फ्रांस में बढ़ती महंगाई, ईंधन की कीमतों और सरकारी सेवाओं से जुड़ी समस्याओं को लेकर बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक, शनिवार को करीब 8 लाख लोग सड़कों पर उतरे। राजधानी पेरिस में राष्ट्रपति भवन के पास प्रदर्शन के दौरान हिंसा हुई, जबकि कई अन्य शहरों में आगजनी, तोड़फोड़ और दुकानों में लूटपाट की घटनाएं सामने आईं। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए करीब 1,200 लोगों को गिरफ्तार किया।
लिमोज में ऐतिहासिक टाउन हॉल में लगाई आग
फ्रांस के लिमोज शहर में नकाबपोश प्रदर्शनकारियों ने 1883 में बने ऐतिहासिक टाउन हॉल में आग लगा दी। आग से इमारत को भारी नुकसान पहुंचा। वहीं, लियोन और बोर्डो जैसे शहरों में भी आगजनी और दुकानों में लूटपाट की घटनाएं सामने आईं। कई जगहों पर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच टकराव हुआ। हालात पर नियंत्रण पाने के लिए सुरक्षा बलों ने कार्रवाई की।
वेतन, पेंशन और महंगाई कम करने की मांग
प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में वेतन और पेंशन में बढ़ोतरी, महंगाई पर नियंत्रण, सरकारी सेवाओं में सुधार और स्कूलों में शिक्षकों की कमी दूर करना शामिल है। प्रदर्शन की शुरुआत स्कूली छात्रों के विरोध से हुई थी, लेकिन बाद में विश्वविद्यालयों के छात्र, अभिभावक, शिक्षक और मजदूर संगठनों के सदस्य भी इससे जुड़ गए।
स्कूलों से शुरू हुआ विरोध देशभर में फैला
रिपोर्ट के अनुसार, 21 सितंबर को पेरिस के एक स्कूल के छात्रों ने शिक्षकों और शैक्षणिक संसाधनों की कमी को लेकर प्रदर्शन शुरू किया था। कुछ दिनों बाद प्रशासन ने अतिरिक्त स्टाफ भेजा, लेकिन तब तक दूसरे क्षेत्रों में भी विरोध शुरू हो चुका था। आंदोलन धीरे-धीरे व्यापक सामाजिक विरोध में बदल गया।
प्रदर्शनों के दौरान पुलिस की कार्रवाई को लेकर भी नाराजगी बढ़ी। रिपोर्ट में बताया गया है कि अक्टूबर की शुरुआत में लेंस शहर में पुलिस के ग्रेनेड से एक 15 वर्षीय लड़का गंभीर रूप से घायल हो गया था और उसका हाथ काटना पड़ा। इस घटना के बाद सुरक्षा बलों की कार्रवाई पर सवाल उठने लगे।
कई शहरों में दुकानों को बनाया गया निशाना
प्रदर्शन के दौरान कुछ समूहों ने दुकानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में तोड़फोड़ और लूटपाट की। रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 10 शहरों में सुपरमार्केट, दवा की दुकानों, कपड़ों के शोरूम और इलेक्ट्रॉनिक सामान बेचने वाली दुकानों को निशाना बनाया गया। कुछ घटनाओं में हमलावरों ने सुरक्षा कैमरों को निष्क्रिय करने के बाद दुकानों में प्रवेश किया।
इन घटनाओं के चलते कई इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी करनी पड़ी। पुलिस प्रदर्शन और हिंसा में शामिल लोगों की पहचान करने में जुटी रही।
राष्ट्रपति मैक्रों ने दी कानूनी कार्रवाई की चेतावनी
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने सरकारी कार्यालयों, कारोबारों और सार्वजनिक इमारतों पर हमले करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि तोड़फोड़ और लूटपाट में शामिल लोगों को कानून के तहत सजा का सामना करना पड़ेगा।
2018 के येलो वेस्ट आंदोलन से भी जुड़ रहा विरोध
फ्रांस में मौजूदा विरोध को 2018 के येलो वेस्ट आंदोलन से भी जोड़कर देखा जा रहा है। उस समय ईंधन पर कर बढ़ाने की योजना के विरोध में बड़ी संख्या में लोग पीली जैकेट पहनकर सड़कों पर उतरे थे। इस बार भी सोशल मीडिया पर उस आंदोलन को दोबारा शुरू करने की अपील की गई।
पीली जैकेट फ्रांस में सड़क पर वाहन खराब होने या आपात स्थिति में दिखाई देने के लिए इस्तेमाल की जाती है। 2018 में प्रदर्शनकारियों ने इसे विरोध की पहचान बना लिया था।
राजनीतिक दलों ने भी रखे अपने विचार
प्रदर्शनों को लेकर फ्रांस के विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं की प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। दक्षिणपंथी नेता मरीन ले पेन ने पुलिस का समर्थन किया, जबकि वामपंथी नेता जीन-ल्यूक मेलांशों ने कहा कि अधिकांश प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहे और मीडिया में हिंसा की घटनाओं को अधिक प्रमुखता दी जा रही है।
फ्रांस में जारी आंदोलन ने महंगाई, ईंधन की कीमतों, शिक्षा व्यवस्था और सार्वजनिक सेवाओं से जुड़े मुद्दों को फिर चर्चा में ला दिया है। वहीं, हिंसा और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचने की घटनाओं के कारण प्रशासन के सामने कानून-व्यवस्था बनाए रखने की चुनौती भी बढ़ गई है।
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