महाराष्ट्र की सियासत में बीते दिनों एक नया अध्याय तो शुरू हुआ, लेकिन अपने साथ कई अनसुलझे सवाल छोड़ गया। मै नफीस जाफरी आपको यह बता दूं कि सुनेत्रा पवार ने उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली। अजित पवार की विरासत को संभालने का ज़िम्मा उठाया। लेकिन इस
समारोह में उस एक चेहरे की कमी चर्चा बनी ,जो अजित पवार की अंतिम विदाई की घड़ी में आँसुओं को थामे हुए सुनेत्रा पवार के साथ साये की तरह उन्हें संभालती दिखीं, वो चेहरा थीं सुप्रिया सुले। अजित पवार के अंतिम संस्कार के वक्त की वो तस्वीरें कोई नहीं भूला है, जब सुप्रिया सुले अपनी भाभी सुनेत्रा पवार को हिम्मत देती नजर आई थीं। तब लगा था कि पवार परिवार का दुख शायद राजनीति की दीवारें गिरा
देगा। लेकिन सुनेत्रा के शपथ ग्रहण से सुप्रिया की दूरी ने साफ कर दिया कि इमोशन और इलेक्शन दो अलग पटरी पर हैं। क्या सुप्रिया की ये दूरी शरद पवार की उस नाराजगी का संकेत है जो विलय की चर्चा को ठंडे बस्ते में डालती दिख रही है? वैसे कहा जाए तो गलत नहीं होगा कि एनसीपी के विलय की कहानी अभी सस्पेंस में है। शरद पवार और उनके नेता जयंत पाटिल ने खुद पुष्टि की है कि विलय की बातचीत पिछले
4 से 6 महीनों से चल रही थी। आगामी 12 फरवरी 2026 को विलय की आधिकारिक घोषणा होनी थी। दोनों गुट आगामी स्थानीय निकाय चुनाव साथ मिलकर घड़ी चुनाव चिन्ह पर लड़ने के लिए तैयार थे, लेकिन अजित पवार की मृत्यु ने इस पूरी प्रक्रिया को फिलहाल अधर में लटका दिया है। यही कारण है कि शरद पवार ने कहा कि विलय की प्रक्रिया अब अनिश्चित है! वहीं बात अब स्वगीर्य अजित पवार के सदस्यों की तो जैसा कि उल्लेखनीय है कि स्वर्गीय अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार उनकी जगह पर महाराष्ट्र की भाजपा के नेतृत्व वाली महायुति
सरकार में उप मुख्यमंत्री बन गई है। तो वहीं दूसरी ओर राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि अजित पवार के बेटे जय पवार को राज्यसभा में भेजा सकता है। सूत्रों का कहना है कि भाजपा पार्थ पवार के पक्ष में नहीं है। जय पवार के नाम पर सहमति है। लेकिन पार्थ पवार पर
सहमति नहीं है। मालूम हो कि अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार ने राज्य की उप मुख्यमंत्री बनने से पहले राज्य सभा से अपना इस्तीफा दे दिया दिया था। पार्थ पवार पर पहले ही आरोप है इसलिए भाजपा इसका विरोध कर रही है। इससे पहले अजित पवार के निधन के
बाद पार्थ को मां सुनेत्रा पवार के स्थान पर राज्यसभा भेजने की बात कही जा रही थी। लेकिन पार्थ पवार पर एक जमीन घोटाले के आरोप होने से भाजपा इसका विरोध कर रही है। विदित हो कि पुणे के पॉश मुंधवा इलाके में 300 करोड़ रुपये में 40 एकड़ जमीन की बिक्री के सौदे ने राजनीतिक हलचल मचा दी है। यह जमीन अमाडिया एंटरप्राइजेज नामक कंपनी को बेची गई थी, जिसमें उपमुख्यमंत्री अजित पवार के बेटे पार्थ पवार भागीदार हैं। विवाद इसलिए भी बढ़ गया है, क्योंकि यह जमीन सरकारी बताई जा रही है और इस सौदे में आवश्यक स्टांप ड्यूटी भी माफ कर दी गई थी। इसके अलावा, विपक्षी दलों का आरोप है कि संबंधित जमीन की वास्तविक कीमत करीब 1,800 करोड़ रुपये थी। कहा गया कि जब अजित पवार उप मुख्यमंत्री थे तो उनके बेटे पार्थ पवार को 1800 करोड़ की सरकारी जमीन 300 करोड़ में दे दी गई थी। जहां तक पार्थ पवार का सवाल है तो पार्थ पवार इससे पहले 2019 लोकसभा चुनाव में मावलं सीट से मैदान में उतरे थे, हालांकि उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। इसके बावजूद पार्टी के भीतर उनकी सक्रियता और पारिवारिक राजनीतिक पहचान को देखते हुए उन्हें राज्यसभा भेजकर बड़ा मंच देने की चर्चाएं लंबे समय से चल रही थीं। अब सुनेत्रा के सक्रिय राजनीति में आने के बाद ये अटकलें और तेज हो गई हैं। लेकिन भाजपा उनके नाम पर तैयार नहीं है।

News Wani