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जैश-ए-मोहम्मद ने बदलती अपनी रणनीति

पाकिस्तान समर्थित आंतक संगठन अपनी दहशत फैलाने के लिए अपनी रणनीति में किस हद तक बदलाव कर रहे हैं, उससे संबंधित एक रिपोर्ट सामने आई है। जो निश्चित रूप से भारत के लिए चिंता की बात है। मैं नफीस जाफरी आपको यह बता दूं कि पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (जेईएम) औरलश्कर-ए-तैबा (एलईटी) कट्टरपंथी
विचारधाराओं का प्रसार करने के लिए महिला नेटवर्क के माध्यम से अपना प्रभाव बढ़ा रहे हैं। ये संगठन अब महिला आत्मघाती हमलावरों को  प्रशिक्षित और तैनात कर रहे हैं। ये आईएसआईएस, बोको हराम, हमास और एलटीटीई जैसे संगठनों जैसा मॉडल बना रहे हैं, जो पहले से ही युद्धक भूमिकाओं में महिलाओं का उपयोग करते हैं।खुफिया रिपोर्टों से संकेत मिलता है कि लश्कर जैश की राह पर चलते हुए, एक इस्लामी शिक्षण संस्थान की आड़ में, अपने महिला विंग का विस्तार कर रहा है। जमात-उल-मुमिनात जैश का पहला महिला विंग है, जिसकी स्थापना पिछले साल अक्टूबर में हुई थी। अब लश्कर का महिला विंग तैयबत तेजी से लोकप्रियता हासिल कर रहा है। जैश का गिरोह धर्म के नाम पर महिलाओं को लुभाने और उन्हें अपने आतंकी गतिविधियों में इस्तेमाल करने की कोशिश करता है। जैश-ए-मोहम्मद के इस गिरोह के एक सर्कुलर में मक्का और मदीना की तस्वीरें हैं और इसमें भावनात्मक सामग्री का इस्तेमाल किया गया है, जिसका लक्ष्य शिक्षित और शहरी मुस्लिम महिलाएं हैं। गौरतलब है कि तैयबत की इ़फ़त सईद के नेतृत्व में 9 फरवरी को लाहौर में आयोजित एक सभा में जिहाद का महिमामंडन और गैर-मुस्लिम विरोधी बयानबाजी देखने को मिली, जो चरमपंथ को बढ़ावा देने के लिए आतंकवादी संगठनों के प्रयासों का उदाहरण है। इस कार्यक्रम में लश्कर के कई कमांडरों की पत्नियां भी शामिल हुईं थी। एक वरिष्ठ सुरक्षा बल अधिकारी ने कहा, कहावत है कि महिलाओं को शिक्षित करने से पूरा समुदाय शिक्षित होता है। इसी तरह, महिलाओं के मन में कट्टरपंथी विचार भरकर चरमपंथ के बीज बोए जाते हैं। यही कारण है कि आतंकी संगठन महिला नेटवर्क में निवेश कर रहे हैं। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा, महिलाओं की भागीदारी एक स्थायी वैचारिक विरासत सुनिश्चित करती है, जिससे चरमपंथ को पकड़ना और भी मुश्किल हो जाता है। हाल ही में, संयुक्त राष्ट्र की निगरानी रिपोर्ट ने जैश-ए-मोहम्मद की बदलती रणनीति पर प्रकाश डाला है, जिसमें जमात-उल-मुमिनात के माध्यम से महिलाओं की भागीदारी को संस्थागत रूप दिया जा रहा है, जिसका उद्देश्य आतंकवादीअभियानों को समर्थन देना है। महिला आतंकवादियों का काम रसद संबंधी सहायता प्रदान करना, सामुदायिक संपर्क स्थापित करना, विचारधारा का प्रसार करना और भर्ती करना है। यह लश्कर और जैश के लिए एक रणनीतिक बदलाव है, जो ऐतिहासिक रूप से पुरुष आतंकवादियों पर निर्भर रहे हैं। पाकिस्तान में इन समूहों की खुली
गतिविधियां आतंकवाद विरोधी प्रयासों को गंभीर रूप से कमजोर करती हैं। सुरक्षा विश्लेषक कैप्टन अनिल गौर (सेवानिवृत्त) बताते हैं, कट्टरपंथी विचारधाराओं के प्रचार में महिलाओं की भागीदारी एक जटिलता पैदा करती है, जिससे इनका पता लगाना और इन्हें रोकना और भी मुश्किल हो जाता है। जेएम (श्रमड) भारत में कई हाई-प्रोफाइल हमलों से जुड़ा हुआ है, जिनमें 2001 का संसद हमला और 2019 का पुलवामा आत्मघाती बम हमला शामिल हैं। वहीं, लश्कर ने पहलगाम आतंकी हमले और मुंबई के 26/11 हमले को अंजाम दिया था।

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