नई दिल्ली: सोशल मीडिया पर वायरल एक अपुष्ट वीडियो को बिना ठोस सत्यापन प्रसारित करने के मामले में न्यूज़ ब्रॉडकास्टर्स एंड डिजिटल स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी (NBDSA) ने एक राष्ट्रीय समाचार चैनल पर 1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। अथॉरिटी ने अपने आदेश में इसे प्रसारण मानकों और सटीकता के सिद्धांत के विरुद्ध गंभीर लापरवाही बताया।
विवाद उस वीडियो से जुड़ा है, जिसमें जम्मू-कश्मीर क्षेत्र में एक ट्रक चालक वाहन की छत पर नमाज़ अदा करता दिखाई दिया। प्रसारण के दौरान यह धारणा प्रस्तुत की गई कि चालक ने हाईवे के बीच ट्रक रोककर यातायात बाधित किया। बाद में स्वतंत्र तथ्य-जांच और अधिक स्पष्ट दृश्य सामने आने पर संकेत मिले कि संबंधित वाहन पहले से लगे जाम का हिस्सा था, न कि जाम का कारण।
NBDSA के अध्यक्ष एवं सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस ए.के. सीकरी ने स्पष्ट किया कि सोशल मीडिया से प्राप्त सामग्री का उपयोग करते समय प्रसारकों पर अनिवार्य तथ्य-जांच और विश्वसनीय स्रोतों से पुष्टि की जिम्मेदारी है। केवल यह डिस्क्लेमर देना कि “वीडियो की पुष्टि नहीं हो सकी” पर्याप्त नहीं माना जा सकता। अथॉरिटी ने आदेश में कहा कि अपुष्ट या संदर्भ से हटाई गई सामग्री का प्रसारण दर्शकों को गुमराह कर सकता है और पत्रकारिता की विश्वसनीयता को प्रभावित करता है। चैनल द्वारा विवादित वीडियो हटाने को ध्यान में रखते हुए सीमित दंड लगाया गया, जबकि उल्लंघन की प्रकृति को देखते हुए कड़ा दंड भी संभव था।
NBDSA ने सोशल मीडिया आधारित खबरों के प्रसारण के लिए कड़े दिशानिर्देश दोहराते हुए सटीकता, संदर्भ की शुद्धता, और संभावित छेड़छाड़ या एआई जनित सामग्री की जांच पर विशेष बल दिया है। यह निर्णय मीडिया संस्थानों के लिए स्पष्ट संदेश है कि संवेदनशील विषयों में अतिरिक्त सावधानी और सत्यापन अनिवार्य है।
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