दस वर्षों में सिगरेट व तंबाकू मसालों का बढ़ा चलन • शाम ढलते ही चाय की होटलों पर उमड़ती भीड़ • भारी टैक्स और चेतावनियों का असर फीका
फतेहपुर / नफीस जाफ़री – न्यूज़ वाणी
जनपद में युवाओं के बीच नशे की बढ़ती प्रवृत्ति अब गंभीर सामाजिक और स्वास्थ्य संबंधी समस्या का रूप लेती जा रही है। बीते लगभग दस वर्षों में सिगरेट, गुटखा और तंबाकू मसालों की ओर युवाओं का झुकाव लगातार बढ़ा है। शहर से लेकर कस्बों तक, शाम होते ही चाय की होटलों, ढाबों और सार्वजनिक स्थानों पर नशा करने वालों की भीड़ आम दृश्य बन चुकी है। यह स्थिति न केवल परिवारों बल्कि समाज के जिम्मेदार वर्गों के लिए भी चिंता का विषय बनती जा रही है।
स्थानीय नागरिकों और अभिभावकों का कहना है कि नशे के प्रति आकर्षण कम होने के बजाय बढ़ता दिखाई दे रहा है। सरकार द्वारा तंबाकू उत्पादों पर लगाए गए भारी टैक्स, पैकेटों पर स्वास्थ्य चेतावनियां और जागरूकता अभियानों के बावजूद अपेक्षित प्रभाव नजर नहीं आ रहा। कई लोग मानते हैं कि उपलब्धता की आसान पहुंच और साथियों का प्रभाव युवाओं को इस ओर धकेल रहा है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, तंबाकू और निकोटीन का नियमित सेवन युवाओं में फेफड़ों, हृदय और मानसिक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर डाल सकता है। डॉक्टरों का कहना है कि कम उम्र में नशे की आदत भविष्य में गंभीर बीमारियों और लत की गहराई का कारण बन सकती है। इसके बावजूद, सार्वजनिक स्थलों पर खुलेआम तंबाकू सेवन और बिक्री पर नियंत्रण के प्रयास कमजोर दिखते हैं।
सामाजिक संगठनों और जागरूक नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि स्कूल-कॉलेजों के आसपास नशे से जुड़े उत्पादों की बिक्री पर सख्ती की जाए, नियमित जांच अभियान चलाए जाएं और प्रभावी जागरूकता कार्यक्रमों को बढ़ावा दिया जाए। साथ ही, अभिभावकों से भी अपील की जा रही है कि वे बच्चों की दिनचर्या, संगत और व्यवहार पर सतर्क निगाह रखें, ताकि समय रहते उन्हें नशे की आदत से बचाया जा सके।
समाज के विभिन्न वर्गों का मानना है कि यदि समय रहते ठोस और समन्वित कदम नहीं उठाए गए, तो यह प्रवृत्ति आने वाली पीढ़ी के स्वास्थ्य और सामाजिक ढांचे पर दीर्घकालिक दुष्प्रभाव छोड़ सकती है। न्यूज़ वाणी इस विषय पर जनजागरूकता और जिम्मेदार पहल की आवश्यकता को रेखांकित करता है।
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