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“निगला जा रहा फतेहपुर का कुंड तालाब’”

–  नक्शों में झील, जमीन पर प्लॉटिंग की कहानी
नफीस जाफरी,
फतेहपुर। शहर के बीचों-बीच स्थित ऐतिहासिक कुंड तालाब को लेकर बड़ा खुलासा सामने आया है। वर्ष 2010 के सरकारी नक्शे और वर्ष 2025 की वर्तमान स्थिति का तुलनात्मक अध्ययन साफ दिखाता है कि इस विशाल जलाशय पर सुनियोजित तरीके से अतिक्रमण किया गया है। स्थानीय बुजुर्ग बताते हैं कि कभी यह कुंड तालाब किसी झील से कम नहीं था। दूर-दराज़ से लोग यहां पंछी देखने आते थे, विदेशी पक्षियों की चहचहाहट से शहर की रौनक बढ़ती थी और तालाब मछलियों से भरा रहता था, जहां शौकीन लोग मछली पकड़ने पहुंचते थे। आज वही तालाब सिमटता जा रहा है और अपनी पहचान खोता नजर आ रहा है।

पुराने अभिलेखों के अनुसार वर्ष 2010 तक यह पूरा क्षेत्र तालाब के रूप में दर्ज था और शहर की जल निकासी का प्रमुख आधार भी यही था। लेकिन वर्ष 2025 तक आते-आते स्थिति पूरी तरह बदल गई। तालाब का बड़ा हिस्सा पाट दिया गया, जमीन को भरकर प्लॉटिंग कर बेचा गया और कई स्थानों पर मकान व नामी-गिरामी स्कूल तक खड़े हो गए।
यदि वर्ष 1985 के नक्शों को देखा जाए, तो इस पूरे मामले में और भी बड़े खुलासे सामने आ सकते हैं। 2010 से 2025 के बीच हुए बदलाव को देखते हुए यह अनुमान लगाया जा रहा है कि 1985 में तालाब का स्वरूप और भी अधिक विस्तृत रहा होगा।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि एक ओर लगातार तालाब की पुराई (पाटने का कार्य) 2026 तक जारी है, खासतौर पर पश्चिम दिशा में बड़े पैमाने पर तालाब पाटकर जमीन तैयार की गई, जबकि दूसरी ओर पूर्व दिशा में नाप-जोख के दौरान तालाब दर्शाया जा रहा है। लोगों का कहना है कि जहां वास्तविक तालाब था, वहीं सबसे अधिक कब्जा हुआ है।
मोहल्ला महाजरी और सैय्यदवाड़ा को लेकर भी विवाद गहराता जा रहा है। आरोप है कि इन क्षेत्रों की पुरानी आबादी की ओर तालाब दिखाया जा रहा है, जबकि यहां लोग 100 वर्षों से अधिक समय से निवास कर रहे हैं। साथ ही इन मोहल्लों में स्थित दरगाहें सैकड़ों वर्ष पुरानी बताई जाती हैं, जो इस क्षेत्र के लंबे समय से आबाद होने के प्रमाण मानी जा रही हैं। इसके बावजूद असली तालाब वाले हिस्से को प्लॉटिंग कर बेच दिया गया और उस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही।
मौजूदा गूगल मैप के आधार पर जो तस्वीर सामने आ रही है, वह पूरी सच्चाई नहीं दिखा पा रही है। जानकारों का मानना है कि पुराने राजस्व अभिलेख, विशेष रूप से 1985 और 2010 के नक्शे, ही इस पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट कर सकते हैं।

सूत्रों के अनुसार न्यूज़ वाणी इस पूरे मामले में जल्द ही बड़े खुलासे करने की तैयारी में है। बताया जा रहा है कि कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और नाम सामने आ सकते हैं, जिससे पूरे प्रकरण में हड़कंप मच सकता है। कुंड तालाब का समाप्त होना केवल जमीन का विवाद नहीं, बल्कि शहर के भूजल स्तर, जलभराव और पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा बनता जा रहा है। यदि समय रहते इस पर ठोस कार्रवाई नहीं की गई, तो इसके दूरगामी परिणाम सामने आ सकते हैं। यदि आप चाहते हैं कि आपके शहर की प्राकृतिक धरोहर सुरक्षित रहे, तो न्यूज़ वाणी को फॉलो करें और इस खबर को अधिक से अधिक साझा करें।

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