फतेहपुर, 15 सितम्बर। जनपद के किसानों को अब खाद के लिए सहकारी समितियों और निजी उर्वरक बिक्री केंद्रों पर लंबी लाइनों में लगने से राहत मिलने वाली है। भारत सरकार की गाइडलाइन के अनुरूप जल्द ही जिले में उर्वरकों का वितरण “फ्रेमवर्क फॉर फर्टिलाइजर सेल” (एफएफएस) ऐप के माध्यम से किया जाएगा। किसान मोबाइल से उर्वरक की बुकिंग कर क्यूआर कोड के जरिए खाद प्राप्त कर सकेंगे।
नई व्यवस्था को लागू करने की तैयारियों के तहत सोमवार को उप कृषि निदेशक फतेहपुर की अध्यक्षता में प्रशिक्षण आयोजित किया गया। इसमें सहकारी समितियों के सचिवों, निजी उर्वरक विक्रेताओं और कृषि विभाग के क्षेत्रीय कर्मचारियों ने प्रतिभाग किया।
जिला कृषि अधिकारी ने बताया कि उर्वरक बुकिंग के लिए किसानों को अपने स्मार्टफोन के प्ले स्टोर से संबंधित ऐप इंस्टॉल करना होगा। इसके बाद चार आसान चरणों में खाद की बुकिंग की जा सकेगी।
पहले चरण में किसान को फार्मर रजिस्ट्री अथवा आधार के माध्यम से लॉगिन कर अपनी कृषित भूमि और फसल से संबंधित विवरण दर्ज करना होगा। दूसरे चरण में खेत में बोई गई फसल के अनुसार सामान्य संस्तुति दर पर आवश्यक उर्वरक का चयन करना होगा।
तीसरे चरण में किसान के सामने उसकी कृषि भूमि के निकट स्थित सहकारी समितियां एवं उर्वरक विक्रय प्रतिष्ठान प्रदर्शित होंगे। किसान अपनी सुविधा के अनुसार इनमें से किसी एक केंद्र का चयन कर सकेगा। अंतिम चरण में उर्वरक प्राप्त करने के लिए क्यूआर कोड जनरेट होगा।
48 घंटे तक मान्य रहेगा QR कोड
किसान स्वयं बिक्री केंद्र पर जाकर अथवा अपने प्रतिनिधि को भेजकर भी उर्वरक प्राप्त कर सकेंगे। जनरेट किया गया क्यूआर कोड 48 घंटे तक मान्य रहेगा।
प्रशिक्षण में बताया गया कि भू-स्वामियों के साथ पट्टे, बटाई, किराए की भूमि अथवा सरकारी संस्था की भूमि पर खेती करने वाले किसान भी उर्वरक प्राप्तकर्ता का विवरण दर्ज कर इस व्यवस्था के माध्यम से खाद प्राप्त कर सकेंगे।
प्रशिक्षण के दौरान सहकारी समितियों के सचिवों, उर्वरक विक्रेताओं एवं कृषि विभाग के कर्मचारियों की एफएफएस प्रणाली से जुड़ी जिज्ञासाओं और तकनीकी समस्याओं का समाधान भी किया गया।
उप कृषि निदेशक ने कृषि विभाग के सभी क्षेत्रीय कर्मचारियों को निर्देश दिया कि वे अपने-अपने कार्यक्षेत्र के किसानों को नई व्यवस्था के माध्यम से उर्वरक बुक करने का प्रशिक्षण दें और आवश्यकता पड़ने पर उनका सहयोग करें। इसका उद्देश्य किसानों को उनकी आवश्यकता और जोत के अनुरूप पारदर्शी एवं सुगम तरीके से उर्वरक उपलब्ध कराना है।

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