वाली सैन्य मदद को निर्णायक मान रहा है. पश्चिमी देशों और यूरोपीय संघ से ऐसे हथियार हासिल करना लगभग असंभव है, इसलिए रूस ही उनके लिए सबसे व्यावहारिक विकल्प बचा है.

रूस-सूडान की डील अमेरिका की कैसे बढ़ाएगा टेंशन?

अगर यह सौदा आगे बढ़ता है तो रूस को न केवल लाल सागर में स्थायी सैन्य पहुंच मिलेगी, बल्कि सूडान के सोने की खदानों और अन्य संसाधनों में शुरुआती अधिकार भी मिल सकते हैं. अफ्रीका में रूस पहले ही कई देशों में सुरक्षा सहयोग बढ़ा चुका है और यह अड्डा उस रणनीति को और मजबूत करेगा. अमेरिका और उसके सहयोगी इस संभावित समझौते को लेकर चिंतित हैं, क्योंकि यह वही इलाका है जहां चीन पहले से जिबूती में अपना विदेशी नौसैनिक अड्डा चला रहा है और अमेरिका का बेस भी मौजूद है. रूस की यहां एंट्री इस समुद्री गलियारे में एक नया संतुलन बना सकता है. फिलहाल, यह साफ नहीं है कि यह नौसैनिक सुविधा कब तक तैयार होगी, लेकिन संकेत यही हैं कि सूडान युद्ध के दबाव में जल्द से जल्द रूस से समझौता पक्का करना चाहता है.

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