महोबा। शहर के ऊदल चौक पर मां दुर्गा के दरबार में भव्य कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस साहित्यिक संध्या में महोबा, चरखारी, झांसी और छतरपुर से आए कवियों एवं साहित्यकारों ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। वीर रस, हास्य-व्यंग्य, श्रृंगार, अध्यात्म और सामाजिक सरोकारों से जुड़ी कविताओं ने पूरे आयोजन को यादगार बना दिया। देर रात तक चले इस कार्यक्रम में श्रोताओं ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ कवियों का उत्साहवर्धन किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ कवि अरविन्द अटल की वाणी वंदना से हुआ। इसके बाद अखिलेश त्रिपाठी ने नारी सम्मान पर आधारित कविता प्रस्तुत कर सामाजिक संदेश दिया। महोबा के कवि जितेन्द्र आदित्य ने अपनी लोकप्रिय पंक्तियों “प्यार छिपता नहीं छिपाने से, मैं चाहता हूं तुम्हें जमाने से” को खास अंदाज में सुनाकर खूब वाहवाही बटोरी।
प्रख्यात साहित्यकार जेके ज्वलंत ने ओजपूर्ण कविता के माध्यम से श्रोताओं में जोश भर दिया। वहीं, हास्य-व्यंग्य के लिए प्रसिद्ध रोहित शर्मा ने अपनी चुटीली रचनाओं से कार्यक्रम को रोचक बनाया। चरखारी से आए कवि राजेश तिवारी ने गजलों की प्रस्तुति से साहित्य प्रेमियों का दिल जीत लिया। राकेश पटेरिया ने बेटी के महत्व को दर्शाती भावपूर्ण कविता सुनाकर श्रोताओं को भावुक कर दिया।
छतरपुर से आए कवि सुरेन्द्र शर्मा सुमन ने अपनी रचना “शायद मेरे गीत किसी ने गाए हैं, देखो तो बिन मौसम बादल छाए हैं” सुनाई तो पूरा प्रांगण तालियों से गूंज उठा। महोबा की कवयित्री नीतू पालीवाल ने श्रृंगार गीतों की प्रस्तुति देकर दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया। झांसी के व्यंग्यकार हरनाथ सिंह चौहान ने भी अपने काव्य पाठ से श्रोताओं को प्रभावित किया।
अपने दमदार दोहों के लिए चर्चित साहित्यकार संतोष द्विवेदी ‘विगुल’ ने प्रभावशाली रचनाओं से खूब तालियां बटोरीं। कार्यक्रम का संचालन कर रहे साहित्यकार एवं रसायन विज्ञान के प्रवक्ता जेके शिवहरे ‘ज्वलंत’ ने अपनी ओजस्वी प्रस्तुति से श्रोताओं में उत्साह का संचार किया। उमाकांत और अनिल रावत ‘मंजुल’ ने भी अपनी कविताओं के माध्यम से श्रोताओं का ध्यान आकर्षित किया।
साहित्यकार सुनील शर्मा ने आध्यात्मिक भावों से परिपूर्ण कविताएं प्रस्तुत कर श्रोताओं को भाव-विभोर किया। वहीं, स्थानीय कवि सुनील दीक्षित ने भगवान श्रीकृष्ण और रसखान का उल्लेख करती पंक्तियां “कठिन प्रश्नों के उत्तर भी बहुत आसान पाओगे, जहां पर कृष्ण बसते हैं वहीं रसखान पाओगे” सुनाकर खूब सराहना हासिल की।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे छतरपुर के वरिष्ठ साहित्यकार श्रीप्रकाश पटेरिया ‘हृदयेश’ ने अपने जोशीले काव्य पाठ से सम्मेलन को यादगार बना दिया। उनकी प्रस्तुति पर श्रोता बार-बार ‘वंस मोर’ की मांग करते नजर आए।
रात भर चले इस साहित्यिक आयोजन के अंत में आयोजक अजय बरसैंया ने सभी कवियों, साहित्यकारों और उपस्थित श्रोताओं के प्रति आभार व्यक्त किया। कवि सम्मेलन ने महोबा में साहित्यिक और सांस्कृतिक परंपरा को जीवंत करते हुए कविता प्रेमियों को यादगार अनुभव प्रदान किया।
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