पाकिस्तान के पेशावर शहर में एक निजी स्कूल की छत गिरने से बड़ा हादसा हो गया। इस दुर्घटना में कई बच्चों और एक महिला शिक्षिका की मौत की खबर सामने आई है, जबकि 40 से अधिक लोगों के घायल होने की जानकारी दी गई है। हादसे के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई और बच्चों के परिजन स्कूल की ओर दौड़ पड़े।
मलबे में दबे बच्चों को निकालने में जुटी बचाव टीमें
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, हादसा पेशावर के डिर कॉलोनी इलाके में हुआ। स्कूल की छत गिरने के बाद कई बच्चे मलबे के नीचे दब गए। सूचना मिलते ही बचाव दल और एंबुलेंस मौके पर पहुंचीं। राहतकर्मियों ने मलबे में फंसे बच्चों को बाहर निकालने और घायलों को अस्पताल पहुंचाने का अभियान शुरू किया।
अस्पताल में घायलों का इलाज जारी
घायलों को पेशावर के लेडी रीडिंग अस्पताल में भर्ती कराया गया। अस्पताल में आपातकालीन व्यवस्था की गई, ताकि पीड़ितों को तत्काल चिकित्सा सहायता मिल सके। कुछ घायलों की हालत गंभीर होने की भी जानकारी सामने आई है।
हादसे की वजह का पता लगाने की कोशिश
स्कूल की छत किस कारण से गिरी, इसकी आधिकारिक वजह अभी स्पष्ट नहीं हुई है। संबंधित अधिकारियों की ओर से घटना की परिस्थितियों की जांच किए जाने की जरूरत है। बचाव अभियान के दौरान मलबे में अन्य लोगों के फंसे होने की आशंका भी जताई गई।
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने जताया दुख, तेज राहत अभियान के निर्देश
पेशावर में स्कूल की छत गिरने की घटना के बाद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने हादसे में हुई मौतों पर गहरा दुख जताया। उन्होंने घायलों को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने और राहत एवं बचाव अभियान में तेजी लाने के निर्देश दिए। <Cite refs={[“turn197812search4”]}/>
प्रांतीय सरकार ने मांगी घटना की रिपोर्ट
हादसे के बाद खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के अधिकारियों ने भी घटना पर संज्ञान लिया। प्रांतीय शिक्षा विभाग की ओर से निजी स्कूलों की इमारतों की सुरक्षा व्यवस्था की जांच करने और असुरक्षित भवनों के खिलाफ कार्रवाई की जरूरत पर जोर दिया गया। अधिकारियों से घटना की विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई।
स्कूल की इमारत की मजबूती पर उठे सवाल
इस हादसे ने पाकिस्तान में स्कूल भवनों की सुरक्षा और निर्माण गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय पुलिस प्रमुख के मुताबिक, शुरुआती जांच में इमारत के कमजोर होने की बात सामने आई है। स्कूल संचालक को हिरासत में लिए जाने की भी खबर है। हालांकि, छत गिरने के वास्तविक कारण का पता विस्तृत जांच के बाद ही चल सकेगा।
पाकिस्तान में पहले भी हो चुके हैं ऐसे हादसे
पाकिस्तान में इससे पहले भी स्कूलों और अन्य इमारतों के छत या दीवार गिरने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। जून 2026 में लाहौर के एक ट्यूशन सेंटर की छत गिरने से बच्चों की मौत हुई थी। इसी तरह डेरा गाजी खान में एक निजी स्कूल की कक्षा की छत गिरने से भी बच्चों की जान गई थी। लगातार हो रही ऐसी घटनाओं ने निर्माण मानकों और भवनों के नियमित निरीक्षण की आवश्यकता को उजागर किया है।
बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता
स्कूल में पढ़ने वाले बच्चे और वहां कार्यरत शिक्षक सुरक्षित वातावरण के हकदार हैं। इस घटना के बाद स्कूल भवनों की संरचनात्मक जांच, निर्माण सामग्री की गुणवत्ता और आपातकालीन निकासी व्यवस्था जैसे मुद्दे फिर चर्चा में आ गए हैं। विशेषज्ञों और प्रशासन के लिए यह जरूरी है कि शैक्षणिक संस्थानों में सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित किया जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की दर्दनाक घटनाओं को रोका जा सके।
ताजा अपडेट: 15 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित रिपोर्टों में मृतकों की संख्या अलग-अलग बताई गई है। कुछ रिपोर्टों में 28 बच्चों और एक महिला शिक्षिका समेत 29 मौतों का उल्लेख है, जबकि अन्य रिपोर्टों में कम संख्या दी गई है। इसलिए अंतिम आंकड़े के लिए अस्पताल या प्रशासन की नवीनतम आधिकारिक पुष्टि को प्राथमिकता दें।
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