रोम: कैथोलिक चर्च के प्रमुख पोप लियो XIV के फेफड़े में ट्यूमर मिलने के बाद सर्जरी किए जाने की खबर सामने आई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, रोम के एक अस्पताल में करीब 90 मिनट तक चले ऑपरेशन के दौरान उनके दाएं फेफड़े के निचले हिस्से को निकाला गया। जांच में ट्यूमर में कैंसर की पुष्टि होने की बात कही गई है।
बताया गया है कि सर्जरी सफल रही और ऑपरेशन के बाद पोप को होश आ गया था। उनके स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए 20 अक्टूबर तक के सार्वजनिक कार्यक्रम रद्द कर दिए गए हैं। डॉक्टर उनकी स्थिति पर नजर रख रहे हैं और यह पता लगाने के लिए जांच कर रहे हैं कि कैंसर शरीर के अन्य हिस्सों तक तो नहीं फैला है।
नियमित जांच के दौरान सामने आई बीमारी
रिपोर्ट के मुताबिक, 71 वर्षीय पोप लियो के फेफड़े में एक गांठ का पता चला था। शुरुआती जांच के बाद डॉक्टरों ने इसे निकालने के लिए सर्जरी की सलाह दी। ऑपरेशन के दौरान निकाले गए ऊतक की जांच में कैंसर की पुष्टि होने की जानकारी दी गई है।
फेफड़ों में बनने वाली गांठों को पल्मोनरी नोड्यूल कहा जाता है। ऐसी सभी गांठें कैंसरग्रस्त नहीं होतीं, इसलिए उनकी प्रकृति का पता लगाने के लिए चिकित्सकीय जांच जरूरी होती है।
अस्पताल में डॉक्टरों की निगरानी में रहेंगे पोप
सर्जरी के बाद पोप लियो को आराम करने की सलाह दी गई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उन्हें लगभग एक सप्ताह तक अस्पताल में रखा जा सकता है। डॉक्टर आगे की जांच के आधार पर उनके उपचार और स्वास्थ्य में सुधार का आकलन करेंगे।
पोप के अस्पताल पहुंचने की खबर के बाद वहां लोगों की भीड़ जुटने और उनके स्वास्थ्य के लिए प्रार्थना किए जाने की जानकारी भी सामने आई है।
कौन हैं पोप लियो XIV?
पोप लियो XIV का मूल नाम रॉबर्ट फ्रांसिस प्रेवोस्ट है। उनका जन्म 14 सितंबर 1955 को अमेरिका के शिकागो में हुआ था। उन्हें 8 मई 2025 को कैथोलिक चर्च का 267वां पोप चुना गया था। वे अमेरिका में जन्मे पहले पोप हैं।
पोप कैथोलिक ईसाई समुदाय के सर्वोच्च धार्मिक प्रमुख होते हैं। वे दुनिया भर के कैथोलिक चर्चों का आध्यात्मिक मार्गदर्शन करते हैं और धार्मिक शिक्षाओं, नैतिक मूल्यों तथा वैश्विक शांति जैसे विषयों पर अपनी बात रखते हैं।
गुप्त मतदान से चुना जाता है पोप
नए पोप का चुनाव वेटिकन में कॉन्क्लेव नामक प्रक्रिया के तहत किया जाता है। इसमें 80 वर्ष से कम आयु के पात्र कार्डिनल गुप्त मतदान करते हैं। नए पोप के चयन के लिए दो-तिहाई बहुमत जरूरी होता है।
चुनाव पूरा होने पर सिस्टीन चैपल की चिमनी से सफेद धुआं निकलता है, जो नए पोप के चुने जाने का संकेत होता है। यदि मतदान में सहमति नहीं बनती, तो काला धुआं छोड़ा जाता है।
फिलहाल पोप लियो XIV के स्वास्थ्य को लेकर आगे की चिकित्सकीय जांच और उनके ठीक होने की प्रक्रिया पर ध्यान दिया जा रहा है।
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