“मैं फंस गई थी… मेरे पास न पैसे थे, न ट्रांसपोर्ट… और उसने धमकी दी कि अगर मैंने किसी को बताया तो वह मुझे शारीरिक नुकसान पहुंचाएगा.” इन शब्दों के साथ एपस्टीन सर्वाइवर Rina Oh ने उस खौफनाक दौर को याद किया, जिसने उनकी जिंदगी की दिशा बदल दी. एक उभरती हुई आर्ट स्टूडेंट, जिसे “बिना शर्त स्कॉलरशिप” का सपना दिखाया गया, लेकिन वह सपना जल्द ही नियंत्रण, धमकियों और मनोवैज्ञानिक दबाव के जाल में बदल गया. रीना ओह का दावा है कि बदनाम फाइनेंसर जेफरी एपस्टीन ने पहले भरोसा जीता, फिर अलग-थलग कर दिया और अंत डर के साये में चुप रहने को मजबूर किया. फ्लोरिडा की एक ट्रिप के दौरान उन्हें एहसास हुआ कि “यह सब बहुत गलत है.” लेकिन तब तक वह पूरी तरह निर्भर और असुरक्षित स्थिति में थीं.
सबसे बड़ा सनसनीखेज दावा तब सामने आया जब उन्होंने कहा कि Donald Trump “बहुत कुछ जानते थे” और जिन भी ताकतवर लोगों के नाम एपस्टीन फाइलों में हैं, उनसे कसम खाकर पूछताछ होनी चाहिए. एपस्टीन केस की परतें भले ही सालों पुरानी हों, लेकिन सर्वाइवर की यह आपबीती फिर से वैश्विक सियासत, ताकत और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है.
कौन हैं रीना ओह और क्या है उनका आरोप?
रीना ओह, जो अब अपने 40 के दशक के अंत में हैं, ने न्यूयॉर्क में एक खास बातचीत में दावा किया कि वह 21 साल की उम्र में बदनाम फाइनेंसर Jeffrey Epstein के जाल में फंस गई थीं. उनके मुताबिक, एपस्टीन ने उन्हें बिना शर्त स्कॉलरशिप देने का वादा किया, लेकिन बाद में बार-बार मिलने के लिए बुलाया. जब उन्होंने इनकार किया तो ऑफर वापस ले लिया गया.
“मैं फंस गई थी”, डर और धमकी का वह पल
रीना ओह कहती हैं कि फ्लोरिडा की एक ट्रिप के दौरान उन्हें एहसास हुआ कि “सब कुछ गलत हो रहा है.” एपस्टीन की एस्टेट में उन्होंने खुद को अलग-थलग और असुरक्षित महसूस किया. उनके पास न पैसे थे, न ट्रांसपोर्ट. उन्होंने दावा किया कि एपस्टीन ने उन्हें धमकी दी थी. अगर, मैंने किसी को कुछ बताया तो शारीरिक नुकसान पहुंचाया जाएगा.
सिर्फ फिजिकल नहीं, साइकोलॉजिकल कंट्रोल भी था?
ओह ने एपस्टीन को “गुस्सैल नार्सिसिस्ट” बताया. उनके मुताबिक, यह सिर्फ शारीरिक शोषण का मामला नहीं था, बल्कि मानसिक और भावनात्मक कंट्रोल भी था. उन्होंने कहा कि एपस्टीन “डॉमिनेशन” के जरिए कंट्रोल बनाए रखते थे और यह असर दशकों तक बना रह सकता है.
क्या पावरफुल नेटवर्क भी जांच के दायरे में आए?
रीना ओह का कहना है कि एपस्टीन फाइलों में जिन लोगों के नाम हैं, उनसे कसम खाकर पूछताछ होनी चाहिए. उन्होंने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का नाम लेते हुए कहा कि अगर किसी का नाम सामने आता है तो उसे गवाही देनी चाहिए. वह एंड्रयू माउंटबेटन विंडसर की गिरफ्तारी को “बस शुरुआत” मानती हैं. ओह का कहती हैं कि एपस्टीन फाइल्स की जवाबदेही तय होनी चाहिए.
2019 में पहचान उजागर करने का फैसला क्यों लिया?
साल 2019 में एपस्टीन की गिरफ्तारी के बाद रीना ओह ने अपनी पहचान सार्वजनिक की. उनका कहना है कि उन्होंने अन्य पीड़ितों की मदद के लिए अपनी प्राइवेसी और सुरक्षा “बलिदान” कर दी. उन्होंने यह भी कहा कि एक अन्य आरोप लगाने वाली की अनपब्लिश्ड मेमॉयर में उनके बारे में गलत दावे किए गए, जिसके खिलाफ उन्हें कानूनी कदम उठाना पड़ा.
एपस्टीन केस क्यों अब भी सुर्खियों में?
साल 2019 में गिरफ्तारी के बाद जेफरी एपस्टीन की मौत ने कई सवाल अनुत्तरित छोड़ दिए. उनके कथित नेटवर्क, फाइलों और हाई-प्रोफाइल नामों को लेकर अब भी जांच और बहस जारी है. रीना ओह जैसे सर्वाइवर की गवाही इस केस को फिर से वैश्विक बहस के केंद्र में ला रही है
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