संसद के मौजूदा बजट सत्र में इन दिनों विपक्ष का जोरदार हंगामा देखने को मिल रहा है। मै नफीस जाफरी आपको यह बता दूं कि विगत बुधवार को लोकसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का अभिभाषण होना था, लेकिन विपक्ष के हंगामे के चलते नहीं हो सका और सदन को स्थगित करना पड़ा। इस घटना को लेकर अब स्पीकर ओम बिरला ने लोकसभा में अहम बयान दिया है। उन्होंने बतया कि ऐसा क्यों हुआ। स्पीकर ने कहा कि हंगामा के दौरान अप्रत्याशित घटना हो सकती थी। यह संसद की गरिमा के खिलाफ था। स्पीकर ओम बिरला ने कहा कि विपक्ष के सांसद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आसन के पास अप्रत्याशित घटना कर सकते थे। ओम बिरला ने कहा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मैंने
सदन में नहीं आने को कहा था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मेरे आग्रह को माना। मैं प्रधानमंत्री का धन्यवाद करता हूं कि उन्होंने मेरे आग्रह को स्वीकार किया। वहीं दूसरी ओर विगत गुरुवार को चौथे दिन भी दोनों सदनों में शब्द संग्राम चला। लोकसभा में विपक्षी सदस्यों के हंगामे के बीच राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण के बिना ध्वनिमत से पारित करना पड़ा। दरअसल वार-पलटवार के बीच सत्ता पक्ष और विपक्ष, दोनों खेमों में दांवपेच भी चल रहा है। सदन में कैसे जीत-हार की रणनीति बन रही थी। लोकसभा में गुरुवार को धन्यवाद प्रस्ताव पर पीएम नरेंद्र मोदी को बोलना था। बताया जाता है कि वह उपलब्ध भी थे। लेकिन सत्ता पक्ष की तरफ से आखिरी समय में ध्वनिमत से प्रस्ताव पारित करने की रणनीति बनी। सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस ने लोकसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए खास रणनीति बनाई थी। यह फैसला किया गया था कि लोकसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बोलने नहीं दिया जाएगा। विपक्ष के सांसदों के सीधे निशाने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रहेंगे। विपक्ष का तर्क था कि जब बहस ही नहीं हुई है तो फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी जवाब देने का हक नहीं है। दरअसल यह एक तरह से नेता विपक्ष राहुल गांधी के भाषण पर हंगामे पर जवाबी रणनीति थी। कहा जा रहा है कि खरगे की बैठक में यह तय हुआ है कि विपक्ष एकजुट हो कर प्रधानमंत्री को लोकसभा में तो बोलने नहीं देगा। राज्यसभा की तुलना में लोकसभा में विपक्ष के पास संख्या बल ज्यादा है। ऐसे में अगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी धन्यवाद प्रस्ताव पर बोलते तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण में व्यवधान आता। सरकार ने भी विपक्ष का प्लान भांपकर प्लान बी बनाया। इसके तहत लोकसभा में प्रस्ताव ध्वनिमत से पारित हुआ और रणनीति बनी की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ऊपरी सदन में पांच बजे जवाब देंगे। राज्यसभा में सत्तापक्ष मजबूत है. ऐसे में विपक्ष के पास हावी होने का मौका कम है। पहले भी कुछ मौकों पर विपक्ष को वॉकआउट कर अपना विरोध जताना पड़ा है।

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