पंद्रह दिनों में सुरेश का क्रिकेट मैच होने वाला था। आज उसके ही टीम के कुछ लोगों ने साइकिल से उसके दाहिने पैर पर टक्कर मार दी थी, जिसके कारण उसके पैर में मोच आ गई और उसे काफी तेज़ दर्द भी सहना पड़ रहा था। वह अपने क्रिकेट मैच को लेकर बहुत परेशान और दुःखी था, पर उसका हौसला बढ़ाने वाले उसके पिताजी श्यामलाल और बड़ा भाई रमेशचंद्र थे, जो हर समय उसे प्रोत्साहित कर रहे थे।
वैसे तो सुरेश को रिहर्सल करने की कोई ज़रूरत नहीं थी, फिर भी वह ऊँचे स्तर का अभ्यास करना चाहता था। लेकिन तगड़ी मोच और धीरे-धीरे बढ़ रही सूजन के कारण वह चारपाई से उठ भी नहीं पा रहा था। मगर उसे यही चिंता बार-बार सता रही थी कि यदि वह क्रिकेट टीम में शामिल नहीं हुआ तो वह चैंपियन नहीं बन पाएगा।
दिन गुज़रे, उसने स्वयं में आत्मविश्वास पैदा किया व अपने दोस्त सुमित की सहायता से पहले धीरे-धीरे चलना शुरू किया। 10 दिनों तक नियमित रूप से उसने खूब क्रिकेट का अभ्यास किया और अंत में वह पूरी तरह से तैयार हो गया।
बस उसे इंतज़ार था मैच के दिन का, और आज वह घड़ी भी आ गई थी। आज सुरेश ने पूरे आत्मविश्वास और जोश के साथ क्रिकेट मैच खेला और स्वर्ण पदक विजेता बना। उसने सबसे पहले अपने माता-पिता को धन्यवाद दिया, जिनसे उसे प्रोत्साहन मिला, उसके बाद अपने दोस्त सुमित का शुक्रिया अदा किया, जिसकी वजह से उसे शारीरिक रूप से नियमित अभ्यास करने में सफलता मिली और वह मज़बूत होकर खेल सका और क्रिकेट चैंपियन बन सका।
कहानी की सीख : यह कहानी न केवल प्रेरक और सुंदर है, बल्कि प्रतियोगिता और पारिवारिक महत्व पर भी आधारित है।
दिनांक: 05/10/25
सुहेल अली ‘नायर’
कहानी लेखक
News Wani
