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बंगाल की सियासत में नया मोड़: लेफ्ट-मुस्लिम गठबंधन की एंट्री, ममता को झटका, BJP की खुली राह

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी चालें चली जा रही हैं. साल 2011 में तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी के सत्ता में आने के बाद लेफ्ट पार्टियां पूरी तरह से हाशिये पर चली गई हैं, हालांकि लेफ्ट ने बंगाल में 34 सालों तक शासन किया था, लेकिन फिलहाल न तो लोकसभा में और न ही विधानसभा में लेफ्ट पार्टियों का कोई प्रतिनिधित्व है. अगले साल विधानसभा चुनाव के मद्देनजर लेफ्ट पार्टियां फिर से अपनी ताकत बढ़ाने की कोशिश कर रही हैं. अपने पुराने मुस्लिम वोट बैंक को वापस लाने की कवायद में जुट गई है.साल 2011 की जनगणना के अनुसार राज्य में मुस्लिमों की आबादी करीब 27 फीसदी है, हालांकि माना जा रहा है कि फिलहाल राज्य मेें मुस्लिमों की आबादी बढ़ कर 34 फीसदी हो गयी है और मुस्लिम आबादी पूरी तरह से  अब माकपा तृणमूल कांग्रेस की इसी वोट बैंक में घुसपैठ करने की कोशिश कर रही है. इसी के मद्देनजर माकपा ने मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद का शिलान्यास कर सुर्खियों में आए विधायक हुमायूं कबीर से गठबंधन के लिए बातचीत शुरू की है.

मुस्लिम वोट बैंक को एकजुट करने की कोशिश

वहीं, हुमायूं कबीर ने असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के साथ शुरू की है. बिहार विधानसभा चुनाव और महाराष्ट्र नगर निगम चुनाव में अच्छे प्रदर्शन के बाद एआईएमआईएम इस बार बंगाल विधानसभा चुनाव में भी उम्मीदवार उतारने का ऐलान किया है और इस बाबत एआईएमआईएम ने अपनी कोशिशें शुरू कर दी है.

इसके साथ ही आईएसएफ के मुस्लिम विधायक नौसाद सिद्दीकी के साथ भी लेफ्ट की बातचीत शुरू हुई है. इस तरह से चुनाव से पहले मुस्लिम पार्टियां एक साथ आने की कोशिश कर रही हैं और लेफ्ट इन पार्टियों के साथ गठबंधन की कोशिश कर रहा है. यदि यह कवायद सफल होती है तो मुस्लिम वोट विभाजित होंगे और अंततः इससे बीजेपी को फायदा होगा.

इन सभी के बीच तृणमूल कांग्रेस से सस्पेंडेड भरतपुर से विधायक हुमायूं कबीर और माकपा के राज्य सचिव मोहम्मद सलीम के बीच बुधवार को बैठक हुई. सूत्रों के मुताबिक, बैठक के दौरान गठबंधन की रणनीति और सीटों बंटवारे को लेकर हुई. मूलतः यह बैठक मुस्लिम बहुल जिला मुर्शिदाबाद को लेकर हुई है.

लेफ्ट और AIMIM से हुमायूं कबीर करेंगे गठबंधन

हुमायूं कबीर ने मुर्शिदाबाद की 22 सीटों में से 6 सीटें माकपा को देने की पेशकश की है. वह कांग्रेस आठ सीटें देने के पक्षधर हैं. हालांकि, सूत्रों के मुताबिक, हुमायूं की पार्टी जनता उन्नयन पार्टी मुर्शिदाबाद की बाकी 10 सीटों पर चुनाव लड़ना चाहती है. हुमायूं कबीर ने खुद मोहम्मद सलीम के साथ बैठक के बात स्वीकार करते हुए कहा कि यह बैठक सफल रही है. दोस्ताना माहौल में कई मुद्दों पर बातचीत हुई है.

 

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