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मणिपुर में नई सरकार के गठन की आहट

मणिपुर में हिंसा के बाद एक साल से चल रहा राष्ट्रपति शासन अब खत्म होने जा रहा है। मैं नफीस जाफरी आपको यह बता दूं कि पिछले साल फरवरी में तत्कालीन मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह के इस्तीफे के बाद हिंसाग्रस्त मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लगाया गया था। अब मणिपुर में नई सरकार बनने जा रही है। युमनाम खेमचंद सिंह मणिपुर के अगले मुख्यमंत्री होंगे। इसी क्रम में बीते दिनों युमनाम खेमचंद सिंह को विधायक दल का नेता चुना गया है। युमनाम खेमचंद सिंह एन बीरेन सिंह की सरकार में मंत्री भी थे। वो 2017 और 2022 में मणिपुर के सिंगजामेई सीट से विधायक बने थे। बता दें कि युमनाम खेमचंद सिंह मणिपुर विधानसभा के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। युमनाम खेमचंद सिंह की गिनती मणिपुर के एक अनुभवी और कद्दावर नेता के रूप में होती है। एन बीरेन सिंह की सरकार में उनके पास ग्रामीण विकास और पंचायती राज जैसे महत्वपूर्ण विभाग की जिम्मेदारी थी. विधानसभा स्पीकर के रूप में उनके निष्पक्ष कार्यशैली की चर्चा रही है। वहीं दूसरी ओर भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व के बुलाने पर भाजपा और सहयोगी दलों के सभी विधायक दिल्ली में डेरा डाले हुए हैं। सूत्रों के जल्दी ही उनकी मुलाकात पार्टी के शीर्ष नेताओं से होगी। इनमें गृह मंत्री अमित शाह भी शामिल हैं। कहा जा रहा है कि इसके बाद राज्य के राज्यपाल से मिल कर सरकार बनाने का दावा पेश किया जा सकता है। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और मुख्यालय प्रभारी के अनुसार भाजपा संसदीय बोर्ड ने पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ को मणिपुर में विधायक दल के नेता के चुनाव के लिए केंद्रीय पर्यवेक्षक नियुक्त किया है। हालांकि, भाजपा ने अभी तक यह खुलासा नहीं किया है कि विधायक दल की बैठक कब होगी। भाजपा के वरिष्ठ केंद्रीय नेता जल्द ही नई दिल्ली में मणिपुर के अपने और एनडीए सहयोगी दलों के विधायकों के साथ राज्य से जुड़े प्रमुख मुद्दों पर चर्चा करने के लिए एक महत्वपूर्ण बैठक कर सकते हैं। पार्टी सूत्रों के अनुसार, जैसा कि उल्लेखनीय है कि भाजपा और उसके सहयोगी दलों के बड़ी संख्या में विधायक पहले ही नई दिल्ली पहुंच चुके हैं। मणिपुर के पूर्व मुख्यमंत्री बीरेन सिंह और मणिपुर भाजपा अध्यक्ष अधिकारीमयूम शारदा देवी भी विधायकों के साथ हैं। गौरतलब है कि पिछले साल फ़रवरी में मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह के इस्तीफ़े के बाद राज्य में राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया था। पिछले साल अगस्त में इसे छह महीने के लिए और बढ़ा दिया गया था। यह अवधि बारह फ़रवरी को ख़त्म हो रही है। इसीलिए कोशिश है कि इससे पहले सरकार का गठन हो जाए। राज्य में कानून व्यवस्था की स्थिति में सुधार के बाद अब सरकार गठन की संभावना तेज हो गई है।

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