दिल्ली में ऑनलाइन ग्रॉसरी और क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म ब्लिंकइट को मुश्किल में डाल दिया है। दिल्ली पुलिस ने आरोप लगाया है कि Blinkit पर बटन वाले चाकू बेचे जा रहे थे, जिनका इस्तेमाल दो अलग-अलग हत्या मामलों में हुआ। इसके बाद दिल्ली पुलिस की ओर से FIR दर्ज की गई और आर्म्स एक्ट वायलेसन के तहत जांच शुरू हुई। क्या ऑनलाइन सुविधा के नाम पर सुरक्षा से समझौता हुआ?
क्या Blinkit से खरीदे गए थे हत्या में इस्तेमाल चाकू?
पुलिस जांच के दौरान सामने आया कि वेस्ट दिल्ली की दो हत्याओं में इस्तेमाल चाकू कथित तौर पर Blinkit ऐप से खरीदे गए थे। इस खुलासे के बाद पुलिस ने खुद ग्राहक बनकर वही बटन लॉक चाकू ऑर्डर किया। जांच में पाया गया कि चाकू की ब्लेड लंबाई 8 सेमी और चौड़ाई 2.5 सेमी थी, जो सरकारी नियमों से ज्यादा है। नियम के मुताबिक, तय सीमा से बड़े ब्लेड वाले चाकू ऑनलाइन बेचना Arms Act का उल्लंघन है। मामले के बाद दिल्ली पुलिस ने शहर के कई Blinkit डार्क स्टोर पर छापेमारी की। इस दौरान 55 से ज्यादा बटन वाले चाकू जब्त किए गए। बताया जा रहा है कि इन चाकुओं की कीमत करीब 699 रुपये थी।
Quick Commerce Model पर फिर सवाल?
Blinkit पहले भी 10 मिनट डिलीवरी के दावे को लेकर चर्चा में रहा है। कई संगठनों ने कहा था कि इतनी तेज डिलीवरी का दबाव डिलीवरी पार्टनर की सुरक्षा के लिए खतरा बन सकता है। अब यह नया विवाद क्विक कामर्स इन्वेस्टिगेशन को और गंभीर बना सकता है।
सरकार की सख्ती और बदली टैगलाइन
जनवरी में सरकार ने ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से 10 मिनट डिलीवरी के दावे हटाने को कहा था। इसके बाद Blinkit ने अपनी टैगलाइन बदल दी। केंद्रीय श्रम मंत्री ने भी डिलीवरी पार्टनर की सुरक्षा को प्राथमिकता देने की बात कही थी। Blinkit के खिलाफ केस दर्ज हो चुका है और जांच जारी है। अगर Arms Act Violation साबित होता है, तो कंपनी पर कड़ी कार्रवाई हो सकती है।
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