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भोपाल AIIMS को बड़ा नुकसान: प्रोफेसर डॉ. रश्मि वर्मा का निधन, 24 दिन वेंटिलेटर पर रहने के बाद तोड़ा दम

भोपाल.  डॉ. रश्मि वर्मा की अकाल मृत्यु ने मेडिकल समुदाय को गहरा झकझोर दिया है. 5 जनवरी 2026 को सुबह करीब 11 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली, जब वे 24 दिनों से वेंटिलेटर पर जीवन और मृत्यु की जंग लड़ रही थीं. AIIMS में इमरजेंसी और ट्रॉमा विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. रश्मि की मौत केवल एक व्यक्तिगत त्रासदी नहीं, बल्कि मेडिकल संस्थानों में बढ़ते टॉक्सिक वर्क कल्चर, प्रशासनिक दबाव और मेंटल हेल्थ इग्नोरेंस की कड़वी हकीकत को सामने लाती है.
हाल ही में उन्हें उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री से बेस्ट एक्सीलेंस अवार्ड से नवाजा गया था. 11 दिसंबर 2025 को डॉ. रश्मि ने घर पर हाई-डोज एनेस्थीसिया का इंजेक्शन लेकर आत्महत्या का प्रयास किया था. उनके पति डॉ. मनमोहन शाक्य ने उन्हें तुरंत AIIMS पहुंचाया, लेकिन तब तक उनका दिल सात मिनट तक नहीं धड़क पाया था. डॉक्टरों ने सीपीआर द्वारा हार्टबीट लौटाई, लेकिन ऑक्सीजन की कमी के कारण ग्लोबल हाइपोक्सिया हुआ, जिससे रिकवरी की संभावना शून्‍य के जैसे हो गई थी. यह घटना AIIMS भोपाल के आंतरिक सिस्टम पर सवाल उठाती है, जहां नोटिस और हैरासमेंट ने एक प्रतिभाशाली डॉक्टर को मानसिक रूप से तोड़ दिया.
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने लिया एक्‍शन लेकिन
डॉ. रश्मि की मौत का मुख्य कारण अस्पताल में टॉक्सिक वर्क एनवायरनमेंट और विभागाध्यक्ष द्वारा लगातार हैरासमेंट माना जा रहा है. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने इस घटना के बाद तुरंत HOD को हटा दिया था और विभाग को दो हिस्सों में विभाजित कर दिया. हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि केवल प्रशासनिक कार्रवाई पर्याप्त नहीं है. मेडिकल संस्थानों में ऐसे मामले लगातार बढ़ रहे हैं, जहां डॉक्टर ओवरवर्क, दबाव और राजनीति से जूझते हैं.
गरीबों की मददगार डॉ. रश्मि MD जनरल मेडिसिन थीं
डॉ. रश्मि ने MBBS प्रयागराज के MLN मेडिकल कॉलेज से और MD (जनरल मेडिसिन) गोरखपुर के BRD मेडिकल कॉलेज से किया था. वे LN मेडिकल कॉलेज और PMS भोपाल में भी सेवाएं दे चुकी थीं. गरीब मरीजों की मदद और CPR ट्रेनिंग की नोडल अधिकारी के रूप में उनकी पहचान थी.
मेडिकल संस्थानों में मेंटल हेल्थ सपोर्ट की कमी
डॉ. रश्मि की मौत ने यह स्पष्ट कर दिया कि मेडिकल फील्ड में डॉक्टरों के लिए मेंटल हेल्थ सपोर्ट की व्यवस्था न के बराबर है. डॉक्टर खुद मरीज बन जाते हैं और उनकी समस्याओं को अनदेखा किया जाता है. सोशल मीडिया पर #JusticeForDrRashmi ट्रेंड कर रहा है, जहां सहकर्मी और स्टूडेंट्स टॉक्सिक कल्चर और प्रशासनिक दबाव के खिलाफ आवाज़ उठा रहे हैं.
डॉ. रश्मि वर्मा केस की टाइमलाइन:
11 दिसंबर 2025: ड्यूटी के बाद घर पर हाई-डोज एनेस्थीसिया इंजेक्ट, आत्महत्या प्रयास.
उसी दिन: पति द्वारा AIIMS पहुंचाया, हार्ट अरेस्ट, 7 मिनट तक दिल रुका.
12 दिसंबर: ICU में वेंटिलेटर पर, MRI से ब्रेन डैमेज कन्फर्म.
14 दिसंबर: AIIMS ने हाई-लेवल कमेटी गठित, HOD रिमूव.
5 जनवरी 2026: 24 दिन बाद मौत, शव परिवार को सौंपा.

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