न्यूज़ वाणी
लखनऊ : फिरकावाराना सद्भाव और एकजुटता का संदेश देते हुए लखनऊ में सुन्नी समुदाय के प्रमुख लोगों के एक प्रतिनिधिमंडल ने वरिष्ठ शिया धर्मगुरुओं से मुलाकात कर ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली हुसैनी खामनेई की शहादत पर गहरा शोक व्यक्त किया। इस दौरान दोनों समुदायों के नेताओं ने मुस्लिम उम्मा की एकता पर जोर देते हुए भाईचारे और आपसी सद्भाव बनाए रखने का आह्वान किया। प्रतिनिधिमंडल में रिटायर्ड आईएएस अनीस अंसारी, तारिक सिद्दीकी, अमीक जामेई, रेहान नईम, सैफ नकवी, मोहम्मद खालिद, मलिक फैसल (राज्य अध्यक्ष, जमात-ए-इस्लामी हिंद), वसीम हैदर, जावेद अहमद, आसिफुज जमान, अजीज हैदर और मेहदी शामिल थे। प्रतिनिधिमंडल ने मौलाना डॉ. सैयद कल्बे जव्वाद नकवी, मौलाना सैफ अब्बास नकवी, मौलाना यासूब अब्बास और मौलाना जहांगीर आलम कासमी से मुलाकात कर संवेदना व्यक्त की। प्रतिनिधिमंडल ने 28 फरवरी की घटनाओं को दुखद बताते हुए कहा कि हमलों में आयतुल्लाह खामनेई के साथ 47 अन्य सियासी एवं सैन्य नेताओं तथा सैकड़ों निर्दोष ईरानी नागरिकों और बच्चों की मौत हुई। उन्होंने कहा कि यह नुकसान केवल ईरान या शिया समुदाय का नहीं बल्कि इंसाफ और मानवता में विश्वास रखने वाले सभी लोगों के लिए बड़ी त्रासदी है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता अमीक जामेई ने कहा कि महात्मा गांधी ने भी फिलिस्तीनियों को मजलूम बताया था। उन्होंने अफसोस जताया कि भारत, जो लंबे समय तक अंतरराष्ट्रीय मामलों में गुटनिरपेक्ष नीति पर कायम रहा, अब कई मामलों में पक्ष लेने की स्थिति में दिखाई दे रहा है। रिटायर्ड आईएएस अनीस अंसारी ने कहा कि “हम यहां मेहमान के तौर पर नहीं बल्कि एक साझा गम में शामिल परिवार के रूप में खड़े हैं। आयतुल्लाह खामनेई दुनिया भर के मजलूमों की आवाज थे और फिलिस्तीन के मुद्दे पर उनका समर्थन हम सभी को एकजुट करता था।” इस पहल के संयोजक तारिक सिद्दीकी ने कहा कि ऐसे समय में मुस्लिम समाज की एकता बहुत जरूरी है। उन्होंने कहा कि निर्दोष नागरिकों पर हमले असल आतंकवाद हैं और मुसलमानों के बीच विभाजन केवल उन ताकतों को मजबूत करता है जो मुस्लिम दुनिया को कमजोर देखना चाहती हैं। मौलाना डॉ. कल्बे जव्वाद नकवी ने सुन्नी प्रतिनिधिमंडल का आभार जताते हुए कहा कि यह कदम सुन्नी-शिया भाईचारे की मजबूत मिसाल है। उन्होंने कहा कि आयतुल्लाह खामनेई हमेशा मुसलमानों के बीच एकता का संदेश देते रहे। मौलाना यासूब अब्बास ने बताया कि आयतुल्लाह खामनेई का चेहलुम (शहादत के 40वें दिन का कार्यक्रम) 1 अप्रैल को मनाया जाएगा और प्रतिनिधिमंडल को इसमें शामिल होने का निमंत्रण दिया। प्रतिनिधिमंडल ने सुन्नी धर्मगुरू मौलाना जहांगीर आलम कासमी से भी मुलाकात की। उन्होंने कहा कि वे हमेशा सुन्नी-शिया एकता के समर्थक रहे हैं और कुछ ताकतें इस भाईचारे को तोड़ने की कोशिश करती रहती हैं। प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि वे आगे भी लखनऊ में कई प्रमुख शिया और सुन्नी नेताओं से मुलाकात करेंगे, जिनमें मौलाना खालिद रशीद फिरंगीमहली, मौलाना मन्नान, मौलाना बिलाल हसनी और मौलाना इकबाल कादरी शामिल हैं। इस दौरान पश्चिम एशिया में जारी हिंसा के खिलाफ एकजुट आवाज उठाने और शांति की अपील की जाएगी। नेताओं ने कहा कि फिलिस्तीनी मुद्दे के न्यायपूर्ण समाधान की आवश्यकता है और सभी नागरिकों से मानवाधिकार तथा संप्रभुता के सिद्धांतों के समर्थन में खड़े होने का आह्वान किया गया। साथ ही लखनऊ की ऐतिहासिक तहजीब और भाईचारे की परंपरा को बनाए रखने की अपील भी की गई।
News Wani
