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कोलकाता भगदड़ में परिवार उजड़े: मां की आंखों के सामने मौत, बेटे को बचाने के लिए पिता ने भीड़ में फेंका

कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के चोरबागान दुर्गा पूजा पंडाल में मची भगदड़ ने कई परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया। हादसे में लोगों ने अपने परिजनों को खो दिया, जबकि कई लोग घायल हो गए। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, बारिश से बचने के लिए पंडाल के अंदर जाने की कोशिश कर रही भीड़ के बीच धक्का-मुक्की बढ़ी और हालात बेकाबू हो गए। लोगों को संभलने तक का मौका नहीं मिला।

मां को बचाने पहुंचे बेटे ने आंखों के सामने दम तोड़ते देखा

हादसे में अपनी मां को खोने वाले 25 वर्षीय सोनू पाल ने बताया कि बारिश के दौरान लोग बाहर निकलने के बजाय पंडाल के अंदर जाने के लिए धक्का-मुक्की कर रहे थे। देखते ही देखते भीड़ इतनी बढ़ गई कि लोगों के लिए सांस लेना मुश्किल हो गया। कई लोग एक-दूसरे के ऊपर गिरने लगे और सोनू भी भीड़ के नीचे दब गए।

किसी तरह खुद को संभालकर जब वह मां के पास पहुंचे, तब तक उनकी मौत हो चुकी थी। सोनू के मुताबिक, उन्होंने अपनी मां को आंखों के सामने दम तोड़ते देखा। यह घटना उनके लिए बेहद दर्दनाक रही।

पांच साल के बेटे को बचाने के लिए पिता ने भीड़ में फेंका

एक अन्य प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि वह अपने परिवार के साथ दुर्गा पूजा पंडाल पहुंचे थे। भगदड़ मचने पर परिवार के लोग भीड़ में फंस गए। अपने पांच साल के बेटे की जान बचाने के लिए पिता ने उसे दूसरी तरफ फेंक दिया, लेकिन वह अपनी पत्नी को नहीं बचा सके। उनकी पत्नी भीड़ में गिर गईं और लोगों के पैरों तले दबकर उनकी मौत हो गई। प्रत्यक्षदर्शी ने अपनी बहन और भांजे को भी इस हादसे में खोने की बात कही।

एक अन्य व्यक्ति ने बताया कि वह अपनी पत्नी आरती के साथ पंडाल पहुंचे थे। भीड़ के दबाव में दोनों अलग हो गए। काफी तलाश करने पर पत्नी जमीन पर बेहोश मिलीं। वह उन्हें गोद में उठाकर मदद के लिए चिल्लाते रहे। उनके मुताबिक, एंबुलेंस मिलने में एक घंटे से अधिक समय लग गया। अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने पत्नी को मृत घोषित कर दिया।

डेढ़ घंटे तक लाइन में लगे रहे श्रद्धालु

आसनसोल से आए एक व्यक्ति के मुताबिक, पंडाल के प्रवेश द्वार पर करीब डेढ़ घंटे से लोग कतार में खड़े थे। बारिश शुरू होने के बाद लोग जल्दी अंदर जाने की कोशिश करने लगे। संकरे रास्ते और कम रोशनी के कारण स्थिति और मुश्किल हो गई। इसी दौरान एक बच्ची और एक लड़का गिर पड़े और उनके ऊपर भी लोग गिरने लगे। उनकी बेटी और पोती को भी अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।

एक महिला ने बताया कि अचानक पीछे से तेज धक्का लगा और लोग एक-दूसरे के ऊपर गिरने लगे। करीब 40 से 45 मिनट तक सांस लेना मुश्किल हो गया। उन्होंने कई लोगों को बचाने की कोशिश की, लेकिन भीड़ के कारण सफलता नहीं मिली। बाद में पंडाल का एक हिस्सा तोड़कर लोगों को बाहर निकालने का रास्ता बनाया गया।

अंधेरे और संकरे रास्तों में फंस गए लोग

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, इस बार पंडाल को ‘बियॉन्ड साउंड’ थीम पर तैयार किया गया था, जिसमें अंदर रोशनी बेहद कम रखी गई थी। पंडाल में प्रवेश के बाद श्रद्धालुओं को गोलाकार रास्ते से घूमकर बाहर निकलना पड़ता था। प्रवेश और निकास के लिए सीमित रास्ते थे, जो संकरी गलियों में खुलते थे।

शनिवार शाम बारिश शुरू होने के बाद प्रवेश द्वार पर भीड़ का दबाव बढ़ गया। इसी बीच निकास द्वार की रेलिंग गिरने की बात सामने आई। लोगों की भीड़ आगे बढ़ती रही और कई श्रद्धालु एक-दूसरे पर गिरने लगे। भगदड़ के दौरान बाहर निकलने का रास्ता तलाश रहे लोगों में अफरा-तफरी मच गई।

घायलों को अस्पताल पहुंचाने में भी हुई परेशानी

कुछ प्रत्यक्षदर्शियों ने दावा किया कि हादसे के तुरंत बाद मौके पर एंबुलेंस और सहायता की पर्याप्त व्यवस्था दिखाई नहीं दी। स्थानीय लोगों ने घायलों को बाहर निकालने और अस्पताल पहुंचाने में मदद की। कुछ घायलों को बाइक से अस्पताल ले जाने की बात भी सामने आई है।

हादसे के बाद पंडाल में सुरक्षा, भीड़ नियंत्रण, प्रवेश-निकास व्यवस्था और आपातकालीन इंतजामों को लेकर सवाल उठ रहे हैं। घटना के कारणों और जिम्मेदारी तय करने के लिए जांच की जरूरत है।

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