इंदौर में दूषित पानी से मौतों के मामले में राज्य सरकार ने शुक्रवार को हाईकोर्ट को बताया कि अब तक सिर्फ 4 लोगों की मौत हुई है। सरकार की यह रिपोर्ट ऐसे समय सामने आई है, जब मृतकों के परिजन और अस्पतालों के जरिए 15 मौतों की जानकारी सामने आ चुकी है।
मामला फिलहाल हाईकोर्ट में विचाराधीन है। अदालत ने 1 जनवरी को राज्य सरकार से स्टेटस रिपोर्ट मांगी थी, जिसे सरकार ने 5 दिन बाद पेश किया। अगली सुनवाई 6 जनवरी को होगी।
इस बीच, मोहन सरकार ने लापरवाही के आरोपों के बीच नगर निगम कमिश्नर दिलीप यादव और एडिशनल कमिश्नर रोहित सिसोनिया को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। एडिशनल कमिश्नर सिसोनिया का तबादला कर दिया गया है, जबकि सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर संजीव श्रीवास्तव से जल वितरण विभाग का प्रभार वापस ले लिया गया है।
सरकार ने बताए 4 मृतकों के नाम
राज्य सरकार की 39 पेज की स्टेटस रिपोर्ट के अनुसार, दूषित पानी से जिन चार लोगों की मौत हुई, वे सभी 60 वर्ष से अधिक उम्र के सीनियर सिटीजन थे।
उर्मिला – 28 दिसंबर
तारा (60) और नंदा (70) – 30 दिसंबर
हीरालाल (65) – 31 दिसंबर
जांच में पानी पीने लायक नहीं
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने बताया कि मेडिकल कॉलेज की लैब जांच में पानी पीने योग्य नहीं पाया गया। सैंपल में फीकल कॉलिफॉर्म, ई-कोलाई, विब्रियो और प्रोटोजोआ जैसे खतरनाक बैक्टीरिया मिले हैं।
सूत्रों के मुताबिक, पानी में हैजा फैलाने वाला विब्रियो कोलेरी भी पाया गया है, हालांकि इसे प्रारंभिक रिपोर्ट बताया जा रहा है।
नगर निगम की लैब में भेजे गए करीब 80 सैंपल्स को भी जांच में असंतोषजनक बताया गया है। भागीरथपुरा क्षेत्र से लिए गए सैंपल घरेलू उपयोग के लिए भी अनुपयुक्त पाए गए, लेकिन दोनों जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई हैं।
पाइपलाइन लीकेज से फैला प्रदूषण
अधिकारियों के अनुसार, भागीरथपुरा में एक पुलिस चौकी के पास मुख्य पेयजल पाइपलाइन में रिसाव पाया गया है। इसी स्थान के ऊपर शौचालय बना हुआ है, जिससे जल आपूर्ति के दूषित होने की आशंका जताई जा रही है।
राजनीतिक बयानबाजी तेज
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कहा कि इंदौर में पानी नहीं, बल्कि जहर बांटा गया और प्रशासन कुंभकर्णी नींद में रहा। उन्होंने सवाल उठाया कि लगातार शिकायतों के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं हुई।
वहीं, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी इस मामले को लेकर सरकार पर निशाना साधा।
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