नोबेल शांति पुरस्कार विजेता नरगिस मोहम्मदी को ईरान की एक अदालत ने छह साल की जेल की सजा सुनाई है. उनके वकील वकील मुस्तफा नीली ने समाचार एजेंसी एएफपी से बात करते हुए, ‘उसे अपराध करने के लिए साजिश रचने और इकट्ठा होने के आरोप में छह साल की जेल की सजा सुनाई गई है.’ उन्होंने आगे कहा कि उसे दो साल के लिए देश छोड़ने पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया है. मोहम्मदी को प्रचार गतिविधियों के मामले में एक साल छह महीने की अतिरिक्त सजा भी दी गई है. उन्हें पूर्वी प्रांत दक्षिण खोरासान के शहर खोसफ में दो साल के लिए निर्वासित करने की सजा दी गई है. 53 वर्षीय नरगिस मोहम्मदी पिछले करीब 25 सालों से मानवाधिकारों के लिए आवाज उठाती रही हैं. वह ईरान में मौत की सजा यानी फांसी के खिलाफ और महिलाओं पर लागू अनिवार्य ड्रेस कोड के विरोध में लगातार अभियान चलाती रही हैं. इसी वजह से उन्हें कई बार गिरफ्तार किया गया और जेल भेजा गया.
एक दशक से अधिक समय तक जेल
पिछले एक दशक में उन्होंने अपना अधिकांश समय जेल में ही बिताया है. वह 2015 से अपने जुड़वां बच्चों से भी नहीं मिल पाई हैं, जो फिलहाल पेरिस में रहते हैं. दिसंबर 2024 में उन्हें गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं के चलते तीन हफ्तों के लिए मेडिकल आधार पर रिहा किया गया था. उस समय उनके शरीर से ट्यूमर हटाने और हड्डी प्रत्यारोपण का इलाज हुआ था. जेल में रहने के बावजूद नरगिस मोहम्मदी चुप नहीं रहीं. उन्होंने जेल परिसर में विरोध प्रदर्शन किए और कई बार भूख हड़ताल भी की. उनके इस साहसिक संघर्ष के लिए उन्हें साल 2023 में नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया था. उस समय वह जेल में थीं, इसलिए उनके बच्चों ने उनकी ओर से यह पुरस्कार प्राप्त किया था. दिसंबर 2024 में, उनके वकील के मुताबिक, ‘ट्यूमर और बोन ग्राफ्ट हटाने के बाद उनकी शारीरिक हालत’ से जुड़े मेडिकल आधार पर उन्हें तीन हफ़्ते के लिए रिहा किया गया था. सलाखों के पीछे भी, नोबेल पुरस्कार विजेता चुप नहीं रहीं. उन्होंने जेल के आंगन से विरोध प्रदर्शन को मजबूत आवाज दी और भूख हड़ताल की. वे सरकार दी दमनकारी नीतियों के खिलाफ आवाज उठाईं.
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