अमेरिका के मिशिगन राज्य में सीनेट चुनाव के दौरान सोशल मीडिया पर राजनीतिक प्रचार को लेकर एक मामला सामने आया है। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में बैठे कुछ सोशल मीडिया अकाउंट संचालकों ने अमेरिकी उम्मीदवारों के समर्थन में वीडियो पोस्ट किए। इन पोस्ट के जरिए मतदाताओं की राय को प्रभावित करने की कोशिश किए जाने का आरोप है। वीडियो को इस तरह पेश किया गया, जैसे आम लोग अपनी इच्छा से किसी उम्मीदवार का समर्थन कर रहे हों, जबकि इन्हें सोशल मीडिया पर फैलाने के लिए भुगतान किया जा रहा था।
हर पोस्ट के लिए मिलते थे करीब 15 डॉलर
रिपोर्ट के अनुसार, मुंबई में रहने वाले आयुष जैन को अमेरिकी चुनाव से जुड़े वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट करने के लिए हर पोस्ट के करीब 15 डॉलर यानी लगभग 1,400 रुपये दिए गए। बताया गया कि उन्होंने अपने अलग-अलग सोशल मीडिया अकाउंट से करीब 40 पोस्ट प्रकाशित किए। इस काम के लिए कम से कम 30 दिनों तक वीडियो पोस्ट करने की शर्त रखी गई थी।
इन वीडियो में महंगाई, रोजगार और रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करते हुए डेमोक्रेटिक उम्मीदवार हेली स्टीवंस का समर्थन किया गया था। ये पोस्ट एक्स, फेसबुक, इंस्टाग्राम और थ्रेड्स जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा किए गए।
लाखों बार देखे गए राजनीतिक वीडियो
गलत सूचनाओं और संदिग्ध सोशल मीडिया गतिविधियों पर नजर रखने वाले शोधकर्ताओं के मुताबिक, इस अभियान से जुड़े कम से कम 28 अकाउंट की पहचान की गई। इन अकाउंट से साझा की गई पोस्ट को 70 लाख से अधिक बार देखा गया। कुछ रिपोर्टों में बताया गया कि वीडियो को अधिक लोगों तक पहुंचाने के लिए हर 1,000 व्यू पर एक से पांच डॉलर तक भुगतान किए जाने की व्यवस्था भी थी।
शोधकर्ताओं का कहना है कि इनमें से कई अकाउंट सामान्य दिनों में मनोरंजन और कार्टून से जुड़े वीडियो साझा करते थे, लेकिन चुनाव के दौरान अचानक राजनीतिक प्रचार करने लगे। इससे इन अकाउंट की गतिविधियों पर संदेह बढ़ा।
अमेरिकी कंपनी के जरिए मिला था काम
रिपोर्ट के अनुसार, पेंसिल्वेनिया स्थित लुमिना क्लिपर्स नाम की कंपनी ने आयुष जैन को काम पर रखा था। कंपनी पर सोशल मीडिया अकाउंट के माध्यम से पोस्ट की पहुंच बढ़ाने का काम करने का उल्लेख किया गया है। कंपनी से जुड़े राइस मैके ने मिशिगन में वीडियो फैलाने के अभियान में अपनी कंपनी की भूमिका स्वीकार की, लेकिन इसके पीछे किसने धन लगाया और कुल कितना खर्च हुआ, इस बारे में जानकारी देने से इनकार किया।
शोधकर्ताओं के मुताबिक, अभियान में शामिल कुछ अकाउंट पहले चीन से जुड़े संदिग्ध बॉट नेटवर्क की गतिविधियों में भी दिखाई दिए थे। हालांकि, इन अकाउंट के पुराने इस्तेमाल और मौजूदा अभियान के बीच संबंधों की पूरी तस्वीर स्पष्ट नहीं है।
उम्मीदवार के चुनाव अभियान से संबंध का प्रमाण नहीं
इस मामले में सबसे अहम बात यह है कि अभी तक ऐसा कोई प्रमाण सामने नहीं आया है, जिससे साबित हो कि हेली स्टीवंस के आधिकारिक चुनाव अभियान या उनके समर्थक संगठनों ने इन वीडियो को फैलाने के लिए भुगतान किया था। रिपोर्ट में यह संभावना जताई गई कि अभियान किसी ऐसे राजनीतिक समूह से जुड़ा हो सकता है, जो स्टीवंस को उनके प्रतिद्वंद्वी अब्दुल एल-सैयद के मुकाबले फायदा पहुंचाना चाहता था।
रिपोर्ट के अनुसार, 4 अगस्त को हुए डेमोक्रेटिक प्राइमरी चुनाव में अब्दुल एल-सैयद ने जीत दर्ज की। चुनाव के बाद भी कुछ संदिग्ध अकाउंट राजनीतिक सामग्री साझा करते रहे। इनमें कैलिफोर्निया के रिपब्लिकन गवर्नर पद के उम्मीदवार स्टीव हिल्टन के समर्थन वाली पोस्ट भी शामिल थीं।
यह मामला सोशल मीडिया पर राजनीतिक प्रचार की पारदर्शिता और ऑनलाइन प्रभाव अभियानों को लेकर सवाल खड़े करता है। विशेषज्ञों के लिए यह पता लगाना महत्वपूर्ण है कि ऐसे अभियानों को वित्तीय सहायता कौन देता है और दर्शकों को प्रायोजित सामग्री की जानकारी क्यों नहीं दी जाती।
नोट: यह खबर उपलब्ध रिपोर्ट में दिए गए दावों पर आधारित है। किसी उम्मीदवार या उसके आधिकारिक चुनाव अभियान की संलिप्तता साबित होने की जानकारी सामने नहीं आई है।
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