लोकसभा में सोमवार को राहुल गांधी के भाषण के दौरान जोरदार हंगामा हुआ। राहुल ने पूर्व आर्मी चीफ जनरल नरवणे की अनपब्लिश्ड किताब का हवाला देते हुए कहा- 4 चीनी टैंक लद्दाख सीमा में पहुंच गए थे। राहुल के ऐसा कहते ही पहले रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और फिर गृह मंत्री शाह ने उन्हें टोका। इसके बाद स्पीकर ने नियमों का हवाला देते हुए उन्हें रोका। राहुल करीब 46 मिनट तक अपनी बात कहने की कोशिश करते रहे। इसके बाद स्पीकर ने लोकसभा की कार्यवाही 3 बजे तक के लिए स्थगित कर दी। दोपहर 3 बजे लोकसभा की कार्यवाही शुरू होते ही राहुल ने बोलना शुरू किया। लेकिन हंगामे के चलते महज 9 मिनट बाद ही कार्यवाही शाम 4 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। शाम 4 बजे भी कार्यवाही शुरू होते ही फिर हंगामा हुआ और 11 मिनट बाद कार्यवाही मंगलवार सुबह 11 बजे तक स्थगित कर दी गई।
लोकसभा में क्या हुआ, सिलसिलेवार पढ़िए…
- राहुल गांधी ने सदन में कहा, डोकलाम में चीनी टैंक भारत की सीमा में पहुंच गए थे। मैं यह बात एक मैगजीन के आर्टिकल के हवाले से कह रहा हूं। जिसमें पूर्व आर्मी चीफ एमएम नरवणे की किताब (मेमॉयर) को कोट किया गया है।
- राजनाथ सिंह खड़े हुए और बोले, ‘अगर ये बातें प्रकाशित हुई हैं तो इसका जिक्र करें नहीं तो छोड़ दें।’
- राहुल बोले- ‘आप सब ध्यान से सुनें कि मैं क्या पढ़ रहा हूं इससे पता चल जाएगा कि कौन देशभक्त है और कौन नहीं। 4 चीनी टैंक डोकलाम में भारत की धरती पर आ रहे थे। वे कुछ 100 मीटर ही दूर थे।’
- स्पीकर ओम बिरला ने कहा, राहुल जी आप सदन में नेता विपक्ष हैं। सांसद प्रियंका ने एक बात कही थी तो उन्होंने ऑथेंटिक स्तर पर प्रस्तुत किया था। आपसे भी यही अपील है’
- राहुल ने कहा, ‘ये सौ प्रतिशत ऑथेंटिक है। राजनाथ सिंह ने कहा कि राहुल बताएं कि क्या यह प्रकाशित हुआ है या नहीं केवल इतना बताएं।’ लोकसभा में एनडीए और विपक्ष ने हंगामा शुरू कर दिया।
- ओम बिरला ने कहा कि रक्षामंत्री सही कह रहे हैं। आप सदन में इसका जवाब दें। आप सदन में है, विपक्ष के नेता हैं सही नियम से चलें।
- राहुल ने कहा- नरवणे की किताब में रक्षामंत्री और प्रधानमंत्री का जिक्र है। मैं वही बता रहा हूं।
- राजनाथ सिंह ने कहा कि राहुल जिस किताब के बारे में बोल रहे हैं वह किताब प्रकाशित नहीं हुई है।
- अमित शाह ने बताया कि वह मैग्जीन की रिपोर्ट है, नरवणे जी ने ऐसा नहीं कहा है। मैगजीन तो कुछ भी लिख सकता है।
- ओम बिरला ने कहा कि अखबार की कटिंग ही सदन में चल सकती है, इसके अलावा कुछ नहीं रख सकते।
- राहुल ने कहा, ये सब नरवणे ने कहा है। उनकी किताब को प्रकाशित नहीं करने दिया गया है।
- अमित शाह ने कहा- राहुल ने खुद कह दिया है कि पुस्तक प्रकाशित नहीं हुई है। अब बात ही खत्म हो जाती है। जो बुक पब्लिश ही नहीं है उसका जिक्र कैसे कर सकते हैं।
- ओम बिरला ने माइक का कंट्रोल बंद करने का निर्देश दिया
- राजनाथ बोले- सदन के नियमों का उल्लंघन न करें राहुल जी।
- राजनाथ सिंह ने कहा- मैं केवल यह चाहता हूं कि राहुल जी वह किताब ले आएं मैं देखना चाहता हूं। मैं दावे से कह रहा हूं कि वह किताब पब्लिश ही नहीं है।
- राहुल गांधी ने कहा- एक मैगजीन है उसमें एक आर्टिकल है मैं उसको कोट कर रहा हूं।
- राजनाथ ने लोकसभा अध्यक्ष से कहा कि सदन में इस मुद्दे पर बोलने की परमिशन नहीं दी जानी चाहिए।
- अखिलेश यादव ने कहा, चीन का सवाल सेंसेटिव है। अगर देश की सुरक्षा से जुड़ा मामला है तो राहुल जी को पढ़ने देना चाहिए।
- किरेन रिजिजू ने कहा- हम सुनने के लिए बैठे हैं। अध्यक्ष रूलिंग दे चुके हैं। लेकिन फिर भी वे पढ़ रहे हैं। ऐसे कैसे चलेगा।
- ओम बिरला ने कहा- सदन में अपनी बात रखने का अधिकार है। लेकिन नियम से चलें।
- राहुल गांधी ने कहा, वे एमपी थे, वे हमारे चरित्र पर बोले थे। राजनीति पर नहीं। वे बोले कि हम एंटी नेशनल हैं।
- अमित शाह ने कहा- मैंने तेजस्वी का भाषण ध्यान से सुना। उन्होंने विपक्ष की देशभक्ति पर कोई सवाल नहीं उठाया। वे सरकारों की मंशा पर बोले हैं। राहुल गांधी कह रहे हैं कि हमारे चरित्र पर सवाल उठा रहे हैं। वे कह रहे हैं चाइनीज टैंक आए, इनको किसने बताया।
नरवणे की आत्मकथा ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’, पब्लिश नहीं हुई राहुल गांधी संसद में जिस किताब के आधार पर डोकलाम में चीनी टैंक घुसने का दावा कर रहे हैं, वह पूर्व सेनाध्यक्ष जनरल एमएम नरवणे ने लिखी है। ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ नामक यह किताब अभी पब्लिश नहीं हुई है। इसका हार्डकवर अप्रैल 2024 से ऑनलाइन शॉपिंग साइट्स पर उपलब्ध है। किताब में चीन के साथ भारतीय सेना की 2020 की झड़पों के साथ-साथ अग्निवीर योजना को रिव्यू किया गया है। 2019 से 2022 तक सेना प्रमुख रहे नरवणे ने इंडियन एक्सप्रेस के इंटरव्यू में बताया था कि उन्होंने अपनी किताब पेंग्विन पब्लिशर ग्रुप को छपने के लिए दे दी है। अब यह प्रकाशन समूह और सरकार के बीच का मामला है। किताब रक्षा मंत्रालय को मंजूरी के लिए भेजी गई है। एक साल से ज्यादा हो चुका है लेकिन इसे पब्लिश करने की मंजूरी नहीं मिली है।
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